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एमऐंडएम: यूटिलिटी वाहनों से बढ़ेगी की मुश्किल

राम प्रसाद साहू |  Sep 03, 2017 10:02 PM IST

मंत्रिमंडल द्वारा बड़ी कारों और स्पोटï्ïर्स यूटिलिटी वाहनों (एसयूवी) पर जीएसटी के तहत उपकर 15 फीसदी से बढ़ाकर 25 फीसदी किए जाने के बाद महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) का शेयर दो कारोबारी सत्रों में 2.5 फीसदी कमजोर पड़ गया था। कंपनियों ने संकेत दिया है कि वे उपकर की वजह से होने वाली किसी तरह की वृद्घि का बोझ उपभोक्ताओं पर डालेंगी। सूचीबद्घ कंपनियों में जहां टाटा मोटर्स और मारुति सुजूकी पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा वहीं यूटिलिटी वाहन खंड में बड़े निवेश की वजह से सबसे ज्यादा प्रभाव एमऐंडएम पर दिखेगा। 

 
इस बदलाव से पहले मझोले आकार और बड़े आकार के यात्री वाहनों पर उपकर 28 फीसदी की जीएसटी दर के साथ 15 फीसदी था। आकार के आधार पर, पिछली जीएसटी व्यवस्था के तहत घटी कर दरों का वाहनों पर असर अलग था। कम कर दरों को देखते हुए, मझोले आकार की 4 मीटर से अधिक बड़ी और 1500 सीसी क्षमता से कम इंजन वाली कारों को 5 प्रतिशत तक का लाभ मिला जबकि 1500 सीसी आकार (एसयूवी, लक्जरी वाहन) वाले वाहनों को कर दरों में 12 प्रतिशत से अधिक का लाभ मिला था। 
 
नई जीएसटी दर के साथ अब यह सब बदल जाएगा। उपकर में कमी को देखते हुए एमऐंडएम ने उपकर में कमी से वाहन कीमतों में 1-7 फीसदी की कटौती (स्कॉर्पियो हाइब्रिड को छोड़कर, जिसमें कीमत वृद्घि हुई) की थी का लाभ दिया गया था, वहीं अब उपकर में वृद्घि के बोझ से भी कंपनी को निपटना होगा। ऐम्बिट कैपिटल के अश्विन शेट्टïी का मानना है कि हालांकि मार्जिन पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि अधिक करों का ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा, लेकिन इसके बाद होने वाली कीमत वृद्घि की वजह से बिक्री पर कुछ दबाव देखा जा सकता है। उनका मानना है कि एमऐंडएम अधिक प्रभावित होगी क्योंकि उसका यूटिलिटी वाहन (यूवी) पोर्टफोलियो का 40 प्रतिशत हिस्सा इन सेगमेंटों से जुड़ा हुआ है।
 
उपकर में वृद्घि ऐसे समय में हुई है जब एमऐंडएम सहित कई कंपनियां जीएसटी से संबंधित फेरबदल से प्रभावित तिमाही के बाद बिक्री मजबूत बनाने की संभावना तलाश रही हैं। डीलरों द्वारा इन्वेंट्री घटाने और भारी डिस्काउंट दिए जाने से जून तिमाही में कई वाहन कंपनियों का राजस्व और मार्जिन प्रदर्शन प्रभावित हुआ है। कंपनी के लिए स्थिति खासकर यूटिलिटी वाहन सेगमेंट में बदतर हो सकती है, क्योंकि इसमें वह प्रतिस्पर्धियों के हाथों बाजार भागीदारी गंवा रही है। जहां इसके यूटिलिटी वाहनों की बिक्री अधिक प्रतिस्पर्धा और ग्रामीण इलाकों में धीमी मांग की वजह से जून तिमाही में सालाना आधार पर 5 प्रतिशत घटी, वहीं यूवी में उसकी बाजार भागीदारी जून 2016 की तिमाही के मुकाबले 370 आधार अंक घटकर 27.9 फीसदी रह गई। कंपनी अपनी खोई हुई बाजार भागीदारी की कुछ हद तक भरपाई करने के प्रयास में वित्त वर्ष 2018 की दूसरी छमाही में मल्टी-पर्पज व्हीकल यू321 और वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में सांगयोंग के टिवोली मॉडल पर आधारित नए एसयूएवी (एस201) के नए लॉन्च की संभावना तलाश रही है। लेकिन समय-सीमा को देखते हुए एमऐंडएम सुधार दर्ज करने की रफ्तार पर तेजी से बढ़ रही है और उसने 30 फीसदी की बाजार भागीदारी का लक्ष्य रखा है। 
 
जून तिमाही में ट्रैक्टर बिक्री सालाना आधार पर 13 फीसदी तक बढ़ी। कंपनी ने जून तिमाही में 45.8 फीसदी की बाजार भागीदारी दर्ज की जो सालाना आधार पर 190 आधार अंक की बढ़त है। कंपनी को नए उत्पाद लॉन्च (यूवो रेंज) और डीलर नेटवर्क में सुधार की मदद से बाजार भागीदारी मजबूत बनाने में मदद मिली। एमऐंडएम को ट्रैक्टर की उद्योग की बिक्री वृद्घि 10-12 फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान है। अपने ताजा बिक्री रिकॉर्ड को देखते हुए कंपनी द्वारा वित्त वर्ष 2018 में भी शानदार प्रदर्शन किए जाने की उम्मीद है।  मौजूदा भाव पर, यह शेयर वित्त वर्ष 2019 की अनुमानित आय के 15.4 गुना पर कारोबार कर रहा है। पीई आधार पर यह प्रमुख वाहन मूल उपकरण निर्माता कंपनियों में सबसे सस्ता शेयर है। निवेशक गिरावट पर इस कंपनी में खरीदारी कर सकते हैं। 
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