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आयकर के नाम पर फर्जी ई-मेल से बचकर

तिनेश भसीन |  Jul 30, 2017 08:18 PM IST

अगर आपको अपने ई-मेल बॉक्स में कथित तौर पर आयकर विभाग की तरफ से भेजा गया कोई ई-मेल मिलता है और इसमें आपसे किसी तरह के बकाया कर की मांग की गई है और कहा गया हो कि इसे तुरंत जमा कराएं तो घबराने की जरूरत नहीं है। सावधान हो जाइए। पूरी संभावना है कि यह मेल आपको साइबर अपराधियों या हैकरों ने भेजा हो, जो आपके बैंक खाते की जानकारी पाने की कोशिश कर रहे हैं। 

 
जानकारों का मानना है कि पिछले एक महीने में इस तरह के ई-मेल में भारी इजाफा हुआ है। ई ऐंड वाई में टैक्स पार्टनर और इंडिया मोबलिटी लीडर अमरपाल चड्ढïा कहते हैं, 'साइबर अपराधी जुलाई में जान-बूझकर ऐेसे ई-मेल भेजते हैं, क्योंकि ज्यादातर करदाता इस महीने आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं और उनके जेहन में कर की बात होती है।' चड्ढïा कहते हैं कि उनके ग्राहकों को भी ऐसे मेल मिले हैं, जिनमें कहा जाता है कि आयकर विभाग के पास आपका रिफंड अटका हुआ है और आप तुरंत इसका दावा कर सकते हैं।
 
इन ई-मेल में एक लिंक भी दिया जाता है और कहा जाता है कि इस लिंक पर क्लिक कर के वे बकाया कर का भुगतान कर सकते हैं या कर वापस ले सकते हैं। इस लिंक पर क्लिक करने पर आपको यह किसी दूसरे वेब पेज पर ले जाता है, जो आयकर विभाग की वेबसाइट की तरह ही लगता है। फिर व्यक्ति को बैंक का चयन करने को कहा जाता है। इसके बाद आपको बैंक की फर्जी वेबसाइट पर ले जाया जाता है। ज्यों ही कोई शख्स इस फर्जी साइट पर लॉग इन करता है, साइबर अपराधी अहम सूचनाएं चुरा लेते हैं।
 
कई बार हैकरों को करदाता के बैंक खाते की पहले से ही जानकारी होती है। जब कोई शख्स ई-मेल से मिले लिंक पर क्लिक करता है तो उसे सीधे बैंक की नकली वेबसाइट पर ले जाया जाता है। ऐसे ई-मेल की पहचान करना कोई मुश्किल काम नहीं है। इसके लिए सबसे पहले ई-मेल पते पर गौर करने की जरूरत है। ई-मेल से अक्सर ऐसा लगता है कि उसे इनकमटैक्सइंडिया डॉट गॉव डॉट इन से भेजा गया है। 
 
मगर जीमेल जैसे कई सेवा प्रदाता उपयोक्ता को यह बताते हैं कि क्या मेल वाकई उस वेबसाइट से आया है। ऐसे ई-मेल में आप देखेंगे कि उसमें ई-मेल पते के बाद वाया होता है। फिर सर्वर का नाम होता है। इसका मतलब कि यह मेल किसी और मेल सेवा के जरिए भेजा गया है।  आयकर विभाग आमतौर पर इन मेल पते से मेल भेजता है। डूनोटरिप्लाई एट दि रेट इनकमटैक्स इंडिया ईफाइलिंग डॉट गॉव डॉट इन, इनटिमेशन्स एट दि रेट सीपीसी डॉट गॉव डॉट इन और कैंपेन एट दि रेट सीपीसी डॉट गॉव डॉट इन। आजकल फर्जी ई-मेल डूनोटरिप्लाई एट दि रेट इनकमटैक्स इंडिया फाइलिंग डॉट गॉव डॉट इन से आते हैं। यह हू-ब-हू है मगर इसमें ई अक्षर गायब है। 
 
अगर मेल के साथ आए लिंक पर क्लिक करते हैं और यह आपको बैंक या आईटी विभाग की नकली वेबसाइट पर ले जाता है तो वेबसाइट का पता जरूर चेक करें। यह वैसा नहीं होगा जो असली बैंक साइट या आयकर विभाग का होता है। अगर आप ऑनलाइन लेनदेन कर रहे हैं तो यह जरूर देखें कि पता एचटीटीपी के बजाय एचटीटीपीएस से शुरू होता है या नहीं। इसमें क्लोज्ड लॉक साइन (बंद ताला) होना चाहिए। इसका अर्थ हुआ कि वेबसाइट सुरक्षित और सत्यापित है। वैसे, जोखिम कम करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि लाइसेंस वाला एंटीवाइरस सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जाए। यह भी संभव है कि ई-मेल के साथ लिंक के बजाय कोई अटैचमेंट लगा हो। ऐसा है तो अटैचमेंट डाउनलोड मत कीजिए क्योंकि ये स्पाईवेयर हो सकते हैं, जो आपके कंप्यूटर में घुस सकते हैं। 
 
कर विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी विभाग जुलाई या अगस्त में कर की मांग या वापसी की सूचना नहीं भेजता। आएसएम एस्ट्यूट कंसल्टिंग ग्रुप के संस्थापक सुरेश सुराणा कहते हैं, 'अगर आपको जुलाई या अगस्त में ई-मेल मिलता है तो यह अपने आप में खतरे की चेतावनी है। आयकर विभाग आपसे अलग से बैंक खाते की जानकारी भी नहीं मांगता है। करदाता को रिटर्न फाइल करते वक्त इस तरह की जानकारी देनी होती हैं।'
 
फर्जी ई-मेल आम तौर पर आपसे तत्काल बकाया रकम की मांग करता है या रिफंड का दावा करने के लिए अगले 7 दिन का समय देता है। चड्ढï़ा कहते हैं, 'आयकर विभाग किसी भी संवाद में कम से कम 30 दिन का समय देता है।' वह कहते हैं कि आयकर विभाग से किसी तरह का नोटिस मिलने पर ग्राहक को हमेशा अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से मशविरा करना चाहिए। ई-मेल मिलने पर इसकी सत्यता की जांच आयकर विभाग के संपर्क नंबरों पर भी की जा सकती है। सबसे बेहतर तरीका है आप अपना ई-फाइलिंग अकाउंट लॉग इन करें जहां आप रिफंड या कर देनदारी के बारे में तुरंत पता कर सकते हैं। 
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