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'रिस्क-रिवार्ड प्रतिकूल, इन स्तरों पर खरीदारी नहीं आकर्षक'

पुनीत वाधवा |  Sep 03, 2017 10:02 PM IST

भारत इस साल अब तक वैश्विक रूप से शानदार प्रदर्शन करने वाला बाजार रहा है। यूबीएस सिक्योरिटीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख गौतम छाछरिया ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि निफ्टी के मौजूदा मूल्यांकन को तभी उचित ठहराया जा सकता है जब  हम दो अंक की आय वृद्घि के अनुमान पर कायम रहें। निफ्टी-50 के लिए उनका 'सीवाई17-एंड बेस केस सिनेरियो लक्ष्य' 9,000 है। पेश हैं मुख्य अंश:

 
बाजार सर्वाधिक ऊंचाई पर हैं, लेकिन आर्थिक संकेतक फिलहाल कमजोर हैं। इस विविधता की क्या वजह है?
 
वृद्घि में सुधार की उम्मीद को मजबूत स्थानीय रिटेल प्रवाह से मदद मिली है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और अन्य सुधार यह उम्मीद जगा रहे हैं कि दीर्घावधि के दौरान भारत में ऊंची वृद्घि दरों को मजबूती मिलेगी। इस संदर्भ में, हमने स्थानीय प्रवाह में तेजी दर्ज की है। घरेलू प्रवाह ऐतिहासिक प्रतिफल की गति पर अमल करता है। इसलिए, वे म्युचुअल फंडों में पैसा लगाना बरकरार रख सकते हैं, क्योंकि प्रतिफल सकारात्मक है। 
 
आपने वर्ष के अंत तक के लिए निफ्टी-50 के लिए अपना लक्ष्य क्यों घटा दिया?
 
हमने सिर्फ मुख्य पीई मल्टीपल के बजाय एक मजबूत और मूलभूत वैल्यू-आधारित दृष्टिïकोण बपनाया है। विभिन्न आय परिदृश्यों के आधार पर अपने मॉडल से वित्त वर्ष 2017 के वास्तविक और पीई मल्टीपल को मिलाकर हमारा कैलेंडर वर्ष एंड-2017 का बेस केस निफ्टी मूल्य 9,000 (17 गुना के पीई पर आधारित) है। वहीं गिरावट के संदर्भ (डाउनसाइड सिनेरियो) में हमारा परिदृश्य 7500 (15 गुना पीई) और तेजी का परिदृश्य (अपसाइड सिनेरियो) 10,000 (18 गुना पीई) है। 
 
आप मौजूदा समय में मूल्यांकन को लेकर कितने सहज हैं?
 
निवेशकों के साथ हमारी चर्चाएं मुख्य मूल्यांकन को लेकर कुछ चिंताओं को दर्शाती हैं। विशेष रूप से, आय वृद्घि के बजाय पीई वृद्घि इस साल भारत के लिए लगभग सभी प्रदर्शन, खासकर सीमेंट, कंज्यूमर स्टैपल्स, ऑटो और गैर-बैंकिंग वित्त के लिए स्पष्टï करती है। हमारा मानना है कि रिस्क-रिवार्ड प्रतिकूल है और हम इन स्तरों पर खरीदारी के लिए सहज स्थिति में नहीं हैं। निफ्टी का मौजूदा सर्वाधिक ऊंचा मूल्यांकन तभी उचित ठहराया जा सकेगा जब हम दो अंक की आय वृद्घि पर कायम रहें। अतीत में जब बाजार ऐसे मल्टीपल के नजदीक पहुंचे थे, तो आय काफी मजबूत थी। इस बार हालांकि मल्टीपल आय वृद्घि के अभाव में मजबूत स्थिति में हैं। हम अल्पावधि के लिए भारत में धीमी वृहद/आय रिकवरी के अपने नजरिये पर कायम हैं। 
 
मौजूदा आय सीजन के बारे में आपका क्या नजरिया है?
 
निफ्टी की वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही की आय सालाना आधार पर 8 फीसदी (वैश्विक जिंसों को अलग रखकर 3 फीसदी) की राजस्व वृद्घि के साथ 3 प्रतिशत तक घटी है और एबिटा में सालाना आधार पर 4 फीसदी की कमी आई है। निफ्टी की 40 फीसदी कंपनियां आय अनुमानों से चूक गई हैं जबकि 22 फीसदी अनुमानों से आगे रहीं। वित्त वर्ष 2018 के लिए निफ्टी की आय का अनुमान अब 14 प्रतिशत की वृद्घि का संकेत देता है जिसमें 2017 में अब तक 8 फीसदी और वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही के आय सीजन के दौरान 2 फीसदी की कमी आई है। धातु और खनन को छोड़कर सभी क्षेत्रों में आय अनुमानों में कमी दर्ज की गई है।
 
वित्त वर्ष 2018 और वित्त वर्ष 2019 के लिए आय अनुमान क्या हैं?
 
वित्त वर्ष 2019 के अनुमान अभी भी 20 फीसदी की वृद्घि का संकेत दे रहा है। वित्त वर्ष 2019 में शेष 9 महीनों के लिए हमें आय अनुमानों में और अधिक कटौती की आशंका है, क्योंकि वित्त वर्ष 2018 की दूसरी छमाही में वृद्घि में सुधार की उम्मीद फिर से धूमिल पड़ती दिख रही है। 
 
फिलहाल एफआईआई भारत को किस नजरिये से देख रहे हैं?
 
एफआईआई ने भारत पर अपने 'ओवरवेट' नजरिये में कमी की है, लेकिन यह बाजार (भारत) उनके लिए अभी भी 'ओवरवेट' बना हुआ है। यदि बाजार नहीं गिरते हैं तो स्थानीय प्रवाह मजबूत बना रह सकता है, क्योंकि एक वर्षीय प्रतिफल सकारात्मक दायरे में कायम है। स्थानीय प्रवाह के लिए जोखिम 5 फीसदी से अधिक की बाजार गिरावट की स्थिति में पैदा हो सकता है, मौजूदा स्तरों पर नहीं। 
 
आप किन क्षेत्रों पर उत्साहित हैं?
 
स्पष्टï तौर पर हम कंज्यूमर स्टैपल्स पर सकारात्मक हैं। वहीं हम आईटी सेवाएं और रिटेल-केंद्रित निजी बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और दूरसंचार तथा मीडिया पर सकारात्मक हैं। 
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