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लीजिए बिना डीलर, किराये पर घर

संजय कुमार सिंह |  Aug 13, 2017 07:22 PM IST

देश के ज्यादातर महानगरों में दूसरे हिस्सों से युवा पेशेवरों और छात्रों की बड़ी आबादी आती है, जिनके लिए घर ढूंढना और ब्रोकर की सेवाएं लेना जरूरी हो जाता है। बहुत से लोगों के लिए यह अनुभव अच्छा नहीं होता। लेकिन इन दिनों ऐसे बहुत से पोर्टल आ गए हैं, जो बिना किसी ब्रोकर के किराये पर घर लेने में मदद करते हैं। इनके जरिये आप सीधे मकान मालिक से बात कर सकते हैं। हालांकि ऐसे प्लेटफॉर्मों के दायरे में बहुत से शहर नहीं हैं, इसलिए आपको परंपरागत ब्रोकर पर भी निर्भर रहना पड़ता है। हम यहां बता रहे हैं कि आपको किसी पोर्टल में क्या खासियत देखनी चाहिए। 

 
ब्रोकरों से क्यों बचते हैं 
 
इसकी एक प्रमुख वजह यह है कि घर ढूंढने वाले बहुत से लोग ब्रोकर को कमीशन नहीं देना चाहते हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सह-आवास (को-लिविंग) मुहैया कराने वाली कोहो डॉट इन के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) उदय लक्कड़ कहते हैं, 'आप आम तौर पर 11 महीने के करार पर एक महीने का किराया प्रोपर्टी डीलर को ब्रोकरेज के रूप में देते हैं। इस तरह यह कमीशन भारी भरकम यानी 9.09 फीसदी होता है। यही ब्रोकर मकान मालिक से भी कमीशन लेते हैं। मकान मालिक यह बोझ भी किरायेदार पर ही डालता है। यह भी संभव है कि किरायेदार पूरे 11 महीने मकान में नहीं रहे। अगर वह 6 महीने बाद घर बदलता है तो उसे फिर से ब्रोकर को कमीशन देना पड़ता है।'
 
बेंगलूरु की नोब्रोकर डॉट कॉम के सह-संस्थापक और सीईओ अमित कुमार अग्रवाल ने कहा, 'इसका कोई मतलब नहीं है कि सूचना तकनीक के इस युग में इसलिए इतना अधिक कमीशन ब्रोकर को दें कि फलां जगह फ्लैट उपलब्ध है। इन दिनों बिचौलिये की भूमिका केवल एक सेवा तक सीमित रह गई है, जिसके लिए आप मामूली फीस देते हैं। ऐसा यात्रा बुकिंग, फिल्म के टिकट खरीदने और विवाह के लिए दोनों पक्षों को मिलाने आदि में होता है और अब यह रियल एस्टेट में भी होने लगा है।' 
 
प्रॉपर्टी ब्रोकरेज के धंधे में कोई भी आ सकता है। इस पर कोई रोक नहीं है। लिहाजा, इस क्षेत्र में पहले से मौजूद लोग कितने पेशेवर हैं, इस पर भी सवाल उठते हैं। अक्सर डीलरों को कोई भी सौदा कराने और अपना कमीशन लेने की इतनी हड़बड़ी होती है कि वे किरायेदार को दूसरे बेहतर संभावित विकल्प के लिए इंतजार करने का सुझाव नहीं देते बल्कि अपने पास उपलब्ध घर को ही लेने के लिए दबाव डालते हैं। कभी-कभी तो वे सौदा कराने के लिए झूठ भी बोलते हैं।
 
खत्म होती भूमिका
 
किरायेदार तलाशने वाले मकान मालिक नोब्रोकर डॉट कॉम की वेबसाइट या ऐप पर जाकर तस्वीर सहित अपने मकान का ब्योरा डाल सकते हैं। जो लोग मोबाइल या इंटरनेट का इस्तेमाल करना नहीं जानते हैं, वे पोर्टल को कॉल सकते हैं और उनकी सूचना के आधार पर पोर्टल पर यह जानकारी डाल दी जाती है।  जो लोग घर ढूंढ रहे हैं, वे वेबसाइट या ऐप पर सूचीबद्ध मकानों का ब्योरा हासिल कर सकते हैं। अगर उन्हें कोई मकान पसंद आता है तो वे उस पर क्लिक करें। इससे उन्हें मकान मालिक का नंबर मिल जाएगा और वे उससे सीधे बात कर सकते हैं। अग्रवाल कहते हैं, 'सौदा करने में दोनों पक्षों की रुचि होती है, इसलिए वे तुरंत सौदा कर सकते हैं और आपसी सहमति से किराया भी तय कर सकते हैं।' पोर्टल पर ब्योरा डालने के लिए मकान मालिक और मकान ढूंढने वाले किरायेदार से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। वेबसाइट केवल रेंटल एग्रीमेंट (किरायानामा) बनवाने या रिलेशनशिप मैनेजर जैसी सेवाएं मुहैया कराने के लिए शुल्क लेती है। 
 
