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पर्सनल लोन हुआ पहले से आसान

तिनेश भसीन |  Aug 20, 2017 09:39 PM IST

ग्राहकोंको एटीएम या ऑनलाइन के जरिए तुरंत ऋण की पेशकश करने वालों में केवल निजी क्षेत्र के बड़े बैंक ही शामिल नहीं हैं। अब इस दौड़ में वित्तीय तकनीकी स्टार्टअप कंपनियां भी शामिल हो गई हैं जो ग्राहकों को पर्सनल लोन देने के तौर तरीकों में बदलाव कर रही हैं। हाल में देश में निजी क्षेत्र के दिग्गज  आईसीआईसीआई बैंक ने पहले से चयनित अपने कुछ वेतनभोगी ग्राहकों को अपने एटीएम के जरिये पर्सनल लोन देने की पेशकश की है। बैंक  केवल उन लोगों को ही ऋण दे रहा है, जो उसकी पहले से मंजूर ग्राहक सूची में हैं। यह सूची क्रेडिट स्कोर के आधार पर बनाई गई है। लिहाजा ये लोग ही कर्ज पाने के पात्र होंगे। एचडीएफसी बैंक भी अपने ग्राहकों को नेट बैंकिंग के जरिये तत्काल ऋण की पेशकश कर रहा है। लेकिन अगर आपका कोई क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं है या बैंक के साथ आपके दीर्घकालीन संबंध नहीं हैं तो आप निराश न हों। आप अर्लीसैलरी डॉट कॉम, लोनटैप जैसे स्टार्टअप से संपर्क कर सकते हैं।
चूंंकि ये स्टार्टअप उन ग्राहकों को लक्ष्य करते हैं, जिनकी  साख से जुड़ा कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं होता है। लिहाजा, ग्राहक के प्रोफाइल के आकलन के लिए वे विभिन्न पैमानों का इस्तेमाल करते हैं। ग्राहकों के बैंक खाते देखने केे बाद वे उनकी खर्च करने की आदत का अंदाज लगाते हैं। वे आवेदक के सोशल मीडिया अकाउंट को देखते हैं और मित्र सूची, लोकेशन आदि के जरिए अकाउंट की जानकारी जुटाकर ग्राहक का प्रोफाइल बनाते हैं। अर्लीसैलरी डॉट कॉम एक दिन से लेकर एक महीने तक के अल्पावधि ऋण की पेशकश करती है। कंपनी के ऐप्लीकेशन पर ग्राहक ऋण के लिए कुछ मिनटों में आवेदन कर सकते हैं और केवाईसी, कागजात पर हस्ताक्षर और ऋण वितरण की प्रक्रियाएं कुछ ही घंटों में हो जाती हैं। एक बार वित्तीय संबंध बनने पर अगली बार से ऋण वितरण तत्काल हो जाता है। अर्लीसैलरी डॉट कॉम के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी अक्षय मेहरोत्रा कहते हैं, 'करीब 35 फीसदी ग्राहक ऐसे हैं जो पहली बार ऋण ले रहे होते हैं।'
लोनटैप एक दिन से लेकर पांच साल के लिए 5 लाख रुपये तक का ऋण देती है। हालांकि  उनकी ऋण प्रणाली क्रेडिट कार्ड की तरह काम करती है। कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी सत्यम कुमार कहते हैं, 'ग्राहक न्यूनतम रकम का पुनर्भुगतान कर सकते हैं और ब्याज चुकाते हुए शेष राशि को आगे बढ़ा सकते हैं।'
क्यूबेरा डॉट कॉम जैसी मध्यस्थ कंपनी ने आरबीएल बैंक से समझौता किया है जबकि पेसेंसे जैेसी स्टार्ट अप कंपनी इंडिया इन्फोलाइन के साथ काम कर रही है। ये वित्तीय तकनीकी स्टार्टअप कंपनियां साझेदार ऋणदाताओं के लिए कर्ज की अंडरराइटङ्क्षग करती हैं। ऋण फंसने या नहीं लौटाने की स्थिति में वे भी जोखिम उठाती हैं। क्यूबेरा डॉट कॉम के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी आदित्य कुमार कहते हैं, 'सिद्धांत रूप से कर्जदाता भी हमारी तरह अंडरराइटङ्क्षग कर सकते हैं, लेकिन हकीकत में वे इतने तेज नहीं हैं। तकनीक अपनाने में भी वे धीमे हैं। साथ ही कर्जदाताओं की परिचालन लागत, खासतौर पर छोटे कर्ज के मामले में बहुत अधिक आती है।' क्यूबेरा और पेसेंस के ग्राहकों में बड़े बैंकों के ग्राहक भी हो सकते हैं तो बिना क्रेडिट रिकॉर्ड वाले ग्राहक भी। पेसेंस की सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी सयाली कारंजकर कहती हैं,'जब हम पहले ऋण के साथ ग्राहक के साथ वित्तीय संबंध बना लेते हैं तो इसके बाद के ऋण आसानी से और तत्काल वितरित कर दिए जाते हैं।'
जैसे-जैसे व्यक्तिगत ऋण लेना आसान होता जा रहा है, वैसे ही उनको सलाह भी आ रही है। वित्तीय योजनाकारों का कहना है कि लोगों को आसान धन के इस जाल में नहीं फंसना चाहिए। अगर भुगतान में कोई चूक हुई तो ये कंपनियां क्रेडिट ब्यूरो को सूचना देती हैं। बाद में अगर आप होम लोन जैसे बड़े ऋण लेना चाहेंगे तो समस्या होगी। इस तरह की ऋण सुविधा अब सरल तो हो गई है मगर ग्राहकों को आपात स्थिति में ही इनका इस्तेमाल करना चाहिए न कि रोजमर्रा के खर्च के लिए इस तरह के कर्ज लेने चाहिए। मान्यताप्राप्त वित्तीय योजनाकार मल्हार मजूमदार कहते हैं, 'ज्यादातर वित्तीय संकट तब भयावह हो जाते हैं जब कोई व्यक्ति अपने खर्चों पर नियंत्रण नहीं रख पाता। अगर आपने एक बार ऐसी सुविधा का इस्तेमाल कर लिया तो फिर कर्ज की आदत से पीछा छुड़ा पाना मुश्किल होता है।' अगर आपका किसी बैंक के साथ सैलरी अकाउंट है तो ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ लेने के विकल्प तलाशिए। ओवरड्राफ्ट सुविधा 14 से 19 प्रतिशत की ब्याज दर पर मिल जाती है।

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