होम » Investments
«वापस

सितंबर तिमाही में निराश कर सकती हैं आईटी कंपनियां

राम प्रसाद साहू |  Oct 08, 2017 10:12 PM IST

जुलाई-सितंबर की तिमाही को सामान्य तौर पर भारत की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं के लिए मजबूत माना जाता है, लेकिन इस साल की हाल में संपन्न हुई सितंबर तिमाही में अलग रुझान दिख सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर 2017 की तिमाही में मौद्रिक आधार पर प्रमुख पांच भारतीय आईटी कंपनियों के लिए राजस्व वृद्घि लगभग 2-3 फीसदी होगी, जिसे एक मजबूत समझी जाने वाली तिमाही में सुस्त प्रदर्शन माना जा सकता है। इसके अलावा, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (बीएफएसआई) जैसे प्रमुख वर्टिकलों के खर्च में संभावित सुधार जल्द दिखने की संभावना नहीं है जिससे वित्त वर्ष 2018 में इस सेक्टर की राजस्व वृद्घि प्रभावित हो सकती है।
विश्लेषक अन्य प्रमुख सेगमेंट रिटेल को लेकर भी सतर्क है। प्रमुख कंपनियों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा को 2.5-2.7 फीसदी की निरंतर मौद्रिक वृद्घि के साथ मदद मिल सकती है, वहीं विप्रो इस मामले में 0.6 फीसदी की वृद्घि के साथ पीछे रह सकती है।
जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों का कहना है कि सितंबर तिमाही में मौसम-केंद्रित वृद्घि की अभाव से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2018 की डॉलर राजस्व वृद्घि कई कंपनियों के लिए धीमी बनी रहेगी। उनका कहना है कि एक्सेंचर के लिए वित्त वर्ष 2018 के 2-2.5 फीसदी (वित्त वर्ष 2017 में 6 फीसदी की तुलना में) के अपेक्षाकृत कमजोर राजस्व वृद्घि के अनुमान से वित्त वर्ष 2018 की दूसरी छमाही में मांग में सुधार की संभावना को भी कम मदद मिली है।
निजी केंद्रों (ग्राहकों की घरेलू टीम) को कार्य के स्थानांतरण और खर्च में तेजी के अभाव को देखते हुए बीएफएसआई स्पेस से निराशा बनी रहेगी। ज्यादातर विश्लेषकों का मौजूदा समय में मानना है कि खर्च में कैलेंडर वर्ष 2018 से शुरू हो रहे अगले बजटिंग चक्र से ही तेजी संभव होगी और इसका असर मुख्य रूप से वित्त वर्ष 2019 में महसूस किया जाएगा। विश्लेषकों का कहना है कि प्रमुख भारतीय कंपनियों में टीसीएस पर अधिक प्रभाव दिखने का अनुमान है क्योंकि उसका 40 प्रतिशत राजस्व बीएफएसआई क्षेत्र से आता है।
जहां राजस्व वृद्घि धीमी रहेगी वहीं मार्जिन भी पारिश्रमिक वृद्घि से प्रभावित होने की आशंका है। मार्जिन पर इसका अनुमानित रूप से प्रभाव 50-150 आधार अंक के बीच पड़ सकता है।
बड़ी आईटी कंपनियों में ज्यादातर अपने अनुमान को बरकरार रखने में सफल रह सकती हैं, लेकिन नेतृत्व बदलावों को देखते हुए कुछ ब्रोकरों का मानना है कि इन्फोसिस अपने वित्त वर्ष 2018 की राजस्व वृद्घि के अनुमान को 6.5-8.5 फीसदी से 50-100 आधार अंक तक घटाकर 5.5-6/ 7.5-8 फीसदी के दायरे में ला सकती है। हालांकि कुछ अन्य ब्रोकरों का कहना है कि अनुबंधों की दीर्घावधि प्रवृतित को देखते हुए वृद्घि की रफ्तार प्रभावित नहीं हो सकती है।
एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि विश्लेषकों डिजिटल सेवाओं की राजस्व वृद्घि, प्रमुख वर्टिकलों में ग्राहक खर्च, इन्फोसिस नेतृत्व और रणनीतिक रूपरेखा, मूल्य निर्धारण और सौदे की रूपरेखा आदि पर नजर बनाए रखेंगे।
हालांकि कुछ सकारात्मक बदलाव भी हैं। इस सेक्टर में सकारात्मक बदलाव मुद्रा को लेकर है। डॉलर के मुकाबले ब्रिटिश पौंड और यूरो में तेजी आई है। प्रभाव या वृद्घि 80-160 आधार अंक के बीच अनुमानित है। हालांकि डॉलर की तुलना में रुपया गिरा है, लेकिन इसका प्रभाव सितंबर तिमाही में 64.6 रुपये (जून तिमाही में 64.4 रुपये की तुलना में) को देखते हुए बहुत ज्यादा नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि कितनी भारतीय आईटी कंपनियां कर्मचारी इस्तेमाल और बिक्री तथा प्रशासनिक खर्च के मोर्चों पर दबाव बना सकती हैं। पिछले
समय में कुछ लाभ हासिल हुआ क्योंकि कंपनियां कर्मचारी इस्तेमाल में सुधार लाने में सक्षम रही थीं।
सितंबर तिमाही के साथ साथ वित्त वर्ष 2018 में धीमे प्रदर्शन के बावजूद आईटी कंपनियों के शेयरों पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं दिखा क्योंकि वे पहले से ही बीएसई आईटी सूचकांक के अनुरूप बने हुए हैं। आईटी सूचकांक में इस साल अब तक बीएसई के सेंसेक्स के मुकाबले 20 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि सस्ते मूल्यांकन (वित्त वर्ष 2019 के अनुमानों का 13-17 गुना) और 5-7 फीसदी के मुक्त नकदी प्रवाह से शेयर कीमतों को मदद मिलेगी।

कीवर्ड IT, Shares, querter,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक