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जमीन में निवेश से मिल सकता है कई गुना प्रतिफल

प्रिया नायर |  Aug 13, 2017 07:23 PM IST

भूखंड खरीदना चुनौती भरा काम है। इसकी वजह यह है कि भूखंड की कीमत कई मापदंडों से तय होती है और इसलिए सही कीमत का अंदाज लगा पाना मुश्किल होता है। अक्सर भूखंड के मालिकाना हक को लेकर भी अड़चनें होती हैं। खरीद के बाद हमेशा अतिक्रमण का खतरा रहता है। वहीं जमीन के लिए ऋण मिलना भी मुश्किल काम है और इसमें कोई कर लाभ भी नहीं मिलता है। इसके बावजूद आजकल बहुत से लोग निवेश के लिए या दूसरे घर के निर्माण और जैविक खेती करने के लिए  जमीन खरीद रहे हैं। जिन बिल्डरों और डेवलपरों के पास पहले से बड़े-बड़े भूखंड हैं, वे रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम (रेरा) लागू होने के बाद इन पर इमारतें बनाने के बजाय इन्हें प्लॉटों के रूप में बेच रहे हैं। कुशमैन ऐंड वेकफील्ड के वरिष्ठ निदेशक (अनुसंधान सेवाएं) सिद्धार्थ गोयल कहते हैं, 'अब आपको सभी मंजूरियां लेनी होंगी और समय पर प्रॉपर्टी सौंपने की गारंटी भी देनी होगी। जिन डेवलपरों को वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और जिन्हें इस बात का पक्का यकीन नहीं है कि वे समय पर डिलिवरी कर पाएंगे या नहीं तो वे अपनी जमीन या बड़े भूखंड बेचने के बारे में विचार कर सकते हैं। अगर परियोजना को संयुक्त उपक्रम के जरिये भी विकसित किया जा रहा है तो भी नियमों का पालन न होने की स्थिति में भूस्वामी को जिम्मेदार माना जाएगा।'हालांकि रेरा के बाद जमीन ज्यादा आकर्षक संपत्ति बन सकती है। जेएलएल इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) और कंट्री हेड रमेश नायर कहते हैं, 'जमीन बेचने से पहले विक्रेता के पास भूमि के साफ-सुथरे और सत्यापित दस्तावेज होने चाहिए। इन दस्तावेज से उसका मालिकाना हक साबित होना चाहिए और यह भी कि बेची जा रही जमीन हर तरह की कानूनी दिक्कत से मुक्त है। इसके अलावा अब जमीन और इसकी गुणवत्ता, कानूनी स्थिति या कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से संबंधित भ्रामक विज्ञापन दंडनीय होंगे।'

 
भूमि के प्रकार को जांचें 
 
कोई भूखंड खरीदने से पहले यह पता कर लें कि यह कृषि भूमि है या गैर-कृषि। महाराष्ट्र और कर्नाटक में केवल किसानों को ही कृषि भूमि खरीदने की मंजूरी है। अन्य राज्यों में ऐसा प्रतिबंध नहीं है। कुछ राज्यों में एक सीमा से अधिक बड़े कृषि भूखंड खरीदने पर रोक है। अनिवासी भारतीयों के लिए भी कृषि भूमि खरीदना आसान नहीं है। उन्हें यह जमीन किसी भारतीय निवासी के साथ मिलकर संयुक्त रूप से खरीदनी होगी। भारतीय मूल के व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकते हैं, वे केवल तैयार प्रॉपर्टी ही खरीद सकते हैं। अगर आप कृषि भूमि खरीदते हैं और इस पर निर्माण करना चाहते हैं तो आपको इसे गैर-कृषि भूमि में तब्दील कराने के लिए स्थानीय प्राधिकरणों में आवेदन करना होगा।  कॉलियर्स इंटरनैशनल के कार्यकारी निदेशक (कार्यालय सेवाएं एवं निवेश बिक्री) रवि आहूजा कहते हैं, 'आमतौर पर यह आवेदन तहसील में करना होता है क्योंकि जमीन के संभवतया शहर के बाहर होने की संभावना रहती है। इसमें समय और पैसा खर्च होता है।'
 
भूमि उपयोग का पता करें  
 
केवल भूमि को गैर-कृषि में तब्दील कराने से आपको कोई भी निर्माण करने की खुली छूट नहीं मिल जाएगी। आहूजा कहते हैं, 'आप केवल आवासीय निर्माण कर सकते हैं या आवासीय एवं व्यावसायिक (ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें और ऊपर अपार्टमेंट) दोनों तरह के निर्माण कर सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आपकी जमीन किस जोन में आती है।' आवासीय भूमि आर 1. आर 2य जैसे जोन में वर्गीकृत होती है। अगर यह वन भूमि के रूप में वर्गीकृत है तो आप इसके किसी भी दूसरे उपयोग के लिए बदलाव नहीं करा सकते। आपको यह भी पता करना होगा कि उस क्षेत्र में कितना फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) स्वीकृत है। एफएसआई से यह तय होता है कि आप किसी भूखंड पर कितना निर्माण कर सकते हैं।
 
