होम » Investments
«वापस

ब्याज आय नहीं दिखाई तो बढ़ सकती है कठिनाई

तिनेश भसीन |  Sep 24, 2017 10:15 PM IST

नोटबंदी के बाद बैंक जमाओं के आंकड़े अब आय कर विभाग के पास पहुंच गए हैं। इसी के साथ विभाग ने बैंकों में सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) कराने वाले उन लोगों की छानबीन तेज कर दी है, जो रिटर्न भरते समय बैंकों से ब्याज के रूप में मिलने वाली आय को नहीं दिखाते हैं। कुछ लोग जान बूझ कर यह आय छिपाते होंगे, लेकिन ज्यादातर करदाता इस आय के बारे में रिटर्न में जानकारी देने में चूक करते हैं। इसकी वजह यह है कि इन लोगों को ब्याज आय पर लगने वाले करों के बारे में पता नहीं होता है। टैक्समैन डॉट कॉम के महाप्रबंधक नवीन वाधवा कहते हैं, 'सबसे बड़ी गलतफहमी आय को संलग्न करने के बारे में है। ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि पत्नी या बच्चों द्वारा अर्जित ब्याज की आय को कब अपनी आय के साथ जोडऩा चाहिए।' अगर पत्नी (गृहिणी है तो) या बच्चे के नाम पर फिक्स्ड डिपॉजिट है तो ब्याज आय पति कीआय के साथ जोड़ दी जाती है। इन्हें क्लबिंग प्रावधान कहते हैं। इनके तहत अगर सावधि जमाएं बच्चों या पत्नी के नाम पर हैं और जो किसी भी तरह के रोजगार से जुड़कर आय अर्जित नहीं कर रहे हैं, तो बैंक एफडी पर अर्जित ब्याज उस व्यक्ति को अपनी आय में शामिल करना होगा। अगर पत्नी काम कर रही है और आपने अगर उन्हें कुछ रकम उपहार में दी है, जिसे वह सावधि जमा में निवेश करती हैं तो इससे प्राप्त आय भी पति की आय में ही जोड़ी जाएगी। अगर पति एवं पत्नी दोनों कामकाजी हैं तो नाबालिग बच्चे के नाम वाली सावधि जमा पर प्राप्त आय माता-पिता में, जिसकी आय ज्यादा है, उसकी आमदनी में जोड़ी जाएगी। हालांकि अधिकतम दो संतान के लिहाज से प्रति संतान 1,500 रुपये सालाना छूट का भी प्रावधान है।

 

कई मामलों में लोग अपनी पत्नी, जो गृहिणी है, के नाम पर रकम जमा करते हैं। फिर वे फॉर्म 15 जी भरते हैं। इसमें यह घोषणा की जाती है कि जमाकर्ता की आय करयोग्य नहीं है। लेकिन कर विभाग इस तरह की कर वंचना का पता लगा सकता है और जमा के के साथ जुड़े स्थायी खाता संख्या (पैन) के आधार पर नोटिस जारी कर सकता है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो जमा राशि को छोटी रकम में विभाजित करते हैं और फिर इसे विभिन्न बैंकों में अपनी पत्नी के नाम से जमा कर देते हैं। जैसे 10 लाख रुपये एक ही जगह जमा कराने के बजाय दो-दो लाख करके 5 बैंकों में एफडी खुलवा लेंगे। इसके बाद वे कर देनदारी से बचने के लिए फॉर्म 15 जी भरते हैं। कर अधिकारी ऐसी जमाओं का भी आसानी से पता लगा सकते हैं। क्लीयरटैक्स डॉट इन के संस्थापक एवं सीईओ अर्चित गुप्ता कहते हैं, 'अगर आयकर विभाग को लगता है कि फॉर्म 15 जी का गलत इस्तेमाल हुआ है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ऐसे मामलों में अभियोजन के साथ-साथ जुर्माने का भी प्रावधान है।'

 

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अगर बैंक ने स्रोत पर कर कटौती की है तो ब्याज आय पर अतिरिक्त कर चुकाने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार ने रकम का पता लगाने के लिए स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) अनिवार्य कर रखी है। बैंक केवल 10 प्रतिशत टीडीएस काटते हैं। कर भरने वाली पोर्टल में फॉर्म 26एएस नाम से टीडीएस का दस्तावेज उपलब्ध है। किसी व्यक्ति की कर देनदारी तभी शून्य होती है जब वह सबसे निचली कर श्रेणी में आता हो और ब्याज करदाता की कुल आय में जोड़ा जाता हो। लेकिन अगर आप 20 या 30 प्रतिशत कर दायरे में हैं तो आपको रिटर्न भरते समय बकाया कर का भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए अगर आप 20 प्रतिशत कर दायरे में हैं तो अर्जित ब्याज पर आपको 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर का भुगतान करना होगा। इसके साथ ही अगर कोई व्यक्ति बचत खाते में ब्याज के रूप में 10,000 रुपये से अधिक की रकम प्राप्त करता है तो उस रकम पर भी कर लगेगा। कर बचाने के लिए किसी व्यक्ति को आय अर्जित नहीं करने वाले माता-पिता को रकम उपहार में दे देनी चाहिए, जो बाद में इसे बैंक में जमा कर सकते हैं। मगर यहां एक दिक्कत यह है कि माता-पिता के निधन की स्थिति में भाई-बहन इस जमा में हिस्सेदारी की मांग कर सकते हैं।
कीवर्ड income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान home,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक