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कृषि ऋण माफी से बढ़ेगी बैंकों की परेशानी!

हंसिनी कार्तिक |  Jul 30, 2017 08:14 PM IST

अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता के लिए मशहूर एक प्रमुख भारतीय बैंक ने जब फंसे कर्ज बढऩे की जानकारी दी तो इससे यही संकेत गया कि बैंकिंग क्षेत्र में निश्चित ही सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। इस बैंक के फंसे कर्ज असल में कृषि क्षेत्र के कारण बढ़े हैं। एचडीएफसी बैंक के उप-प्रबंध निदेशक परेश सुकथनकर ने कहा कि जून 2017 की की पहली तिमाही में लगभग 60 प्रतिशत फंसी कर्ज संपत्तियां कृषि क्षेत्र की थीं क्योंकि कुछ राज्य सरकारों के कृषि ऋण माफी की घोषणा करने के बाद कुछ लोगों ने अपने ऋणों की किस्त और उनका पुनर्भुगतान टाल दिया। यह समस्या अगली तिमाही में भी जारी रह सकती है क्योंकि कर्ज वसूली भुगतान के प्रति ग्राहक के रुख पर निर्भर करती है। एचडीएफसी बैंक अकेला नहीं है जिसे कृषि ऋणों को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

 
आरबीएल बैंक का लगभग 101 करोड़ रुपये का एनपीए एमएफआई (सूक्ष्म वित्त संस्थान) की उधारी का है। इससे इसका सकल एनपीए अनुपात पहली तिमाही में एक साल पहले की तिमाही के 1.13 से बढ़कर 1.46 फीसदी हो गया। इंडसइंड बैंक के एमएफआई बहीखाते में लगभग 31 करोड़ रुपये का एनपीए दर्ज है जिसमें से 28 करोड़ रुपये पहली तिमाही में मुहैया कराए गए थे। बैंक के अनुसार पोर्टफोलियो के और 50 करोड़ रुपये जोखिम में हैं और इसलिए उसे दूसरी तिमाही में 10 करोड़ रुपये का  प्रावधान करना पड़ सकता है।
 
हो सकता है कि इनमें से कुछ आंकड़े चिंताजनक न हों। लेकिन यह स्पष्टï है कि कृषि ऋण माफी का असर ज्यादातर विश्लेषकों के अनुमानों से अधिक है। मैक्वायरी कैपिटल के सुरेश गणपति कहते हैं, 'कई राज्यों में घोषित कृषि ऋण माफी से कर्ज वसूली की प्रक्रिया प्रभावित हुई है क्योंकि कई किसानों ने रकम चुकाना (बैंकों और एमएफआई को) बंद कर दिया है। हमारा मानना है कि पुन: भुगतान की क्षमता के मुकाबले भुगतान न करने का रवैया ज्यादा गंभीर समस्या है।'
 
हालांकि अगर यह समस्या निजी बैंकों तक को नुकसान पहुंचा रही है तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (जिनका बैंकिंग क्षेत्र के कृषि ऋणों में 48 से 50 फीसदी योगदान है) की हालत तो चिंताजनक होगी। अन्य श्रेणी एमएफआई की है जो निवेशकों की चिंता दूर करने की कोशिशों में लगे हैं मगर मौजूदा रुझान को देखते हुए काफी नाजुक स्थिति में लगते हैं। हालांकि उनका पूरा पोर्टफोलियो जोखिम में नहीं है।  ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के लिए दिए जाने वाले कृषि ऋणों को अन्य परिसंपत्तियों की जमानत पर दिया जाता है। वर्ष 2008 की कृषि ऋण माफी के बाद फसल ऋणों को भी गिरवी, खासकर सोना रखने पर ही दिया जाता है। इसलिए फसल ऋणों पर जोखिम बहुत ज्यादा नहीं है। गणपति का मानना है कि फिर भी कर्ज चुकाने की इच्छा शक्ति एक बड़ी समस्या है और इसलिए बाजार अब इससे संबंधित रुझानों पर नजर रखेगा।
 
एमएफआई क्षेत्र के ऋण असुरक्षित हैं। इसलिए भारत फाइनैंशियल, उज्जीवन फाइनैंशियल सर्विसेज और इक्विटास होल्डिंग्स एक और तिमाही में कर्ज गुणवत्ता की समस्या से जूझ सकती हैं। इसके अलावा, यदि इंडसइंड बैंक का प्रदर्शन भी कमजोर है तो इससे भी एमएफआई के लिए भी कमजोर ऋण वृद्घि का संकेत मिलता है। इंडसइंड ने पहली तिमाही के दौरान इस क्षेत्र के लिए ऋण वृद्घि दर्ज नहीं की है।
 
सवाल यह है कि समस्या (कृषि ऋण माफी से दबाव) कब तक बरकरार रहेगी। एमएफआई को इससे उबरने में लंबा समय लग सकता है। कई निजी बैंकों ने एमएफआई क्षेत्र को प्रत्यक्ष या परोक्ष से धन दे रखा है। स्थिति और बिगड़ी तो उनके शेयर मूल्यांकन की तेजी प्रभावित हो सकती है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कृषि खाते की परिसंपत्तियों की गुणवत्ता पर फिलहाल बाजार ध्यान नहीं दे रहा है। लेकिन यदि स्थिति और बदतर होती है तो इससे सुधरती धारणा पर असर पड़ सकता है।
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