सह-आवास की पेशकश
 
ब्रोकरों की भूमिका खत्म करने के अलावा कोहो डॉटइन ब्रांडेड आवास भी मुहैया कराती है। वह बड़े भवन लंबे समय के लिए पट्टे पर लेती है और उनमें जरूरी सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध कराती है और फिर उन्हें युवा पेशेवरों को किराये पर दे देती है। लक्कड़ कहते हैं, 'भारत में अच्छे आवासों की भारी किल्लत है। हम ग्राहकों को जो मकान मुहैया कराते हैं, उन पर पूरा नियंत्रण रखते हैं।'  सह-आवास वाले इन भवनों में आमतौर पर जिम, रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन, बेड, मैट्रेस, एयर कंडीशनर जैसी कई सुविधाएं होती हैं। सेवाओं में साफ-सफाई, मरम्मत, वाई-फाई आदि शामिल हैं। इसमें रहने वालों को भुगतान, शिकायत आदि के समाधान के लिए ऐप मुहैया कराया जाता है।
 
साझा मकान 
 
अगर आपने कोई फ्लैट किराये पर लिया है और आप साथी किरायेदार तलाश रहे हैं या आप किसी साझा फ्लैट में किसी स्लॉट की तलाश में हैं तो फ्लैटमेट डॉट इन पर जाना सबसे बेहतर है। फ्लैटमेट डॉट इन के संस्थापक सुखबीर सिंह कहते हैं, 'ब्रोकर साझा मकान दिलवाने का काम नहीं करते हैं। इसके अलावा फ्लैट साझा करने से पहले आप संभावित साझेदार की आदतों के बारे में जानना चाहेंगे। हमारे प्लेटफॉर्म पर ब्योरा देते समय आप बता सकते हैं कि आपको किस तरह का साझेदार चाहिए-जल्द उठने वाला या रात में जगने वाला, धूम्रपान करने वाला या नहीं करने वाला।'
 
यूजर को फ्लैटमेट डॉट इन के मोबाइल ऐप पर पंजीकरण करना होता है। इसके बाद वह ऐप पर उपलब्ध सभी ब्योरे देख सकता है। अगर उसे ं अपनी जरूरत के मुताबिक कुछ नहीं मिलता है तो वह यह डाल सकता है कि उसको किस तरह के साझेदार की तलाश है। यूजर सूचीबद्ध ब्योरों को मुफ्त में देख सकते हैं, लेकिन दूसरे पक्ष से बातचीत करने से पहले उन्हें फीस चुकानी होती है। यह प्लेटफॉर्म दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलूरु और पुणे में काम कर रहा है।
 
परंपरागत ब्रोकर 
 
इन प्लेटफॉर्मों में से ज्यादातर हाल में शुरू हुए हैं और उनकी सेवाओं का दायरा कुछ शहरों और क्षेत्रों तक ही सीमित है। लिहाजा, ज्यादातर लोगों को किराये पर घर लेने के लिए परंपरागत ब्रोकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। जब परंपरागत ब्रोकर की सेवाएं लें तो यह ध्यान रखें कि वह पेशेवर है या नहीं। उसका दफ्तर होना चाहिए और कामकाज संभालने के लिए कर्मचारी होने चाहिए। नौसिखिये और छोटे ब्रोकर या अकेले ही भागदौड़ करने वाले डीलर से बचें। अगर आप शहर में नए आए हैं तो आपकी कंपनी का मानव संसाधन विभाग या आपके सहकर्मी शहर के पेशेवर ब्रोकरों के बारे में बता सकते हैं।
 
पेशेवर ब्रोकर का काम करने का तरीका दूसरों से अलग होता है। बेंगलूरु में सिल्वरलाइन रियल्टी के प्रबंधक साजिद एम कहते हैं, 'एक बार जब आप उसे अपनी पसंद के इलाके और आकार की जरूरत के बारे में बता देते हैं तो वह एक दिन के भीतर आपको कई मकानों की सूची दे सकता है। वह आपको सबसे उपयुक्त जगह (आपके कार्यालय या बच्चों के स्कूल के नजदीक या दोनों से बराबर दूरी पर) के बारे में बता सकता है। वह इलाके की भी जानकारी दे सकता है। वह आपको मुलाकात की जगह का रास्ता भेज देगा, जहां से वह आपको घर दिखाने ले जाएगा। कुछ घर दिखाने के बाद उसे यह समझ आ जाएगा कि आपको किस तरह के घर की तलाश है और इसके बाद वह सीधे आपको इस तरह का घर दिखाएगा, जो आपकी जरूरत के मुताबिक है।' पेशेवर ब्रोकर को किसी परियोजना में सुविधाओं, मरम्मत शुल्क आदि के बारे में जानकारी देने में सक्षम होना चाहिए। वह आपको उचित किराये पर सही मकान दिलाने में समर्थ हो सकता है। साथ ही कागजी कार्रवाई का काम कराएगा और लीज बनने के बाद आपको मकान संभलवाने की सभी औपचारिकताएं पूरी कराएगा। मकान मालिक के साथ कोई विवाद होने की स्थिति में वह मध्यस्थता करने के लिए मौजूद रहेगा। 
कीवर्ड real estate, property, रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम,

  
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