होम » Investments
«वापस

आदित्य बिड़ला कैपिटल: वित्तीय व्यवसाय से ताकत

हंसिनी कार्तिक |  Sep 03, 2017 10:00 PM IST

भारत में बड़ी तादाद में औद्योगिक घराने हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही वित्तीय सेवा क्षेत्र में हैं। हालांकि आदित्य बिड़ला कैपिटल (एबीसीएल) की सूचीबद्घता ने निवेशकों को मुख्य रूप से एचडीएफसी, रिलायंस कैपिटल और आईसीआईसीआई, ऐक्सिस और एसबीआई जैसे बैंकों के दबदबे वाले क्षेत्र में एक विकल्प मुहैया कराया है। पिछले दो महीनों में मूल्यांकन में तेजी को देखते हुए उन निवेशकों द्वारा इसमें कुछ मुनाफावसूली की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता जिन्हें एबीसीएल के शेयर आवंटित किए गए थे। हालांकि इस मजबूत वित्तीय सेवा कंपनी के शेयर खरीदने की चाहत रखने वाले दीर्घावधि निवेशक इस शेयर पर अभी भी विचार कर सकते हैं। सूचीबद्घता के बाद, एबीसीएल के 54,616 करोड़ रुपये के बाजार पंूजीकरण ने इसे भारत में 53वीं सबसे मूल्यवान कंपनी बना दिया है जो हिंडाल्को से थोड़ा आगे है। मौजूदा बाजार पूंजीकरण हालांकि 32,000 करोड़ रुपये (जून के अंत में, जब प्रेमजीइन्वेस्ट ने एबीसीएल में 2.2 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी) की तुलना में अधिक है, जिससे संकेत मिलता है कि यह शेयर वित्त वर्ष 2017 के प्राइस-टु-बुक के 1.6 गुना पर कारोबार कर रहा है। 

 
इसके अलावा, परिसंपत्ति बिक्री, खासकर बीमा और एएमसी व्यवसायों के लिए, की संभावना भी बनी हुई है। लेकिन निवेशकों को धैर्य बनाए रखने की जरूरत होगी, क्योंकि एबीसीएल इस पर फिलहाल विचार नहीं कर रही है। कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी अजय श्रीनिवासन कहते हैं, 'एबीसीएल के जरिये निवेशकों की विशेष व्यवसायों तक पहुंच हासिल है और इसलिए अलग किसी एक व्यवसाय तक पहुंच बनाने की जरूरत नहीं है।'
 
लेकिन अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि एबीसीएल की परिसंपत्ति प्रबंधन (एएमसी), जीवन बीमा आवास वित्त (एचएफसी), और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) जैसे प्रमुख सेगमेंटों में उपस्थिति है, जो सभी वृद्घि और विस्तार के दौर से गुजर रहे हैं। व्यवसाय करने के तरीकों में सुधार और पिछली गलतियों को सुधारने की कोशिश भी कारगर साबित हुई है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2010 में संकट (जब यूलिप से संबंधित प्रावधानों में बदलाव किया गया था) के बाद, एबीसीएल के जीवन बीमा व्यवसाय में वित्त वर्ष 2011 में नए बिजनेस प्रीमियम में 30 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी, क्योंकि उसकी 95 फीसदी उत्पाद पेशकशें यूलिप थीं। इस घटनाक्रम से निजी जीवन बीमा कंपनियां ज्यादा प्रभावित हुई थीं और यूलिप के लिए इनके व्यवसाय के आधार पर यह प्रभाव अलग अलग था। एबीसीएल के जीवन बीमा व्यवसाय की एम्बेडेड वैल्यू (ईवी) वित्त वर्ष 2014 में घटकर 3,220 करोड़ रुपये रह गई जो वित्त वर्ष 2011 में 4,110 करोड़ रुपये थी। हालांकि ईवी वित्त वर्ष 2017 में मजबूत होकर 3,430 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, क्योंकि प्रबंधन के निरंतर प्रयास की वजह से यूलिप की भागीदारी घटकर 30 फीसदी रह गई है। जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का मानना है कि उत्पाद पोर्टफोलियो में पारंपरिक उत्पादों पर जोर दिए जाने और परिचालन दक्षता से आय में सुधार आने की संभावना है।जीवन बीमा व्यवसाय पर दबाव की भरपाई उसके एएमसी व्यवसाय से हुई है जिसमें 2.1 लाख करोड़ रुपये की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) दर्ज की गईं। बाजार भागीदारी में लगातार मजबूती और मुनाफे में सुधार इस व्यवसाय की सबसे बड़ी ताकतें हैं। हालांकि कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज का मानना है कि सुधार की गुंजाइश बरकरार है, क्योंकि एचडीएफसी एएमसी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और रिलायंस निप्पॉन एएमसी ने पिछले चार वर्षों में औसत एयूएम के मुकाबले दर्ज 17-32 आधार अंक के शुद्घ मुनाफे पर परिचालन किया है जबकि बिड़ला सन लाइफ एएमसी के लिए यह आंकड़ा 12-15 आधार अंक है।
 
हालांकि उपर्युक्त व्यवसाय मजबूत और परिपक्व हैं, लेकिन इनमें सुधार आ रहा है और उनके एनबीएफसी और एचएफसी व्यवसायों को प्रमुख वाहक के तौर पर देखा जा रहा है। इन दोनों में एचएफसी ऋण बुक नई है और अनुभवहीन है। अब तक यह व्यवसाय आदित्य बिड़ला समूह कंपनियों के कर्मचारियों पर अधिक निर्भर था, हालांकि इसकी ऋण बुक वित्त वर्ष 2017 में बढ़कर 4,136 करोड़ रुपये पर पहुंच गई जो वित्त वर्ष 2015 (परिचालन की शुरुआत वाले वर्ष) में 142 करोड़ रुपये पर थी। 
 
आदित्य बिड़ला फाइनैंस के अधीन एनबीएफसी, 'एबीसीएल' का प्रमुख व्यवसाय है। जहां इसकी ऋण बुक वित्त वर्ष 2010 के 1000 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2017 में 34,700 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, वहीं एबीसीएल की वित्तीय स्थिति में भी इसका योगदान बढ़ा है। इसके अलावा एबीसीएल की 64 प्रतिशत बुक वैल्यू को एनबीएफसी से मदद मिलती है। ऐक्सिस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि उद्योग के रुझान की तुलना में एनबीएफसी में ज्यादा मजबूती बनी रहेगी और इसमें अगले पांच साल में 25 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर्ज की जा सकती है। विश्लेषकों का कहना है, 'यह वृद्घि उत्पाद विस्तार, छोटे और मझोले उद्यमों तथा रिटेल सेगमेंटों के लिए ऋणों की बड़ी भागीदारी पर केंद्रित होगी।' मौजूदा समय में रुझान बड़े और मझोले आकार की कंपनियों (ऋण बुक का 54 प्रतिशत) के पक्ष में बना हुआ है। इसके बावजूद परिसंपत्ति गुणवत्ता स्पष्टï बनी हुई है। 
कीवर्ड aditya birla, आदित्य बिड़ला कैपिटल,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक