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खरीदारी या बिकवाली का ऑर्डर देते समय बरतें सावधानी

प्रिया नायर |  Jul 23, 2017 07:46 PM IST

क्या कभी ऐसा भी हुआ है जब आपने किसी कंपनी के 100 शेयर खरीदने का ऑर्डर दिया हो और आपका ब्रोकर 1,000 शेयर खरीद ले? या फिर आप शेयर खरीदना चाहते हों और गलती से बिकवाली का बटन दब जाए। आइए देखते हैं, ऐसे मामलों में क्या होता है। अगर ब्रोकर शेयर की गलत कीमत या इनकी संख्या में गलती करता है तो नुकसान उसे ही उठाना होगा।

 
जियोजित फाइनैंशियल के कार्यकारी निदेशक सतीश मेनन कहते हैं, 'बाजार का समय समाप्त होने के बाद ब्रोकर ग्राहक को कॉल करके ऑर्डर की पुष्टिï करेगा। अगर आपको लगता है कि गलत ऑर्डर दिया गया तो तुरंत बताएं। ब्रोकर इसके बाद फोन कॉल की जांच करेगा। ब्रोकर और ग्राहकों के बीच होने वाली सभी कॉल रिकार्ड की जाती हैं। अगर गलती ब्रोकर की तरफ से हुई है तो वह अपने खाते में अतिरिक्त शेयर लेगा और नुकसान खुद उठाएगा।' अगर कोई विवाद होता है तो ग्राहक को सबसे पहले ब्रोकरेज कंपनी के पास शिकायत दर्ज करानी चाहिए। यदि शिकायत का कोई समाधान न हो तो उसे एक्सचेंज में निवेशकों के शिकायत निवारण विभाग से संपर्क करनाचाहिए। यहां भी बात नहीं बने तो फिर मध्यस्थता का रास्ता चुना जा सकता है और अंत में उच्च न्यायालय का विकल्प तो है ही।
 
ऑर्डर में चूक (गलत कीमत या शेयरों की गलत संख्या) आम बात है। ऐसी स्थिति में नुकसान से बचने के लिए ब्रोकर इनडेमनिटी पॉलिसी लेते हैं, जो उन्हें सुरक्षा देती है। गलती होने पर ब्रोकर अपने एरर अकाउंट में शेयर डाल देता है। बीमा कंपनी कॉल रिकॉर्ड की जांच करके यह देखती है कि यह गलती कितनी वाजिब है। अगर गलती से वाकई गलती हो गई है तो बीमा कंपनी ब्रोकर के नुकसान की भरपाई करती है।
 
सेंट्रम वेल्थ मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक और सीईओ संदीप नायक कहते हैं, 'समस्या तब होती है जब ग्राहक अपने से सौदा  करते हैं और गलती कर बैठते हैं। अगर उनके खाते में रकम है तो सौदा हो जाएगा, भले ही उन्होंने गलती से शेयरों की ज्यादा संख्या या गलत कीमत का ऑर्डर डाला हो। ऐसा होने पर एकमात्र विकल्प यह है कि उन अतिरिक्त शेयरों को बेच दिया जाए। हो सकता है कि इसमें आपको मुनाफा भी हो जाए।' अगर कोई सौदा हो गया तो यह ऑर्डर तभी तभी रद्द होगा जब एक्सचेंज इसके लिए राजी हो जाए। आम तौर पर एक्सचेंज इसके लिए राजी नहीं होता है।
 
एक दूसरी गलती तब होती है जब ग्राहक टी2टी (ट्रेड-टू-ट्रेड) वर्ग के शेयर खरीदता है और उसी दिन बेचने के आर्डर देता है। यह संभव नहीं होता। ये ऐसे शेयर होते हैं, जिनकी डिलिवरी लेनी ही होती है। आप इनको अगले दिन ही बेच सकते हैं। मेनन कहते हैं, 'अब तकनीक से काफी मदद मिल रही है। गलती होने पर एक अलर्ट आता है, जिसमें ग्राहक से शेयर के लिए भुगतान करने और डिलिवरी लेने के लिए कहा जाता है। इस तरह ब्रोकर ग्राहक को उसी हिसाब से सूचित कर पाने में सक्षम होता है।'
 
कभी-कभी खरीदारी (बाई) के बजाय बिकवाली (सेल) का आर्डर चला जाता है। इस स्थिति में अगर ग्राहक के पास देने के लिए शेयर नहीं होते है तो उससे 'ऑक्शन पेनल्टी' वसूली जाती है। चूंकि ग्राहक के पास देने के लिए शेयर नहीं होते, लिहाजा स्टॉक एक्सचेंज नीलामी के जरिये बाजार से शेयर खरीदता है  और ग्राहक की ओर से इन्हें सौंप देता है। अतिरिक्त रकम का भुगतान ग्राहक (जिसने डिलिवरी नहीं दी) या ब्रोकर को करना होगा, जो इस पर निर्भर करेगा कि ऑर्डर किसने दिया था। 
 
'ऑक्शन पेनल्टी' की गणना उस कीमत पर होती है, जिस पर शेयर खरीदे गए थे। अगर शेयर के लिए उस कीमत पर कोई बिकवाल नहीं है तो सौदा अंतिम कारोबारी मूल्य के मुकाबले 20 प्रतिशत अतिरिक्त मूल्य पर पूरा होता है। बुरी से बुरी स्थिति यह हो सकती है कि अगर कोई बिकवाल नहीं हो तो निवेशक को नीलामी के दिन अंतिम कारोबारी मूल्य के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक रकम देनी पड़ जाए। अगर इस सौदे मेंं कोई मुनाफा होता है तो यह निवेशक सुरक्षा कोष में चला जाता है। ब्रोकरों और एक्सचेंजों ने सुरक्षा उपायों के तौर पर व्यक्तिगत टर्मिनलों पर सीमा तय कर दी है। इससे गलत ऑर्डर आगे नहीं बढ़ पाता। अगर कोई ऑर्डर निर्धारित सीमा से अधिक होता है तो ऑर्डर संपन्न कराने से पहले एक बार निवेशक से इसकी पुष्टिï और की जाएगी।
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