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इन्फोसिस: पुनर्खरीद से नहीं ज्यादा आस

राम प्रसाद साहू |  Aug 20, 2017 09:32 PM IST

इन्फोसिस की 1150 रुपये प्रति शेयर कीमत पर 13,000 करोड़ रुपये की पुनर्खरीद पेशकश शुक्रवार के 923 रुपये के बंद भाव के मुकाबले 24.6 फीसदी के प्रीमियम पर की जा रही है। सामान्य रूप से इस तरह की पुनर्खरीद पेशकश का निवेशकों द्वारा स्वागत किया जाएगा, क्योंकि कंपनी शेयरधारकों को नकदी लौटाने और कंपनियों के अधिग्रहण के अतीत पर कायम है। इसके अलावा, उम्मीद की जा रही है कि 6 अरब डॉलर (38,000 करोड़ रुपये) के कुशल इस्तेमाल के बाद कंपनी का प्रतिफल अनुपात मजबूत होगा।
हालांकि जहां तक निवेशक धारणा का सवाल है तो कई सकारात्मक बदलावों के बावजूद यह पुनर्खरीद बहुत ज्यादा लाभदायक पहल साबित नहीं हो सकती है। एक खास बात यह है कि मौजूदा पेशकश बाजार उम्मीदों के अनुरूप है। विश्लेषकों का कहना है कि संस्थापक प्रवर्तकों और कंपनी बोर्ड के बीच टकराव से शेयर पर दबाव पड़ेगा। इसी टकराव की वजह से कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी को शुक्रवार को इस्तीफा देने के लिए बाध्य होना पड़ा था। इस तरह की अनिश्चितताओं का कंपनी के प्रदर्शन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
एलारा सिक्योरिटीज के रवि मेनन ने 19 अगस्त की अपनी रिपोर्ट में कहा, 'निदेशक मंडल द्वारा विशाल सिक्का का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद हमारा मानना है कि इन्फोसिस अपने निवेशकों के साथ साथ ग्राहकों का भी भरोसा खो देगी। सिक्का के नेतृत्व में इन्फोसिस-केंद्रित बौद्घिक संपदा और लगातार नवीनता के जरिये कुछ अलग करने की रणनीति से कंपनी को अपनी ऑर्गेनिक राजस्व बाजार भागीदारी वित्त वर्ष 2016 के दौरान बढ़ाकर 18.3 फीसदी करने में मदद मिली थी जो वित्त वर्ष 2015 में 9.9 फीसदी पर थी।'
उन्होंने लिखा है, 'कंपनी की पुनर्खरीद योजना से अल्पावधि समर्थन के बावजूद, हमें इसे लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत होने नहीं देख रहे हैं।' मेनन ने हालांकि वित्त वर्ष 2018 और वित्त वर्ष 2019 के लिए अपना आय अनुमान 1-8 फीसदी तक घटा दिया है और शेयर पर अपनी रेटिंग खरीदारी से घटाकर कीमत लक्ष्य भी पूर्व के 1250 रुपय से घटा (960 रुपये) दिया है।
अन्य विश्लेषकों ने भी इस तरह की चिंताएं जाहिर की हैं जो आगे चलकर सामने आ सकती हैं। एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा, 'इन्फोसिस के लिए मुख्य चिंता अनिश्चितता को लेकर है जिससे शेयर की कीमत पर दबाव बना रहेगा।' रिटेल और बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में धीमी वृद्घि की वजह से व्यावसायिक चुनौतियों, प्रबंधन के लिए समस्याओं से शेयर पर दबाव बना रहेगा।
एक अन्य विश्लेषक ने नाम नहीं छापने के अनुरोध के साथ कहा, 'प्रबंधन के आश्वासन के बावजूद, कंपनी के शेयर में शुक्रवार को भारी गिरावट में योगदान देने वाले विदेशी निवेशक विकल्पों (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) पर विचार कर सकते हैं क्योंकि नए सीईओ की तलाश में लंबा समय लग सकता है और नए बदलाव का परिणाम सामने आने में समय लगेगा।' ये सभी अनिश्चितताएं इन्फोसिस के शेयर के मूल्यांकन को प्रभावित कर रही हैं। जहां ज्यादातर विश्लेषकों ने इस कंपनी के लिए अपने आय अनुमान में कटौती नहीं की है वहीं कुछ ने शुक्रवार को इस शेयर के लिए अपनी रेटिंग में कमी कर दी। रेटिंग में ये कटौतियां मजबूत प्रबंधन टीम के अभाव और संस्थापक-प्रवर्तकों और कंपनी बोर्ड के बीच मौजूदा संघर्ष को देखते हुए विश्लेषकों द्वारा पीई मल्टीपल में कमी किए जाने के बाद की गईं।
हालांकि अल्पावधि चिंताओं के बावजूद विश्लेषकों को शेयर कीमत 840 रुपये के स्तर से नीचे जाने की आशंका नहीं दिख रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लीमन संकट के बाद भी इस शेयर ने एक वर्षीय पीई अनुपात के 12 गुना से नीचे कारोबार नहीं किया था। वित्त वर्ष 2019 की लगभग 70 रुपये की ईपीएस और 12-13 गुना के एक वर्षीय पीई अनुमानों को देखते हुए विश्लेषकों को उम्मीद है कि शेयर को 840-910 के दायरे में सपोर्ट मिलेगा।  मौजूदा बाजार भाव और पुनर्खरीद कीमत के बीच बड़े अंतर को देखते हुए ऑफर को निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिलने और स्वीकृति अनुपात में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि कुल स्वीकृति अनुपात लगभग 5 फीसदी पर अनुमानित है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि छोटे शेयरधारकों की संख्या अन्य पुनर्खरीद पेशकशों से जुड़े मामलों की तुलना में अधिक रहने की उम्मीद है।

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