होम » Investments
«वापस

डिजिलॉकर में रखिए अपने महत्त्वपूर्ण दस्तावेज

प्रिया नायर |  Aug 25, 2017 09:23 PM IST

आज अगर आप बैंक से कर्ज या कॉलेज में प्रवेश के लिए आवेदन करें तो आपको अपने आयकर सर्टिफिकेट, अंकतालिका, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, पासपोर्ट आदि दस्तावेज की बहुत सी प्रतियां जमा करानी होती हैं।
कई बार मूल दस्तावेज कट-फट भी जाते हैं। अगर ये दस्तावेज अनजान व्यक्ति के हाथ से गुजरते हैं तो इनसे छेड़छाड़ की भी आशंका रहती है। डिजिलॉकर इन समस्याओं का समाधान है।
डिजिटल रूप में दस्तावेज सहेजने और इन्हें जारी करने की सुविधा केंद्र सरकार मुहैया करा रही है। इस सुविधा का इस्तेमाल कर लोग विभिन्न सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी दस्तावेज का जब-तब जरूरत पडऩे पर उपयोग कर सकते हैं, उनको अपलोड कर सकते हैं, ई-साइनिंग के जरिये खुद से सत्यापित कर सकते हैं और साझा भी कर सकते हैं। इस समय डिजिलॉकर से दस्तावेज जारी करने वाले (इश्यूअर) 31 संगठन और 9 निवेदक (रिक्वेस्टर) संगठन जुड़े हुए हैं।  डिजिलॉकर पर 76 लाख लोग पंजीकृत हो चुके हैं और 94 लाख दस्तावेज अपलोड हो चुके हैं। हालांकि यह सेवा एक साल से अधिक समय से वजूद में है, लेकिन इसके बारे में जागरूकता की कमी है।

