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मॉनसून में कार को नुकसान, कैसे पाएं दावे का भुगतान

तिनेश भसीन |  Sep 10, 2017 09:14 PM IST

मॉनसून के दौरान गाडिय़ों का इंजन बंद होने के दावे आम बात हैं। साथ ही सबसे ज्यादा विवाद वाले मसलों में यह एक है। बीमा कंपनियां इंजन में पानी घुसने और इससे हुए नुकसान के सभी मामलों को सीधे-सीधे नामंजूर कर देती हैं। लेकिन अगर आप पर्याप्त सावधानी बरतें तो थोड़ी उम्मीद बंध सकती है।
जिस जगह पानी भरा हो, वहां गाड़ी चलाने पर पानी एयर इनटेक सिस्टम से इंजन में प्रवेश कर सकता है, जिससे इंजन बंद हो जाएगा। इसे हाइड्रोस्टैटिक लॉक भी कहा जाता है। आमतौर पर ऐसा तब होता है जब इंजन में पानी घुस जाने के बाद चालक गाड़ी स्टार्ट करने के लिए कई बार  कोशिश करता है। कुछ मामलों में ऐसा तब भी हो सकता है जब जल जमाव वाले इलाके से कार गुजर रही हो। हाइड्रोस्टैटिक लॉक से जुड़े सभी मामलों में बीमा कंपनियां यह कहकर दावा ठुकरा देती हैं कि ग्राहक की लापरवाही से ऐसा हुआ है और बार-बार इंजन चालू करने के चक्कर में उसने इंजन को नुकसान पहुंचा दिया है।
एक सामान्य बीमा कंपनी के अधिकरी ने कहा, 'जल जमाव वाले क्षेत्र से गुजरने वक्त इंजन बंद होता है तो यह एक दुर्घटना मानी जाएगी। तब बीमा कंपनियों को मरम्मत का खर्च देना होगा, लेकिन अगर ऐसा बार-बार कार का इंजन चालू करने से हुआ है तो यह लापरवाही मानी जाएगी। हालांकि यह साबित करना संभव नहीं है कि हाइड्रोस्टेटिक लॉक एक दुर्घटना है या लापरवाही।'
अतीत में उपभोक्ता अदालतों ने ग्राहकों के पक्ष में फैसले दिए हैं, जिन्होंने साबित किया था कि जल जमाव वाले क्षेत्र में कार रुकने पर उन्होंने एहतियात के पर्याप्त उपाय किए थे। भारती एक्सा जनरल इंश्योरेंस के मुख्य अंडरराइटिंग अधिकारी पराग गुप्ता कहते हैं, 'जब भी कोई व्यक्ति जल जमाव वाले क्षेत्र से गुजरे  और अगर पानी कार के टायर की ऊंचाई से अधिक हो तो कार से निकलकर गाड़ी किनारे खड़ी कर देनी चाहिए। अगर कार का इंजन किसी कारणवश बंद हो जाता है तो चालक को इसे दोबारा चालू करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।'
ऐसे में आपको पानी कम होने का इंतजार करना चाहिए। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के सह-संस्थापक और निदेशक तरुण माथुर कहते हैं, 'बीमा कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाएं। आप उसे बताएं कि आपकी कार पानी में है और उसे आगे की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहिए। संभावना यही है कि बीमा कंपनी का नुमाइंदा कार वहां से निकलवाकर पास के किसी गैराज में ले जाएगा और जांच करवाएगा।'
चूंकि, इंजन बंद होने से विवाद खड़ा हो सकता है, इसलिए ज्यादातर बीमा कंपनियां सलाह देती हैं कि ग्राहकों को एक एड-ऑन कवर लेना चाहिए जिससे इंजन के नुकसान को सुरक्षा कवर मिल जाए। टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस के कार्यकारी उपाध्यक्ष-कंज्यूमर लाइन्स, पराग वेद कहते है, 'एड-ऑन कवर मामूली खर्च पर मिलता है। इसमें इंजन को किसी भी तरह के नुकसान से सुरक्षा मिलती है। इसमें बीमाधारक को इसके बाद होने वाले नुकसान से भी सुरक्षा मिलती है।'
अगर आपकी कार कहीं खड़ी है और पानी केबिन के अंदर चला गया हो तो वही प्रक्रिया अपनाएं और बीमा कंपनी को फोन करें। पानी उतर जाने के तत्काल बाद इंजन भी चालू नहीं करें। इसे कम से कम एक-दो दिन सूखने दें। इंजन ठप होने के अलावा बिजली उपकरणों को भी नुकसान हो सकता है। पानी से शॉर्ट सर्किट हो सकता है और कार में आग भी लग सकती है। हालांकि बीमा कंपनियां बिजली प्रणाली ठप होने पर कोई विवाद नहीं करती हैं और दावे का निपटान कर देती हैं।
बीमा कंपनियां इंजन और इलेक्ट्रिकल उपकरण की ही परवाह करती हैं। फैक्टरी में लगाए गए उपकरणों को हुए किसी नुकसान से संबंधित दावे को वे निपटा देती हैं। बैंकबाजार डॉट कॉम में कैटेगरी हेड (जनरल इंश्योरेंस) आत्रे भारद्वाज कहते हैं, 'फैक्टरी में स्थापित उपकरणों में ऐसे कल-पुर्जे शामिल नहीं होते जिनकी पेशकश आपके डीलर ने कार के शोरूम में पहुंचने के बाद की होगी। अगर आपने ऑडियो सिस्टम को उन्नत बनाया है या रिवर्स पार्किंग सेंसर बाद में लगवाया है या अतिरिक्त स्पीकर जैसी कोई चीज लगवाई है तो इन सबको तब तक बीमा कवर में शामिल नहीं किया जाएगा जब तक आप फॉर्म भरते समय इनके बारे में बीमा कंपनी को नहीं बताएंगे।'  भारद्वाज कहते हैं कि ज्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उनको अतिरिक्त फिटिंग के बारे में बीमा कंपनियों को जानकारी देनी होती है। इन फिटिंग का बीमा आसानी से हो सकता है।

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