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ऊंची लागत से एशियन पेंट्स की फीकी पड़ रही रंगत

राम प्रसाद साहू |  Aug 20, 2017 09:35 PM IST

ऐसा लगता है कि एशियन पेंट्स जून तिमाही के कमजोर परिणामों के झटके से उबर चुका है। शेयर मंथर गति से बढ़ रहा है और अभी यह 1140 रुपये के आसपास है। हालांकि जून तिमाही के नतीजे से बाजार निराश हुआ। बिक्री में गिरावट और कच्चे माल की ऊंची लागत का कंपनी के बही-खाते पर दबाव दिखा। पर कुछ विश्लेषकों को लंबी अवधि में इसमें दम नजर आ रहा है तो कुछ इसे बेचने की सलाह दे रहे हैं।
आपको बतादें कि जून तिमाही में एशियन पेंट्स की बिक्री सालाना आधार पर सिर्फ दो फीसदी तक बढ़ी। विश्लेषकों ने भी ऐसा ही अनुमान लगाया था। विश्लेषकों को आशंका थी कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पहले डीलर अपना पुराना स्टॉक घटाएंगे जिससे कंपनी की बिक्री पर दबाव पड़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी की बिक्री वृद्घि नोटबंदी वाली दिसंबर 2016 की तिमाही के मुकाबले कम है। इस कारण से और कीमतों में 3 फीसदी के इजाफे से कंपनी को अपना संचयी राजस्व 4.9 फीसदी बढ़ाने में मदद मिली जो 4,228 करोड़ रुपये हो गया।
कम राजस्व वृद्घि के साथ साथ कच्चे माल की ऊंची लागत से सकल मार्जिन पर चोट पड़ी। भारतीय लेखा मानकों की वजह से जून तिमाही में इसमें 300 आधार अंक (3 फीसदी) से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। उत्पादन लागत, खासकर टाइटेनियम डाईऑक्साइड की दो तिमाहियों से बढ़ रही है और यह एक साल पहले के मुकाबले 15 फीसदी बढ़ी है। बिक्री के प्रतिशत के रूप में बात करें तो यह 446 आधार अंक अधिक है। जेएम फाइनैशियल की एक रिपोर्ट में कहा गया कि सकल मार्जिन 6 तिमाहियों में सबसे कम रहा है, वहीं एबिटा मार्जिन 11 तिमाहियों में सबसे कम है।
सकल मार्जिन में गिरावट और कमजोर बिक्री प्रदर्शन का असर एबिटा पर स्पष्टï दिखा है। कंपनी का एबिटा 18.5 फीसदी घटकर 665 करोड़ रुपये रह गया है। परिचालन मुनाफा मार्जिन सालाना आधार पर 4.51 प्रतिशत घटकर 15.7 फीसदी रह गया है।
ऊंची लागत और धीमी राजस्व वृद्घि को देखते हुए सकल और परिचालन मुनाफा मार्जिन के बीच 100 आधार अंक का अंतर रहा। ऐम्बिट कैपिटल के विश्लेषकों की राय थी कि अगर वित्त वर्ष 2019 में 50 प्रतिशत नई क्षमता चालू होती है तो यह अंतर और बढ़ जाएगा। एशियन पेंट्ïस जून तिमाही की भांति बाजार भागीदारी भी गंवा सकती है, क्योंकि जून तिमाही में कनसाई नेरोलक ने 14 फीसदी की बिक्री वृद्घि दर्ज की है। सकल मार्जिन में वृद्घि के लिए कीमतें ऊंची रखने के कंपनी के प्रयासों के कारण प्रतिस्पर्धी कंपनियों को मार्जिन सुधारने और इसे पुन: निवेश करने में मदद मिली है।
वित्तीय प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2018 के अनुमानों में कंपनी के राजस्व और मुनाफा वृद्घि में 3 से 4 फीसदी तक की कटौती की है। इस कटौती के बावजूद आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2017 से 19 के दौरान 12 फीसदी की बिक्री वृद्घि और कीमतों में तीन फीसदी के इजाफे की मदद से सालाना राजस्व वृद्घि 15 फीसदी रहेगी। वे उम्मीद कर रहे हैं कि बिक्री वृद्घि को छोटे और मझोले शहरों की मजबूत मांग के साथ साथ नई क्षमता से भी मदद मिलेगी। बेहतर मॉनसून, खर्च योग्य अधिक आय और जीएसटी के बाद संगठित क्षेत्र की और कारोबार जाना ऐसे अन्य कारक हैं जिनसे कंपनी और उद्योग को लाभ होगा।
कमजोर वित्तीय परिणाम के बाद भी शेयर में बड़ी गिरावट नहीं आने की एक वजह यह हो सकती है कि कंपनी का दीर्घावधि परिदृश्य मजबूत बना हुआ है और निवेशक उपभोक्ता सामान क्षेत्र को पसंद कर रहे हैं। लेकिन कई समस्याओं के बावजूद यह शेयर वित्त वर्ष 2019 के अपने आय अनुमान के लगभग 45 गुना पर कारोबार कर रहा है, जो सस्ता नहीं है। इतने ऊंचे मूल्यांकन को बरकरार रखने के लिए मार्जिन में स्थिरता, बिक्री वृद्घि और बाजार भागीदार में में बढ़ोतरी जरूरी है। हालांकि दीर्घावधि निवेशक बड़ी गिरावट पर इस शेयर में खरीदारी कर सकते हैं, क्योंकि इसका पिछला रिकॉर्ड मजबूत रहा है।

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