कैसे करता है काम 
डिजिलॉकर का मकसद कागज रहित प्रशासन की अवधारणा है। इसमें दस्तावेज सीधे डिजिलॉकर में जारी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को निर्देश दिया गया है कि वह अंकतालिका सीधे छात्रों के डिजिलॉकर में भेजे। यह अंक तालिका उस छात्र के विशेष फोल्डर में दिखाई देगी। जब छात्र कॉलेज के लिए आवदेन करना चाहेगा तो उसे कॉलेज के साथ अपना डिजिलॉकर लिंक सााझा करना होगा।
कॉलेज प्रशासन छात्र की सहमति से उस फोल्डर में अंक तालिका देख पाएगा। चूंकि यह सीबीएसई से जारी होगी, इसलिए कॉलेज को पता होगा कि यह प्रामाणिक है और इसलिए वह प्रवेश को मंजूरी दे देगा। इसी तरह पासपोर्ट अधिकारी पासपोर्ट की सॉफ्ट कॉपी और राशन अधिकारी राशन कार्ड आदि की सॉफ्ट कॉपी सीधे डिजिलॉकर में भेज सकेंगे।
आप अपनी मार्कशीट को स्कैन कर सकते हैं और खुद ही अपलोड भी कर सकते हैं। अधिकतम 10 एमबी की फाइल अपलोड की जा सकती है। जिस प्रकार की फाइलें अपलोड की जा सकती हैं, उनमें पीडीएफ, जेपीईजी और पीएमजी शामिल हैं। जब आप अपनी अंक तालिका कॉलेज में जमा कराना चाहें तो आप ई-हस्ताक्षर के जरिए इसे सत्यापित भी कर सकते हैं। ऐसा आधार नंबर के जरिये करना होगा। डिजिलॉकर का इस्तेमाल करके व्यक्ति कहीं भी और किसी भी समय अपने दस्तावेज तक पहुंच सकता है और इन्हें ऑनलाइन साझा कर सकता है।
ईवाई इंडिया में पार्टनर (धोखाधड़ी जांच और विवाद सेवाएं) अमित जाजू कहते हैं, 'डिजिलॉकर का मकसद दस्तावेज भेजने और मंजूरी की रफ्तार तेज करना है। इससे दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ की आशंका भी कम हुई है।' संबंधित व्यक्ति को किसी दूसरे को अपने दस्तावेज तक पहुंचने और देखने की मंजूरी देनी होती है। आपकी मंजूरी के आधार पर बहुत से संस्थान आपके दस्तावेज को केवल पढ़ ही पाएंगे। आपके पास एक ईमेल आएगा। इसमें लिखा होगा कि इन लोगों ने आपके दस्तावेज देखने का आग्रह किया है, कृपया स्वीकृति दें। आपकी मंजूरी के बाद ही वे दस्तावेज तक पहुंच सकेंगे। ये दस्तावेज केवल पढऩे के लिए होते हैं, इसलिए इसमें कोई दिक्कत नहीं होती। लॉकर में कोई भी दस्तावेज चूंकि सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी किया जाता है, इसलिए इन्हें देखने वाले लोग यकीन कर सकते हैं कि ये वैध दस्तावेज हैं।
जाजू ने कहा, 'भौतिक सत्यापन में अब भी धोखाधड़ी या छेड़छाड़ की गुंजाइश होती है, लेकिन डिजिलॉकर में प्रमाणपत्र सीधे मूल प्राधिकार या निर्गमकर्ता द्वारा जारी किए हुए होते हैं।' डिजिलॉकर लेने के लिए आपके पास आधार नंबर होना जरूरी है। आपको अपने मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके पंजीकरण करना होता है। पंजीकरण के बाद आपको अपना आधार नंबर इससे लिंक करना होता है। अगर आपका बैंक मंजूरी देता है तो आप अपने नेटबैंकिंग अकाउंट का इस्तेमाल करके भी डिजिलॉकर का उपयोग कर सकते हैं, बशर्ते कि आपने अपना बैंक खाता आधार नंबर से जोड़ लिया हो।
कोटक महिंद्रा बैंक के चीफ डिजिटल ऑफिसर दीपक शर्मा कहते हैं कि आने वाले समय में सभी खाते आधार से जुडऩे के बाद बैंक सीधे डिजिटल लॉकर में स्टेटमेंट भेजेंगे। वह कहते हैं, 'इस समय हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक डिजिलॉकर अपनाएं। अगले चरण में हम ग्राहकों को अन्य ब्योरे या दस्तावेज डिजिलॉकर में मुहैया कराने की मंजूरी लेंगे, जिनका इस्तेमाल ग्राहक अपने नियोक्ता, अस्पताल, बैंक आदि को मुहैया कराने में कर सकेंगे।'
यह सेवा दस्तावेज की पहचान तक ही सीमित नहीं है। लोग किसी भी तरह के दस्तावेज इसमें अपलोड कर सकते हैं, इन पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और साझा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए सैलरी स्लिप और किराया पर्ची। अगर कोई बैंक या कंपनी जैसी कोई गैर-सरकारी संस्था इश्यूअर या रिक्वेस्टर बनना चाहती है तो उनको डिजिलॉकर की मंजूरी लेनी होगी। मंजूरी मिलने के बाद वे सीधे डिजिलॉकर में दस्तावेज भेज सकते हैं। इसलिए डिजिलॉकर में बैंक सीधे स्टेटमेंट और कंपनी सैलरी स्लिप भेज सकेंगी।

सुरक्षा और कानूनी वैधता
एक साइबर सुरक्षा स्टार्टअप इनेफू लैब्स के सह-संस्थापक अभिषेक शर्मा ने कहा कि इसमें आधार जितनी ही सुरक्षा और जोखिम है। वह कहते हैं, 'पासवर्ड आधारित किसी भी प्रमाणन में एक बड़ा मसला फिशिंग हमले का जोखिम होता है। इस लिहाज से आधार फिशिंग प्रूफ है क्योंकि इसमें एक निश्चित नहीं बल्कि बदलने वाला पासवर्ड  होता है। इसमें ओटीपी होता है, जो हर इस्तेमाल के बाद बदल जाता है।
जब आप डिजिलॉकर का इस्तेमाल करते हैं तो जारी करने वाली अथॉरिटी के प्रमाणपत्र की वैधता की जांच करें।' शर्मा ने कहा कि यह सुनिश्चित करें कि आप सही अथॉरिटी या व्यक्ति को दस्तावेज तक पहुंचने की मंजूरी देते हैं। सुरक्षा से जुड़े बुनियादी पहलुओं का जरूर ध्यान रखें।

कीवर्ड digilocker, documents, डिजिलॉकर,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक