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बाजार बहुत तेज तो एकमुश्त न करें निवेश

संजय कुमार सिंह |  Aug 06, 2017 09:56 PM IST

जब बीएसई का संवेदी सूचकांक या सेंसेक्स 32,000 अंकों को पार कर गया हो तो बहुत कम लोग ऐसे होंगे, जो यह कह रहे होगें कि भारतीय बाजारों में आगे बहुत ज्यादा संभावनाएं नहीं हैं। वर्ष 2007 में भी यही स्थिति थी और इसी उत्साह में बहुत से निवेशक फंस गए थे। नोएडा के उद्यमी वैभव कुमार 31 दिसंबर 2007 को एक पार्टी में गए थे, जहां उन्होंने एक दोस्त के मुंह से सुना कि कैसे उसने उस साल शेयर बाजार से भारी पैसा कमाया था। कुमार ने भी फैसला किया कि वह इक्विटी म्युचुअल फंडों में निवेश करेंगे। अगले ही दिन उन्होंने जेएम बेसिक फंड में 1 लाख रुपये का निवेश कर दिया। यह फंड 2007 में सबसे अच्छा प्रर्दशन करने वाला डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड था। कुछ दिनों बाद 8 जनवरी 2008 को सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने के बाद बाजार गिरने लगे। वर्ष 2008 में बाजारों में भारी गिरावट आई। कुमार जिन लोगों को जानते हैं, उनमें से बहुत से लोगों ने घाटा उठाया और शेयरों में कभी पैसा नहीं लगाने की कसम खा ली। हालांकि कुमार ने अपने निवेश को बरकरार रखने का फैसला किया। लेकिन पांच साल बाद भी वह शेयर बाजार की चोट से उबर नहीं पाए थे क्योंकि उस समय तक यह फंड नकारात्मक रिटर्न दे रहा था यानी उनके निवेश से 18.51 फीसदी कम। 

 
अच्छा फंड या तुक्का? 
 
जब बाजार नई ऊंचाई पर होते हैं तो आप निवेश करते समय एक गलती कर सकते हैं। यह गलती पिछले वर्ष में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंडों में से किसी एक में निवेश करने की होती है। आमतौर पर ऐसे फंड बाद के वर्षों में अपने प्रदर्शन को दोहरा नहीं पाते हैं। बाजार में हर बार तेजी कुछ क्षेत्रों की बदौलत आती है। तेजी लाने वाले इन क्षेत्रों में भारी भरकम निवेश करके फंड अपने चार्ट में शीर्ष पर पहुंच जाते हैं यानी सबसे अच्छा प्रदर्शन कर लेते हैं। लेकिन जब बाजार गिरता है तो आमतौर पर तेजी लाने वाले ऐसे क्षेत्रों पर ही तगड़ी मार पड़ती है और कई बार ये वर्षों तक कमजोर बने रहते हैं। तब तेजी के दौर में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर भी चोट पड़ती है। मिंटवॉक के सह-संस्थापक निखिल बनर्जी कहते हैं, 'किसी भी फंड को एक साल के प्रदर्शन के आधार पर न चुनें। यह देखें कि उसने बाजार के अलग-अलग दौर में कैसा प्रदर्शन किया है। तेजी के दौर में प्रदर्शन के अलावा यह भी देखें कि क्या इसने गिरते बाजार में नुकसान से सुरक्षा के लिए अच्छा काम किया है।'
 
एकमुश्त में जोखिम  
 
निवेशक दूसरी गलती यह करते हैं कि वे तेजी के बाजार में एकमुश्त निवेश करते हैं। कोटक म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह कहते हैं, 'एकमुश्त निवेश से आपको बाजार में गिरावट के समय अपने यूनिट की खरीद लागत को औसत करने का फायदा नहीं मिलता। अगर किसी निवेशक ने 2007 में सबसे बढिय़ा प्रदर्शन करने वाले फंड में एकमुश्त निवेश किया होगा तो उसे बड़ा नुकसान हुआ होगा। अगर उसने पांच वर्षों तक इन फंडों में एसआईपी के जरिये निवेश किया होता तो प्रतिफल तुलनात्मक रूप से ज्यादा बेहतर होता।
 
