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मौजूदा हालात में नारायणा, एचसीजी बेहतर स्थिति में

उज्ज्वल जौहरी |  Sep 03, 2017 10:01 PM IST

हॉस्पिटल सेगमेंट में अपोलो हॉस्पिटल्स, फोर्टिस हेल्थकेयर और नारायणा हृदयालय जैसी कंपनियों के शेयरों की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इनके शेयर 54 सप्ताह के निचले स्तर पर आ चुके हैं। जहां जून तिमाही का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहने से बाजार धारणा प्रभावित हुई है वहीं नी रीप्लेसमेंट के लिए संभावित कीमत नियंत्रण से अपोलो और फोर्टिस के लिए दबाव और बढ़ गया है। संक्षेप में कहें तो नियामकीय मोर्चे पर नकारात्मक खबरों का सिलसिला भी इन कंपनियों के साथ साथ निवेशकों के लिए चिंता की बात है और इन वजहों से हाल में इनके शेयरों पर दबाव पड़ा है।

 
विश्लेषकों का कहना है कि फोर्टिस के शेयर में उतार-चढ़ाव कंपनी में प्रवर्तकों और इक्विटी निवेश में बदलाव की आशंका से जुड़ी खबरों की वजह से भी आया है। सर्वोच्च न्यायालय ने कंपनी के प्रवर्तकों को फोर्टिस में अपनी हिस्सेदारी बेचने से रोक दिया है जिससे इस शेयर पर दबाव बढ़ा है। यह शेयर गुरुवार को 5 फीसदी से अधिक की गिरावट के साथ 146.40 रुपये पर आ गया था। बाजार की चिंताएं आश्चर्यजनक नहीं हैं क्योंकि विश्लेषकों का मानना है कि फोर्टिस हेल्थकेयर का बुनियादी आधार मजबूत बना हुआ है और नैदानिक जांच व्यवसाय (राजस्व में लगभग 20 प्रतिशत भागीदारी) को संभावित तौर पर अलग किए जाने से शेयरधारकों को मदद मिल सकती है। 
 
अपोलो के लिए विस्तार में तेजी आने से भविष्य में वृद्घि की रफ्तार मजबूत बनाने में मदद मिलेगी, लेकिन इससे उसके अल्पावधि प्रदर्शन पर दबाव पड़ा है। नई परियोजनाओं के लिए लगातार विस्तार की राह पर बढ़ रही अपोलो ने मार्जिन पर लागत वृद्घि का दबाव महसूस किया है। जब तक नई इकाइयों के मुनाफे में सुधार दिखना शुरू नहीं हो जाएगा, तब तक हालात में बदलाव आने के आसार नहीं दिख रहे हैं। क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों ने कहा है कि अपोलो को लेकर उनकी चिंता उन मजबूत अस्पतालों के कमजोर मुनाफे को लेकर है जिनका मार्जिन तेजी से बढ़ रही प्रतिस्पर्धा से प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले ऊंचे मूल्य निर्धारण ने लागत बढऩे की स्थिति में कीमतें बढ़ाने की अपोलो की क्षमता को प्रभावित किया है। 
 
इन दो कंपनियों के संबंध गहराती प्रतिस्पर्धा बाजार की मुख्य दूसरी चिंता बनी हुई है। एक अन्य विदेशी ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि अस्पतालों के लिए प्रीमियम सेगमेंट बढ़ती प्रतिस्पर्धा की वजह से धीमी वृद्घि दर्ज कर रहा है मार्जिन के साथ आपूर्ति अंतर घटने से भी दबाव बढ़ा है। 
 
सिस्टेमैटिक्स शेयर्स के रणवीर सिंह का मानना है कि कार्डियोलॉजी और ऑनकोलोजी के तौर पर स्पेशियल्टी पर ध्यान केंद्रित करने वाले अस्पताल मौजूदा परिवेश में बेहतर स्थिति में हैं। इस मोर्चे पर, ऑनकोलोजी और इन्फर्टिलिटी पर ध्यान केंद्रित करने वाली हेल्थ केयर ग्लोबल (एचसीजी) और कार्डियक केयर से जुड़ी नारायणा हृदयालय बड़े प्रतिस्पर्धियों के लिए अल्पावधि चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए निवेश के लिहाज से बेहतर दांव हैं। एचसीजी विस्तार का बड़ा चरण पहले ही पूरा कर चुकी है और उसके 40 प्रतिशत से अधिक बिस्तर टियर-1 शहरों से संबंधित हैं। जेफरीज के विश्लेषकों का कहना है कि नारायणा के लिए उसका भागीदारी-आधारित बिजनेस मॉडल उसे गैर-मेट्रो शहरों में मुनाफा बढ़ाने में मददगार होगा।
 
इलारा सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने एचसीजी और नारायणा के लिए वित्त वर्ष 2019 के एबिटा मार्जिन के लिए 17.1 फीसदी और 12.8 फीसदी का अनुमान व्यक्त किया है जबकि अपोलो और फोर्टिस के लिए यह आंकड़ा 10.7 फीसदी और 11.5 फीसदी है। एडलवाइस के विश्लेषकों ने अपोलो के लिए वित्त वर्ष 2021 तक मार्जिन में 450 आधार अंक यानी 4.5 फीसदी की वृद्घि का अनुमान जताया है।
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