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सेल : ज्यादा फायदे के नहीं दिख रहे आसार

उज्ज्वल जौहरी |  Oct 08, 2017 10:12 PM IST

विश्‍लेषण

अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों के विपरीत सरकार के स्वामित्व वाली भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) वित्तीय प्रदर्शन और शेयर बाजार में, दोनों के संदर्भ में पीछे रही है। इसकी मुख्य वजह यह है कि अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए निजी कच्चे माल के स्रोत तक पहुंच के बावजूद कंपनी का परिचालन मुनाफा मार्जिन टाटा स्टील जैसी प्रतिस्पर्धियों के घरेलू परिचालन और जेएसडब्ल्यू स्टील के मुकाबले कमजोर बना हुआ है। दूसरी बात, कंपनी की क्षमता विस्तार योजनाओं में फिर से विलंब देखने को मिला है। इससे न सिर्फ धारणा प्रभावित हुई है बल्कि उसके वित्तीय प्रदर्शन पर भी दबाव (अधिक कर्ज और कम प्रतिफल अनुपात) देखने को मिला है। हालांकि इन हालात में अब कुछ हद तक बदलाव आने की संभावना है, लेकिन इसका फायदा लंबे समय में ही दिखने की संभावना है।

सेल के चेयरमैन ने शेयरधारकों की एक ताजा सालाना आम बैठक में कहा कि कंपनी अपने आधुनिकीकरण और विस्तार कार्यक्रम के अंतिम चरण में है। भिलाई (छत्तीसगढ़) में नया वैश्विक रेल कारखाना जनवरी में शुरू हो चुका है। राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी, ओडिशा) में नई ब्लास्ट फर्नेस ने 100 प्रतिशत क्षमता इस्तेमाल का लक्ष्य हासिल कर लिया है। आरएसपी में सेल की नई 30 लाख टन सालाना क्षमता वाली हॉट स्ट्रिप मिल वर्ष 2018 तक स्थापित किए जाने की योजना है और इससे मूल्यवर्धित उत्पादों का दायरा व्यापक होगा।

विस्तार पूरा होने के बाद सेल की बिक्री योग्य इस्पात क्षमता 2 करोड़ टन सालाना से अधिक हो जाएगी और क्रूड स्टील क्षमता वर्ष 2018 तक बढ़कर 2.14 करोड़ टन सालाना हो जाएगी जिससे कंपनी को देश की सबसे बड़ी इस्पात निर्माता का दर्जा फिर से हासिल करने में मदद मिलेगी। निवेशकों को इसे लेकर उम्मीद बढ़ेगी कि विलंब का शिकार हो चुकी विस्तार परियोजनाएं अब पूरी होंगी। इनमें लगातार विलंब से लाभ भी टल गया था। साथ ही परियोजनाओं की लागत भी लगातार बढ़ी है जिससे अधिक कर्ज को बढ़ावा मिला। विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2018 के अंत तक कर्ज बढ़कर 53,666 करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा।

बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों के नजरिये में स्पष्टï दिख चुकी हैं। उनका कहना है, 'शुद्ध कर्ज में इजाफा बरकरार रहेगा जिससे इक्विटी वैल्यू में कमी आएगी।' यही वजह है कि ये विश्लेषक सेल पर अपना सुस्त नजरिया बरकरार रखे हुए हैं।बढ़ते कर्ज से पता चलता है कि ब्याज लागत लगातार बढ़ रही है जिससे शुद्ध स्तर पर नुकसान को बढ़ावा मिला है। वित्त वर्ष 2015 तक सेल ने कर्ज भुगतान और शुद्ध लाभ के बाद पर्याप्त परिचालन मुनाफा हासिल किया। तब से परिचालन मुनाफा ब्याज और मूल्यह्रïास लागत को पूरा करने के लिहाज से पर्याप्त नहीं रहा है। इससे भी टाटा स्टील (भारतीय परिचालन) और जेएसडब्ल्यू स्टील के प्रदर्शन की तुलना में बड़ा अंतर देखने को मिला है।

उदाहरण के लिए, फरवरी 2016 में सरकार द्वारा अन्य उपायों के साथ साथ इस्पात आयात पर न्यूनतम आयात कीमत (एमआईपी) के लागू होने के बाद प्राप्तियों में सुधार दिखा है। इससे उद्योग को वित्त वर्ष 2016 के अपने एक दशक नीचे के उपयोगिता स्तर से सुधरने में मदद मिली है। सेल को अपने प्रति टन एबिटा में सुधार आदि का भी लाभ मिला। उसका प्रति टन एबिटा वित्त वर्ष 2017 की अप्रैल-सितंबर अवधि में बढ़ा, लेकिन बढ़ती कोयला लागत और कर्मचारी खर्च ने दिसंबर 2016 की तिमाही से परिचालन लाभ पर दबाव पैदा किया।

हालांकि जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील को लागत दबाव का भी सामना करना पड़ा है, लेकिन उन्होंने मुनाफे में सुधार भी दर्ज किया है। इन कंपनियों ने क्षमता वृद्घि पूरी की है और इसमें और इजाफा करने में लगी हुई हैं। यही वजह है कि ये दोनों कंपनियां विश्लेषकों की पसंदीदा बनी हुई हैं। सेल का कहना है कि वह ऊर्जा-कुशल प्रक्रियाओं के जरिये उत्पादन में बदलाव लाकर मुनाफा बढ़ाने की प्रक्रिया से गुजर रही है। कंपनी ने अतिरिक्त बिक्री और नए उत्पादों के जरिये बाजार भागीदारी बढ़ाने और फिनिश्ड स्टील पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बनाई है। साथ ही कंपनी स्वेच्छिक सेवानिवृति योजना के जरिये कर्मचारी लागत घटाने के प्रयास भी कर रही है। इसलिए अब कंपनी की स्थिति में बड़ा सुधार आने की संभावना है। इस बीच, मांग में सुधार और चीन में आपूर्ति संबंधित उपायों के बावजूद इस्पात कीमतों में ताजा तेजी से सेल समेत घरेलू कंपनियों के मुनाफे में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।

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