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ऑफशोर फंडों में निवेश सुस्त

ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Sep 22, 2017 09:52 PM IST

भारत-केंद्रित ऑफशोर फंडों और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) ने अगस्त में 14 करोड़ डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया जो 2017 में सबसे कम मासिक प्रवाह है।
जहां भारत-केंद्रित ऑफशोर फंडों को 17.9 करोड़ डॉलर का कुल निवेश प्राप्त हुआ वहीं ऑफशोर ईटीएफ में 3.9 करोड़ डॉलर की शुद्घ निकासी दर्ज की गई। यह रुझान विदेश पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की ताजा बिकवाली की प्रवृत्ति के अनुरूप है। अगस्त में एफपीआई ने लगभग 2 अरब डॉलर के भारतीय शेयरों की बिक्री की जबकि सितंबर के पहले पखवाड़े में लगभग 30.3 अरब डॉलर की बिक्री दर्ज की गई है। इस साल अब तक एफपीआई ने 6 अरब डॉलर से अधिक के शेयर खरीदे हैं।
म्युचुअल फंड ट्रैकर 'मॉर्निंगस्टार इंडिया द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'अच्छी बात यह है कि रकम अभी भी भारत-केंद्रित ऑफशोर ईटीएफ की तुलना में भारत-केंद्रित ऑफशोर फंडों में आ रही है जो दीर्घावधि के हैं।' पिछले एक साल के दौरान इन फंडों ने वित्तीय सेवा, कंज्यूमर साइक्लीकल्स और बेसिक मैटेरियल जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया। फार्मा और टेक्नोलॉजी में होल्डिंग 2.3 फीसदी और 1.7 फीसदी तक घटी है। मॉर्निंगस्टार का कहना है, 'उनका फोकस आर्थिक गतिविधि में तेजी और शहरी खपत मांग पर लगातार बना हुआ है। दरअसल, सेक्टर के लिए आवंटन के संदर्भ में उनका निवेश पैटर्न घरेलू फंड प्रबंधकों से बहुत ज्यादा अलग नहीं है।'
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन एशिया प्रशांत और उभरते बाजारों के फंडों दोनों के लिए बेहद पसंदीदा निवेश स्थान के तौर पर उभर है और इनके संभावित पोर्टफोलियो में इसका योगदान औसत लगभग 27 फीसदी और 23 फीसदी है।
एशिया पैसीफिक फंड्ïस के लिए दक्षिण कोरिया 12 फीसदी आवंटन के साथ दूसरा सबसे पसंदीदा स्थान था, जबकि भारत 11 फीसदी आवंटन के साथ तीसरे पायदान पर है। वहीं इमर्जिंग मार्केट्ïस फंडों के लिए भारत 10.1 फीसदी के आवंटन के साथ चौथा सबसे अधिक पसंदीदा निवेश स्थान था। ताईवान नंबर दो पर जबकि दक्षिण कोरिया इस मामले में नंबर 3 पर रहा है।
खासकर अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच गतिरोध बढऩे से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव से हाल के सप्ताहों में सभी वैश्विक बाजारों में बिकवाली बढ़ी है। उभरते बाजार ऐसी स्थिति में आमतौर पर ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि उन्हें ऐसे जोखिम को सहन करने के लिहाज से कमजोर समझा जाता है। मॉर्निंगस्टार ने कहा है, 'भारतीय शेयर बाजारों ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान अच्छा प्रदर्शन किया है। वैश्विक जोखिम को सहन करने की क्षमता के साथ साथ रुपये में तेजी ने भी विदेशी निवेशकों को मुनाफावसूली का अच्छा अवसर प्रदान किया है।'

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