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आवास बीमा में रख लें बैंक लॉकर

तिनेश भसीन |  Aug 27, 2017 08:34 PM IST

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कुछ दिन पहले राज्य सभा को बताया था कि बैंक लॉकर में रखे किसी कीमती सामान के चोरी हो जाने या किसी प्राकृतिक आपदा में इसके नष्टï होने की स्थिति में इस नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी बैंकों की नहीं होगी। वित्त राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने भी संसद में कहा कि पिछले तीन सालों (2014-15 से 2016-17) के दौरान 51 बैंकों में लूट, डकैती, चोरी और सेंधमारी के  2,632 मामले सामने आए जिनमें 180 करोड़ रुपये के सामान का हर्जाना हुआ। 

 
 बैंक बाजार में प्रमुख (जनरल इंश्योरेंस) आत्रे भारद्वाज कहते हैं, 'चूंकि बैंक आपसे लॉकर में रखे सामान के बारे में पूछताछ नहीं करते हैं, इसलिए नुकसान की स्थिति में वे जिम्मेदार नहीं होंगे। दोनों का रिश्ता मकान मालिक और किरायेदार की तरह है। किरायेदार के घर चोरी की स्थिति में मकान मालिक जिम्मेदार नहीं है।' भारद्वाज कहते हैं कि लिहाजा लोगों को ऐसे विकल्प  तलाश करने चाहिए, जिनसे उनकी कीमती वस्तुओं को सुरक्षा मिल सके। 
 
एक विकल्प आवास बीमा पॉलिसी है, जिसमें बैंक लॉकर में रखी मूल्यवान वस्तुओं को भी बीमा कवर मिलता है। हालांकि पॉलिसी लेने से पहले इनकी शर्तें पूरी तरह जरूर समझ लें। इन पॉलिसियों के तहत मूल्यवान वस्तुएं जैसे आभूषण (घड़ी भी शामिल), हीरे और कलाकृतियां ही आती हैं। अगर आपने लॉकर में महत्त्वपूर्ण कागजात या नकदी या अन्य मूल्यवान चीजें रखी हैं तो उनको बीमा कवर नहीं मिलेगा। 
 
एक निश्चित सीमा से कम मूल्यवान वस्तुओं के लिए बीमा कंपनी आपको बैंक लॉकर में रखी चीजों की बाजार कीमत पर स्व-घोषणा (सेल्फ डेक्लरेशन) देने के लिए कह सकती है। बीमा कंपनियां स्व-घोषणा की अनुमति इसलिए मांगती हैं क्योंकि बैंक में रखी वस्तुओं में ऐसे आभूषण भी हो सकते हैं, जो एक पीढ़ी से दूसरी को मिले हों और संभव है कि ग्राहक के पास इनके बिल उपलब्ध न हों। 
 
उदाहरण के लिए बजाज आलियांज की माई होम इंश्योरेंस ऑल रिस्क पॉलिसी है। इसकी  सीमा 10 लाख रुपये है। अगर वस्तुओं का बाजार मूल्य इस सीमा से अधिक होता है तो आपको मान्यताप्राप्त मूल्यांकनकर्ता से  अनिवार्य रूप में मूल्यांकन प्रमाणपत्र लेना होगा। आभूषण एवं मूल्यवान वस्तुओं का प्रीमियम बीमा के लिए प्रस्तावित मूल्य पर निर्भर करता है। अगर आभूषण एवं अन्य मूल्यवान वस्तुओं के लिए बीमित रकम 5 लाख रुपये है तो भारत में प्रीमियम 4,000 रुपये और भारत से बाहर कहीं भी 5,000 रुपये होगा। कर अलग से लगेगा। मूल्यवान वस्तुओं का बीमा करवाते समय बीमा कंपनी द्वारा मान्यताप्राप्त मूल्यांकनकर्ता से मूल्यांकन प्रमाणपत्र लेना ही अधिक बेहतर होगा। दावा करते समय इससे आपको मदद मिलेगी। 
 
बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के हेड (प्रोडक्ट डेवलपमेंट) आर सुरेश नायर कहते हैं, 'प्रमाणपत्र वाली वस्तु के मामले में पूर्ण नुकसान की स्थिति में बीमित व्यक्ति को पूरी रकम मिल सकती है।' अगर आप स्व-घोषणा पत्र देते हैं तो हरेक साल सोने या हीरे की कीमतों में बदलाव के अनुसार बीमा प्रीमियम में भी बदलाव होगा। मूल्यांकन प्रमाणपत्र के मामले में प्रीमियम स्थिर रहेगा। कुछ बीमा कंपनियां सब-लिमिट भी लगा देती हैं। जैसे, अधिकतम कवर कुल बीमित रकम का 25 प्रतिशत तक हो सकता है। इसका मतलब हुआ कि सभी घरेलू बीमा सामान (गैजेट्स, टीवी, कंप्यूटर-लैपटॉप आदि भी शामिल) का कवर 5 लाख रुपये है तो आभूषणों का बीमा कवर 1.25 लाख रुपये मूल्य का ही होगा। अगर आपके पास सीमित वस्तुएं है तो एक विकल्प अपने घर में सेफ्टी वॉल्ट्स या तिजोरी लगवाने का है। सेफ्टी वॉल्ट्स आपकी जरूरत के अनुसार कई विकल्पों में मिल जाते हैं। इनको दीवार में लगाया जा सकता है या फर्श में फिट किया जा सकता है। इनकी एकबारगी कीमत 8,000 से 50,000 रुपये तक होती है। 
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