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उर्वरक कंपनियों के मुनाफे में तेजी

दिलीप कुमार झा |  Jul 30, 2017 08:15 PM IST

लगातार दूसरे वर्ष सामान्य मॉनसून की उम्मीद से उर्वरक कंपनियों की बिक्री में भारी तेजी की उम्मीद है। इस कारण अप्रैल-जून तिमाही में उर्वरक कंपनियों का मुनाफा 44 प्रतिशत तक बढऩे की संभावना है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अध्ययन में कहा गया है कि कुछ कंपनियों के गैर-उर्वरक व्यवसाय के शुद्घ लाभ में वृद्घि हो सकती है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीएसएफसी को बेहतर कैप्रो-बेनजेन बिक्री और कम कर दरों से मदद मिलेगी। टाटा केमिकल्स के मुनाफे को उसके वैश्विक परिचालन में सुधार और कर्ज कम होने से मदद मिलेगी। मगर चंबल फर्टिलाइजर्स के शुद्ध मुनाफे पर करीब 5 फीसदी का दबाव आ सकता है। 

 
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज में शोध विश्लेषक प्रकाश गौरव गोयल ने कहा, 'यूरिया की बिक्री में 9 फीसदी जबकि  फॉस्फोरस और पोटेशियम (पीऐंडके) की बिक्री में 5 फीसदी की वृद्घि का अनुमान है। बिक्री में वृद्घि की रफ्तार पर भंडारण घटाने का भी असर हो सकता है क्योंकि उद्योग प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर अमल के असर का इंतजार कर रहा है।' भारत में उर्वरक उत्पादन वित्त वर्ष 2013 से 4 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर से बढ़ा है और अब इसके बढ़कर 4.6-4.7 करोड़ टन पर पहुंच जाने का अनुमान है जिससे इसके आयात में तेज गिरावट आएगी। सरकार ने वर्ष 2021 तक यूरिया आयात  समाप्त करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने का भी निर्णय लिया है। 
 
दिलचस्प बात यह है कि सरकार कोयला और तेल क्षेत्र की प्रमुख सार्वजनिक कंपनियों के साथ मिलकर बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों के कायाकल्प और गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर रही है। इससे देश को यूरिया निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'घरेलू उर्वरक निर्माताओं को राहत देने के लिए सरकार ने सब्सिडी घटाने का प्रयास किया है जिससे कंपनियों को कुल सब्सिडी वित्त वर्ष 2016 के 35,000 करोड़ रुपये से घटाकर वित्त वर्ष 2017 में 20,000 करोड़ रुपये करने में मदद मिली है। इससे उर्वरक कंपनियों को दो वर्षों के लिए परिचालन और शुद्घ मुनाफा मजबूत बनाने में मदद मिली है। लेकिन लगातार वृद्घि के लिए देश में उत्पादकता में सुधार लाने, उत्पादन में विविधता लाने और कृषि रोजगार के बड़े हिस्से को गैर-कृषि गतिविधियों में स्थानांतरित करने की जरूरत है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि शोध एवं विकास (आरएंडडी), सिंचाई और उर्वरकों पर बड़ा निवेश करने की जरूरत है। इससे उर्वरक क्षेत्र के लिए व्यापक अवसर पैदा होंगे। ' उर्वरक के सभी कच्चे माल की कीमतें पिछले 18 महीने में तेजी से गिरी हैं। 
 
फॉस्फोरिक एसिड की कीमत दिसंबर 2015 के 810 डॉलर प्रति टन के स्तर से लगभग 28 फीसदी घटकर अप्रैल 2017 में 580 डॉलर प्रति टन पर रह गई। इसी तरह रॉक फॉस्फेट्ïस की कीमत भी दिसंबर 2015 के 146 डॉलर प्रति टन के स्तर से लगभग 18 फीसदी घटकर अप्रैल 2017 में 120 डॉलर रह गई। जहां अमोनिया की कीमत दिसंबर 2015 के मुकाबले इस साल अप्रैल तक लगभग 13 फीसदी नीचे आई, वहीं इस अवधि में सल्फर में लगभग 32 फीसदी तक की गिरावट आई है।
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