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न हों परेशान, भारत बिल से करें भुगतान

तिनेश भसीन |  Aug 25, 2017 09:24 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल में भारतीय राष्टï्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) को भारत बिल भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्य से करने की अनुमति दे दी है। यानी अब आप जल्द ही इसके जरिए न केवल उपभोक्ता सेवाओं के सभी तरह के बिलों का भुगतान कर सकेंगे बल्कि निवेश योजनाओं में पैसे भी लगा सकेंगे।
यहां तक कि अपने शहर के नगर निगम को संपत्ति कर जैसे भुगतान भी कर सकेंगे। इसके लिए आपको किसी नगर निगम की वेबसाइट पर लॉग इन करने की जरूरत नहीं होगी। लागत के लिहाज से भी यह काफी किफायती विकल्प होगा।
भारत बिल भुगतान में एक सहभागी ऑक्सीजन सर्विसेज इंडिया के संयुक्त प्रबंध निदेशक सुनील कुलकर्णी कहते हैं, 'ऐसे लेन-देन पर आने वाली लागत का खर्च संभवत: बिल देने वाली कंपनियां उठाएंगी। लेकिन अगर कोई ग्राहक किसी एजेंट के माध्यम से नकद या चेक के जरिए बिल का भुगतान करता है तो उसे मामूली शुल्क देना होगा। यह शुल्क बिल राशि पर निर्भर करेगा।'
विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती दिनों में इस सेवा का इस्तेमाल करने पर ग्राहकों को 2 से 5 प्रतिशत की छूट दी जा सकती है। चूंकि,बिल देने वाली कंपनियों की भुगतान परिचालन की लागत कम हो जाएगी, लिहाजा वे इसका फायदा ग्राहकों को दे सकती हैं। ये बिलर एक-दूसरे से अपनी अलहदा पेशकश के लिए नए तरीके ईजाद कर रहे हैं, इसलिए ग्राहक उनसे अतिरिक्त सेवाओं की उम्मीद कर सकते हैं। इन सेवाओं में बिल बनने पर अलर्ट भेजना, भुगतान तिथि नजदीक आने पर ग्राहकों को याद दिलाना, बिल भुगतान का कार्यक्रम तय करना आदि शामिल हो सकते हैं।

ऐसे काम करती है 
सबसे पहले भारत बिल विभिन्न उपभोक्ता सेवा प्रदाताओं से बिल संग्रहित करता है और ग्राहकों को सहभागी बैंकों, मोबाइल वॉलेट या अन्य माध्यमों से भुगतान करने की सुविधा देता है। मोबिक्विक के उपाध्यक्ष (विकास) दमन सोनी कहते हैं, 'यह प्लेटफॉर्म ग्राहकों को एक ही जगह से विविध बिलों के भुगतान की सुविधा देता है। यानी इसके लिए विभिन्न वेबइसाट को क्लिक करने या अलग-अलग चैक काटने की जरूरत नहीं होगी।'
आप अपने बैंक के नेट बैंकिंग पेज पर लॉग इन करके  या मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करके भुगतान कर सकते हैं। एजेंट के जरिये भी नकद या चेक से भुगतान की सुविधा दी गई है। फिलहाल भारत बिल के जरिए बिजली, टेलीफोन, जल आपूर्ति, गैस और डीटीएच के बिलों का भुगतान किया जा सकता है। हालांकि बाद में इस प्लेटफॉर्म का धीरे-धीरे विस्तार किया जाएगा और स्कूल एवं विश्वविद्यालय की फीस, सरकारी कर, बीमा प्रीमियम, म्युचुअल फंड निवेश और क्रेडिट कार्ड बिल आदि के भुगतान की सुविधा दी जाएगी।
अगर किसी कारण से भुगतान नहीं हो पाता है तो भारत बिल शिकायत निवारण की व्यवस्था भी होगी। कुलकर्णी कहते हैं, 'चूंकि, यह व्यवस्था अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए उपभोक्ताओं को उसी मध्यस्थ के पास शिकायत दर्ज करानी चाहिए जिसका इस्तेमाल उन्होंने भुगतान के लिए किया है। बाद में उसी एजेंट या मध्यस्थ के पास जाने की जरूरत नहीं रह जाएगी।'
रिजर्व बैंक के अनुसार देश के 20 बड़े शहरों में हर साल 6.22 लाख करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान होता है। इनमें 70 प्रतिशत से अधिक लेन-देन अब भी नकदी या चेक के जरिये होते हैं। एनपीसीआई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी ए पी होता कहते हैं, 'भारत बिल के जरिये करीब 45 करोड़ बिलों का भुगतान हो सकेगा। इनमें बिजली, दूरसंचार, डीटीएच, जल एवं गैस आदि बिल शामिल हैं।' इस समय पांच यूटिलिटी क्षेत्रों के 52 बड़े बिलर भारत बिल से जुड़ गए हैं। भारत बिल से जुड़ी भुगतान परिचालन इकाइयों या मध्यस्थों की संख्या करीब 24 है।
मान्यताप्राप्त इन इकाइयों में बैंक ऑफ बड़ोदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, 10 निजी बैंक, 5 सहकारी बैंक और 6 नॉन-बैंक बिलर एग्रीगेटर शामिल हैं। पैसाबाजार डॉट कॉम के सीईओ और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा कहते हैं, 'भविष्य में क्रेडिट ब्यूरो भी भारत बिल भुगतान प्रणाली के आंकड़ों का इस्तेमाल ग्राहकों की साख के आकलन में कर सकेंगे।'

कीवर्ड RBI, NPCI, Bharat bill,

  
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