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संयुक्त घर के लिए पूंजी लाभ कर का लाभ मुश्किल

तिनेश भसीन |  Sep 10, 2017 09:12 PM IST

आप एक मकान बेचकर क्या दो या इससे अधिक मकान खरीद सकते हैं? आयकर कानून की रोशनी में तो ऐसा करना मुमकिन नहीं है। लेकिन इससे उलट हो सकता है। आप दो या इससे अधिक संपत्तियां बेचकर एक ही संपत्ति में निवेश करना चाहें तो ऐसा कर सकते हैं और इस पर पूंजी लाभ कर का झमेला भी नहीं होगा। हाल में दिल्ली के आयकर अपीली न्यायाधिकरण ने कहा है कि अगर कोई करदाता एक घर खरीदने के लिए एक से अधिक जायदाद की बिक्री करता है तो उन घरों की बिक्री पर उसे दीर्घ अवधि के पूंजी लाभ कर का फायदा मिल सकता है। पर कानून के तहत आप एक घर बेचकर दो या अधिक घर नहीं खरीद सकते।
कानून में प्रावधान है कि दीर्घ अवधि के पूंजी लाभ कर का फायदा लेने के लिए जायदाद की बिक्री से प्राप्त रकम एक घर की खरीद में ही निवेश की जा सकती है। लेकिन कोई अगर दो मंजिला मकान खरीदना चाहे तो क्या होगा? मंजिलों वाले मकान को आप अगर एक आवासीय इकाई बताकर पूंजी लाभ कर का फायदा लेने के इच्छुक हों तो आयकर विभाग इस पर सवाल खड़े कर सकता है। कुछ निश्चित मामलों में वह करदाता का यह तर्क खारिज कर सकता है कि संबंधित संपत्ति एक ही इकाई है। उदाहरण के लिए अगर कोई करदाता एक घर बेचता है और किसी भूखंड पर दो या तीन मंजिला इमारत या बंगला बनवाता है, जिसमें परिवार के सदस्यों को रहना हो, तो भी कर विभाग इस पर सवाल उठा सकता है।
करदाता के लिए यह एक अवासीय इकाई है। दूसरी तरफ आय कर विभाग एक से अधिक तल (फ्लोर) होने पर प्रत्येक को अलग घर मान सकता है। कर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में करदाता को सावधान रहने की जरूरत है। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर ऐंड लीडर (पर्सनल टैक्स) कुलदीप कुमार कहते हैं, 'इस तरह के मामलों में कर विभाग विस्तार से यह जांच करेगा कि इसे एक ही आवासीय इकाई माना जाए या अलग-अलग आवास।'

कर लाभ
कोई करदाता एक ही बिल्डिंग में अगल-बगल दो फ्लैट खरीदता है और उन्हें एक इकाई के  रूप में जोड़ देता है तो वहां भी विवाद हो सकता है। कर अधिकारी यह कह सकता है कि चूंकि  करदाता ने दो अलग-अलग घर खरीदे हैं, इसलिए उसे एक ही घर के लिए दीर्घ अवधि के पूंजी लाभ कर का फायदा मिलेगा। करदाता अगर एक ही बिल्डिंग या भूखंड पर ऊपर-नीचे दो तल खरीदता है तो भी इसी तरह का विवाद हो
सकता है। आरएसएम एस्ट्यूट कंसल्टिंग ग्रुप के संस्थापक सुरेश सुराणा कहते हैं, 'कर अधिकारी को सहमत करने के लिए जायदाद मालिक को फ्लैटों को संयुक्त करने की जरूरत होगी। उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि यह एकीकृत आवासीय इकाई है। दोनों फ्लैटों के लिए एक ही प्रवेश द्वार होने से आपका मामला मजबूत बनता है। अगर संभव हो तो खरीदार को दोनों फ्लैटों के लिए एक ही एग्रीमेंट करना चाहिए।'
ऐसे मामले आय कर विभाग और करदाता के बीच विवाद के विषय रहे हैं। वित्त वर्ष 2015-16 में एक अधिसूचना आई थी, जिसमें 'एक नया आवासीय घर' को बदलकर 'एक आवासीय गृह संपत्ति ' कर दिया गया था। भाषा में बदलाव से इसकी व्याख्या में भी बदलाव आया है। इस बदलाव के कारण ऊपर बताए गए मामलों में रियायत हासिल करना मुश्किल हो गया है। टैक्समैन डॉट कॉम के महाप्रबंधक नवीन वाधवा कहते हैं, 'संशोधन से पहले के मामलों में आय कर न्यायाधिकरणों और अदालतों ने करदाताओं के पक्ष में फैसले दिए थे। हालांकि वे निर्णय खास किस्म के मामलों से संबंधित हैं।'
वाधवा कहते हैं कि इस साल मद्रास उच्च न्यायालय ने भी अपने एक आदेश में कहा कि दो आवासीय इकाइयां केवल इसलिए अलग नहीं मानी जाएंगी क्योंकि फ्लैट दो अलग-अलग सेल डीड से खरीदे गए थे और बिजली मीटर के कनेक्शन अलग-अलग थे। हालांकि 2015 की अधिसूचना में बदलाव के बाद ऐसे मामलों में किसी तरह की बाध्यता नहीं रह गई है।
दीर्घ अवधि के पूंजी लाभ कर पर छूट हासिल करने से जुड़ी धारा 54 के तहत करदाता जिस साल में संपत्ति बेचता हो, उससे एक साल पहले या बेचने के दो साल के भीतर नई संपत्ति खरीदनी होगी या निर्माण शुरू करना होगा। अगर करदाता मकान का निर्माण करा रहा है तो यह काम पुरानी जायदाद की बिक्री की तारीख से तीन साल के भीतर पूरा करना होगा। आम बजट में संशोधन के अनुसार आकलन वर्ष 2018-19 से करदाता को दीर्घ अवधि के पूंजी लाभ की छूट के लिए अचल संपत्ति 24 महीने के लिए अपने पास रखनी होगी। इससे पहले यह अवधि 36 महीने थी।

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