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जियो के एक साल बाद बजी कई और बदलावों की घंटी

उज्ज्वल जौहरी |  Sep 10, 2017 09:03 PM IST

जियो फोन एबिटा में जोड़ सकता है 1.5 अरब डॉलर से अधिक की रकम

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के दूरसंचार परिचालन जियो की शुरुआत से पहले पैदा हुई आशंकाएं इसके लॉन्च के पहले साल के अंत तक उम्मीदों में बदल गई हैं। दूरसंचार क्षेत्र में रिलायंस के 1,50,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश को शुरू में उसके प्रतिफल अनुपात पर बाधा के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन सेवाओं और संभावित घटनाक्रम के मिल रही शानदार प्रतिक्रिया को देखते हुए अब इस निवेश का लाभ समय से पहले मिलना शुरू हो सकता है। जियो पहले ही रिकॉर्ड बना चुकी है। उसने बेहद कम समय में 13 करोड़ ग्राहकों के आंकड़े को पार कर लिया है।

इंटरकनेक्ट यूसेज चार्ज (आईयूसी: कॉल टर्मिनेट होने पर एक ऑपरेटर से दूसरे ऑपरेटर को चुकाई जाने वाली रकम) में कटौती की संभावना बढ़ रही है और जियो फोन का लॉन्च भी आरआईएल के लिए बड़ा लाभ दिला सकता है। आईयूसी में कटौती से कंपनी को परिचालन स्तर पर भरपाई की स्थिति (शुरू में वित्त वर्ष 2019 का अनुमान जताया गया था) में आने में मदद मिलेगी और साथ ही आरआईएल के पंूजी पर प्रतिफल (आरओई) में जियो का योगदान बढ़ेगा। रिफाइनिंग और पेट्रो रसायन के प्रमुख व्यवसायों में सुधार की वजह से आरआईएल का आरओई पहले से ही मजबूत बना हुआ है।

जैसा कि खबरों में कहा गया है, दूरसंचार नियामक आईयूसी को घटाकर 0.07 रुपये (मौजूदा समय में 0.14 रुपये है) करने या इसे समाप्त किए जाने और धीरे धीरे 'बिल एंड कीप' मॉडल पर अमल किए जाने की योजना बना रहा है। सीएलएसए का मानना है कि इससे आरआईएल की वित्त वर्ष 2019-20 की समेकित आय में 13-14 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है और अंकित मूल्य शेयर के मौजूदा भाव के 8 प्रतिशत के बराबर पहुंच सकता है। प्री-बुकिंग के पहले राउंड में लगभग 60 लाख जियो फोन बुकिंग को देखते हुए सीएलएसए ने बुकिंग की रफ्तार मजबूत बने रहने का अनुमान जताया है। सीएलएसए का यह भी मानना है कि यह बाजार के लिए भी सकारात्मक साबित हो सकता है।

सकारात्मक खबरों के प्रवाह की वजह से आरआईएल का शेयर 2017 के शुरू से ही मजबूत बना हुआ है। नए सकारात्मक बदलावों की वजह से इसमें और तेजी आ सकती है। इन बदलावों में प्रमुख है सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) में तेजी आना, केमिकल मार्जिन मिड-साइकल लेवल के आसपास पहुंचना और दूरसंचार को लेकर स्थिति स्पष्टï होना। यही वजह है कि डॉयचे बैंक, मॉर्गन स्टैनली और सीएलएसए जैसी प्रख्यात ब्रोकरेज फर्मों ने पिछले कुछ दिनों में इस शेयर की रेटिंग बढ़ाई है।

मार्च तिमाही में सपाट (6.4 डॉलर प्रति बैरल) बने रहने के बाद बेंचमार्क सिंगापुर जीआरएम सितंबर तिमाही में वृद्घि पहले ही दर्ज कर चुका है। अमेरिकी क्षेत्र में हरीकेन हार्वे से हुए नुकसान से जीआरएम को और मजबूती मिली है। जहां सितंबर तिमाही में 24 अगस्त तक यह मार्जिन औसत 7.7 डॉलर प्रति बैरल पर था वहीं 1 सितंबर को बढ़कर 10.5-11 डॉलर पर दर्ज किया गया। जून तिमाही में रिलायंस ने 11.9 डॉलर का शानदार जीआरएम दर्ज किया था। जहां रिफाइनिंग का रिलायंस के परिचालन मुनाफे (एबिटा) में लगभग 50 प्रतिशत का योगदान है वहीं पेट्रो रसायन का एक-तिहाई योगदान है। प्रमुख उत्पादों (पीई, पीईटी, पीटीए, पीपी और पीएक्स) के लिए केमिकल मार्जिन तिमाही आधार पर 8-25 फीसदी तक बढ़ा है। वहीं मिडस्ट्रीम पॉलिस्टर का मार्जिन इस साल अब तक लगभग 30 फीसदी तक की वृद्घि के बाद 2017-18 में बढ़कर 25 फीसदी हो गया है।

कीवर्ड RIL, jio, Telecom,

  
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