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खपत में आई बड़ी कमजोरी

कृष्ण कांत |  Aug 20, 2017 09:29 PM IST

भारतीय उद्योग जगत की विकास महत्वाकांक्षाओं को अप्रैल-जून 2017 की तिमाही में नया झटका लगा है। मार्च 2017 की तिमाही के दौरान खपत वृद्घि में मामूली सुधार के बाद फिर से खपत पर दबाव दिखा है। आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर और एशियन पेंट्ïस जैसी कंज्यूमर गुड्ïस निर्माताओं के लिए राजस्व वृद्घि पिछली पांच तिमाहियों में सबसे कम (नोटबंदी के बाद दिसंबर 2016 की तिमाही पर दबाव को छोड़कर) रही है जबकि शुद्घ मुनाफा वृद्घि पिछले तीन वर्षों में सबसे निचले स्तर पर रही है। वाहन निर्माताओं ने भी खराब प्रदर्शन किया और राजस्व और मुनाफे में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की क्योंकि उपभोक्ताओं ने तिमाही के दौरान जीएसटी की वजह से खरीदारी को टाल दिया था।
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों और दवा निर्माताओं जैसे निर्यातकों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा और उन्होंने कम से कम पिछले तीन वर्षों में अपनी सबसे कमजोर राजस्व और मुनाफा वृद्घि दर्ज की। समीक्षाधीन तिमाही के दौरान दवा कंपनियों का राजस्व भी कमजोर रहा और उनका शुद्घ लाभ घटकर आधा रह गया। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और विप्रो जैसी आईटी कंपनियां राजस्व में एक अंक की वृद्घि दर्ज करने में कामयाब रहीं, लेकिन उन्हें समायोजित शुद्घ लाभ में कुछ कमी का सामना करना पड़ा।
वित्तीय क्षेत्र में निजी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है, हालांकि इनके प्रदर्शन की रफ्तार कुछ हद तक धीमी ही बनी रही। इसके विपरीत ज्यादातर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने तिमाही के दौरान अपने गैर-निष्पादित ऋणों में तेजी दर्ज की जिससे उनके मुनाफे पर ताजा दबाव को बढ़ावा मिला। इससे आगामी तिमाहियों में कॉरपोरेट जगत के बढ़ते पूंजीगत खर्च के वित्त पोषण की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और निर्माण-आधारित क्षेत्र तिमाही के दौरान सुर्खियों में रहे और इनके राजस्व और मुनाफे में सुधार दर्ज किया गया। सीमेंट कंपनियों, निर्माण और इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए राजस्व वृद्घि में लगातार तीसरी तिमाही में सुधार दर्ज किया गया और इनमें मुनाफा वृद्घि दो अंक के साथ मजबूत रही।

(साथ में राम प्रसाद साहू, हंसिनी कार्तिक
और उज्ज्वल जौहरी)

कीवर्ड FmcG, Consumer goods, consumption,

  
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