सेक्टर फंड से बचें
 
जब निवेशक बाजार की तेजी के दौरान दांव लगा रहे हों उन्हें सेक्टर फंडों से बचना चाहिए। वर्ष 2007 में बुनियादी ढांचा क्षेत्र तेजी की अगुआई कर रहा था। वर्ष 2007 के अंत में इन फंडों का एक साल का औसत प्रतिफल 81.45 फीसदी रहा था। हालांकि इन फंडों ने अगले तीन वर्षों में 7.68 फीसदी और पांच वर्षों के दौरान 8.07 फीसदी का नकारात्मक औसत प्रतिफल दिया यानी घाटा दिया।  पीपीएफएएस म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी राजीव ठक्कर कहते हैं, 'सेक्टर फंड से बचें। हमने देखा है कि निवेशकों ने 1990 के दशक के अंत में टेक्नोलॉजी फंडों और 2007 के बाद रियल एस्टेट, बुनियादी ढांचा और जिंस फंडों में नुकसान उठाया है। इन फंडों में डायवर्सिफाइड म्युचुअल फंडों की तुलना में ज्यादा जोखिम होता है।'
 
एनएफओ नहीं सस्ते  
 
निवेशकों को न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) यानी म्युचुअल फंडों की नई योजना से भी बचना चाहिए। आमतौर पर जब बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहे होते हैं तो फंड हाउस निवेशकों में तेजी के रुख का फायदा उठाते हुए रकम जुटाने की कोशिश करते हैं। हालांकि एनएफओ को मंजूरी देने में सेबी सख्ती बरत रहा है। इस कारण इस बार तेजी के दौर में बाजार में बहुत ज्यादा सेक्टर फंड एनएफओ नहीं आए हैं। मगर फंड हाउस क्लोज ऐंडेड फंड पेश कर रहे हैं जिनसे निवेशकों को बचना चाहिए। ओपन ऐंड फंड ठीक हैं। आप इनका ट्रैक रिकॉर्ड देख सकते हैं। इस समय शेयरों में पैसे डालने वालों को लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहिए। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के चीफ फाइनैंशियल प्लानर विशाल धवन कहते हैं, 'कम से कम 7 से 10 साल के लिए निवेश कीजिए ताकि अगर बाजार में गिरावट भी आए तो आपके पास इससे उबरने का समय हो।'
 
संपत्तियों में निवेश करें  
 
अगर आपने अपने निवेश का आवंटन शेयरों, निश्चित आय और सोने में 70:20:10 के अनुपात में किया है तो इसमें बदलाव नहीं करें और न ही शेयरों में निवेश का अनुपात इसलिए बढ़ाएं क्योंकि इस समय शेयर बाजार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले संपत्ति वर्ग में बिकवाली कर और कमजोर प्रदर्शन करने वाली संपत्ति में निवेश कर नियमित अंतराल पर अपने निवेश को संतुलित करते रहें। शेयरों में सभी श्रेणियों में आवंटन करें। उदाहरण के लिए आप लार्ज, मिड और स्मॉल कैप फंडों में 70:20:10 के अनुपात मेंं आवंटन कर सकते हैं।
 
धवन कहते हैं, 'लार्ज कैप फंडों में ज्यादा राशि का आवंटन करें क्योंकि गिरावट के दौरान ये शेयर ज्यादा प्रतिरोध दिखाते हैं और कम गिरते हैं। मिड और स्मॉल कैप फंडों में अपना आवंटन बहुत ज्यादा न बढ़ाएं क्योंकि इनकी कीमतों में तेजी का बुलबुला बन गया है। गिरावट के दौर में छोटी कंपनियों को ज्यादा नुकसान होता है।'  बैलेंस्ड फंड या डायनेमिक इक्विटी फंड (जो मूल्यांकन अधिक होने पर शेयरों में निवेश घटाते हैं) भी अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं। अगर आपको अपने बच्चे की कॉलेज शिक्षा जैसी जरूरत के लिए एक साल में पैसे की जरूरत होगी तो आप तुरंत इक्विटी फंडों से रकम निकालें और इसे फिक्स्ड इनकम योजनाओं में निवेश करें। 
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