स्वामित्व की पड़ताल 
 
किसी जमीन में पैसा लगाने से पहले पिछले कम से कम 30 से 50 साल के मालिकाना हक के कागजात की जांच-पड़ताल करें। विक्रेता से अद्यतन मालिकाना हक के कागजात देने को कहें। इन कागजात की किसी वकील से जांच कराएं और यह सुनिश्चित करें कि मालिकाना हक की कड़ी में कोई चीज छूटी तो नहीं है। आहूजा कहते हैं, 'भूमि के रिकॉर्ड नहीं होने पर उसके मालिकाना हक की जांच-पड़ताल करना मुश्किल हो जाता है। खरीदार को अतिक्रमण, पुराने कानूनी मामलों या पिछले मालिक के बारे में पता नहीं चलेगा। इन जोखिमों के बारे में हो सकता है तब पता चले जब आप भुगतान कर देते हैं और कोई दूसरा जमीन के मालिकाना का दावा करते हुए कानूनी नोटिस भेजता है।' आहूजा सलाह देते हुए कहते हैं कि आप ऐसी भूमि की खरीद के अपनी इच्छा के के बारे में दो समाचार पत्रों-एक अंग्रेजी राष्ट्रीय दैनिक और एक स्थानीय भाषा के दैनिक में अपना विज्ञापन दीजिए, जिससे आपका पक्ष मजबूत होगा। इसके अलावा उस क्षेत्र के मास्टर प्लान की भी जांच करें।  इससे आपको यह पता चलेगा कि क्या इसके आसपास से कोई राजमार्ग या मेट्रो परियोजना विकसित की जा रही है जिससे कीमतों में इजाफा हो सकता है। इसकी जांच से यह भी पता चल सकता है कि कहीं उस क्षेत्र में शहर का सबसे बड़ा कूड़ाघर तो नहीं बनना है, जिसकी वजह से ही हो सकता है कि विक्रेता आपको कम कीमत में जमीन बेच रहा हो। 
 
प्लॉट के रूप में जमीन 
 
एक सुरक्षित विकल्प डेवलपर से प्लॉट या भूखंड के रुप में काटी गई जमीन खरीदना है। इसमें डेवलपर पहले ही मालिकाना हक को लेकर जांच-पड़ताल कर चुका होता है। वह आपके दरवाजे तक पानी, सड़क, बिजली, सीवरेज लाइन जैसा बुनियादी ढांचा मुहैया कराता है। आहूजा कहते हैं, 'जब आप प्लॉट वाली जमीन खरीदते हैं तो आपको अपने नाम के मालिकाना हक के दस्तावेज तुरंत मिल जाते हैं। आपको इस तरह की परियोजना में अतिक्रमण को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं होती।'
 
ऋण लेना नहीं आसान 
 
अगर कोई व्यक्ति कर्ज लेता है तो यह दोनों चीजों यानी जमीन खरीदने और घर बनाने के लिए होता है। नायर कहते हैं, 'जिस वित्त वर्ष में यह ऋण लिया जाता है, उसके बाद के तीन वर्षों के दौरान घर का निर्माण पूरा होने पर ऐसे ऋण पर आयकर छूट का लाभ लिया जा सकता है। केवल जमीन खरीदने के लिए ऋण मिलना मुश्किल है और इसमें आयकर का लाभ भी नहीं मिलता है। आमतौर पर बैंक जमीन के लिए ऋण पर होम लोन की तुलना में 0.5 से 2 फीसदी ज्यादा ब्याज वसूल करते हैं।'
 
लंबे समय तक जरूरत  
 
जमीन में निवेश कई गुना प्रतिफल दे सकता है, बशर्ते कि आप अपना पैसा 5 से 10 साल तक निवेश करने के लिए तैयार हों। जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें इसका आकार, सपाट या ढालू होने, बुनियादी ढांचा या परिवहन आदि की पहुंच आदि शामिल है। अगर यह जमीन कृषि के लिए है तो प्रतिफल इस बात पर निर्भर करेगा कि मिट्टी कितनी उपजाऊ है और पानी की उपलब्धता क्या है। गोयल कहते हैं, 'ज्यादातर लोग जमीन इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उस क्षेत्र में राजमार्ग या हवाई अड्डे जैसा कोई विकास आ रहा होता है और उन्हें उम्मीद होती है कि कीमतों में बढ़ोतरी होगी। हमारे देश में परियोजनाओं की रफ्तार को देखते हुए इसमें कई वर्षों का समय लग सकता है।' आपके पास इस जमीन को रोककर रखने की क्षमता होनी चाहिए और इस दौरान आप इस जमीन को अतिक्रमण से बचाने या इस पर कब्जा करने की कोशिश करने वालों से बचाने में सक्षम होने चाहिए। 
कीवर्ड real estate, property, रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) अधिनियम,

  
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