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ऑनलाइन सेवा या सामान, विक्रेता के खिलाफ मामला दर्ज कराना आसान

तिनेश भसीन |  Sep 17, 2017 10:00 PM IST

देश में ई-कॉमर्स क्षेत्र यानी ऑनलाइन कारोबार खूब फल-फूल रहा है लेकिन शिकायतों के निपटान के मामले में उसका रिकॉर्ड हमेशा से ही गड़बड़ रहा है। मसलन, पहले ऐसा था कि अगर किसी व्यक्ति ने दिल्ली से खरीदारी की है और अगर वह ई-कॉमर्स कंपनी के उत्पाद या सेवा से संतुष्टï नहीं है तो कंपनी के खिलाफ मामला सिर्फ उसी शहर, जैसे बेंगलूरु में दर्ज कराया जा सकता था जहां कंपनी का पंजीकृत कार्यालय है। 

 
लेकिन अब चीजें काफी सहज हो गई हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल में राष्टï्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें यह स्पष्टï किया गया कि कोई व्यक्ति किसी ई-कॉमर्स कंपनी के खिलाफ कहां शिकायत दर्ज करा सकता है। राष्ट्रीय और राज्य उपभोक्ता आयोगों के आदेशों के अनुसार उपभोक्ता उस शहर में शिकायत दर्ज करा सकता है जहां उसने लेन-देन किया है या उस फिर उस शहर में जहां कंपनी का कार्यालय है।
 
इंटरनैशनल कंज्यूमर राइट्ïस प्रोटेक्शन काउंसिल के अध्यक्ष अरुण सक्सेना कहते हैं, 'हम उपभोक्ता अदालतों से लंबे समय से इस मामले पर विचार करने की मांग करते आ रहे हैं। लेकिन उन्होंने हमेशा ऐसी उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज कराने को कहा, जहां ई-कॉमर्स कंपनी का कार्यालय हैे। उन्होंने उस स्थान पर विचार नहीं किया जहां उपभोक्ता ने लेनदेन किया हैे।' सक्सेना के अनुसार ताजा आदेश से उपभोक्ताओं को शिकायतों के जल्द समाधान में मदद मिलेगी, क्योंकि क्षेत्राधिकार की समस्या अब स्पष्टता के साथ सुलझ गई है।
 
एमडीपी ऐंड पार्टनर्स के मैनेजिंग पार्टनर निशित धु्रव कहते हैं, 'इस आदेश में उपभोक्ता संरक्षण कानून की भावना पर विचार किया गया है जिसमें कि आम ग्राहक को अधिक खर्च किए बगैर तुरंत राहत पाने का अधिकार दिया गया है।' उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अदालत ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 को आधार माना है। इस कानून में कहा गया है कि यदि दो पक्ष किसी सामान या सेवा के लिए इंटरनेट पर कोई अनुबंध करते हैं, तो यह माना जाता है कि अनुबंध ऐसी जगह हुआ, जहां सामान या सेवा प्रदाता मौजूद है और यह उस जगह प्राप्त किया गया जहां से खरीदार ने ऑर्डर दिया।   उपभोक्ता मामलों के लिए यह डिवाइस का वह स्थान होगा जहां से ई-कॉमर्स कंपनी से सामान या सेवा बुक  कराई गई। 
 
आदेश से उपभोक्ताओं को फोरम का चयन करने के बारे में कई विकल्प मिले हैं। इस मामले में उपभोक्ता ने नई दिल्ली से पश्चिम बंगाल के बागडोगरा के लिए रिटर्न फ्लाइट के टिकट बुक कराए थे। इनमें एयरलाइन बदलने के लिए कोलकाता में स्टॉपओवर था। वापसी के दौरान कोलकाता से नई दिल्ली की उड़ान रद्द हो गई। उपभोक्ता को नई बुकिंग करानी पड़ी और उसकी दिल्ली से अपने शहर चंडीगढ़ जाने वाली बस छूट गई। 
 
फिर इस महिला ने उस एयरलाइन से राहत पाने के लिए चंडीगढ़ में मामला दर्ज कराया जिससे उसे कोलकाता से नई दिल्ली जाना था। एयरलाइन ने तर्क दिया कि जिला और राज्य फोरम के पास इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है, क्योंकि यात्रा कोलकाता-नई दिल्ली मार्ग पर की गई थी और एयरलाइन का कार्यालय गुरुग्राम में था। लेकिन एनसीडीआरसी ने कहा कि यह महिला चंडीगढ़, कोलकाता, गुरुग्राम या नई दिल्ली में भी मामला दर्ज करा सकती है। 
 
वकील एवं अंतरराष्टï्रीय साइबर कानून एवं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रशांत माली ने कहा, 'इसे वह स्थान माना जाता है जहां मामला घटित हुआ है। इसमें वे स्थान शामिल हैं जहां अनुबंध हुआ हो या होने वाला हो, जहां रकम चुकाई गई हो या चुकाई जानी हो।' इससे जाहिर है कि उपभोक्ता शिकायत के मामले में क्षेत्रीय न्यायाधिकार उस इलाके की उपभोक्ता अदालत को माना जाएगा जहां मामला घटित हुआ है।
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