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फंड ले रहे इक्विटी में दिलचस्पी

पुनीत वाधवा |  Oct 08, 2017 10:13 PM IST

आय में अच्छी तेजी के अभाव में इस वित्त वर्ष में अब तक (पहली छमाही) इक्विटी बाजार में तेजी को नकदी, खासकर म्युचुअल फंडों के निवेश से मदद मिली। म्युचुअल फंडों ने इस अवधि के दौरान लगभग 70,500 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह उनके द्वारा पिछले साल की समान अवधि में किए गए निवेश के मुकाबले पांच गुना अधिक है। हालांकि इसमें से ज्यादातर रकम मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंटों में आई, लेकिन विश्लेषकों ने अब इसे लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी है कि कॉरपोरेट आय में तेजी के अभाव और आर्थिक गतिविधि में मजबूत वृद्घि के बगैर यह तेज प्रवाह कब तक बना रह सकता है।
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज में अर्थशास्त्री और रणनीतिकार धनंजय सिन्हा और कृति शाह द्वारा तैयार की गई एमके ग्लोबल रिपोर्ट में कहा गया है कि इक्विटी म्युचुअल फंडों में मई 2014 से औसत मासिक प्रवाह बढ़ा है। इस पूंजी प्रवाह के लिए औसत लगभग 5500 करोड़ रुपये पर था और नोटबंदी के बाद यह बढ़कर 10,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया।
एमके के अनुसार ऐतिहासिक चक्रों से संकेत मिलता है कि म्युचुअल फंडों के प्रवाह में तेजी तीन साल से बरकरार है। लेकिन पिछले चक्रों के विपरीत, इस बार तेजी बुनियादी आधार में किसी बड़े सुधार के बगैर ही है।
एमके की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है, '1992-1996 की पिछली तेजी, डॉटकॉम बुलबुला और 2004-2008 की स्थिति से संकेत मिलता है कि गिरावट के चक्र के लिए कारक मुख्य रूप से वैश्विक बाजारों से पैदा होते हैं। हाई फ्रिक्वेंसी डेटा से संकेत मिलता है कि यदि एफआईआई लंबे समय तक शुद्घ बिकवाल बने रहते हैं तो इससे बाजार मूल्यांकन, खासकर मिड-कैप सूचकांक के लिए जोखिम पैदा हो जाएगा और इससे एमएफ प्रवाह के रिडम्पशन में तेजी आ सकती है।' 
दूसरी तरफ, कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के कार्यकारी निदेशक एवं सह-प्रमुख संजीव प्रसाद का मानना है कि पिछले 6-12 महीनों के दौरान भारतीय बाजारों के मजबूत प्रतिफल से खुदरा निवेशकों की उम्मीदें बढ़ सकती हैं और यह उन कारणों में से एक हो सकता है जो इक्विटी म्युचुअल फंडों में ताजा बड़े निवेश से संबंधित हैं।
इसके अलावा प्रसाद का यह भी मानना है कि ऊंची घरेलू वित्तीय बचत घरेलू इक्विटी म्युचुअल फंडों में बड़े खुदरा निवेश प्रवाह का प्रमुख वाहक हो सकती है।
एमके की रिपोर्ट में कहा गया है, 'हमारे विश्लेषण से इक्विटी और डिबेंचर्स में हाउसहोल्ड (एचएच) बचत के अनुपात और बाजार मूल्यांकन के बीच उच्च संबंध (0.82) का पता चलता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इक्विटी बाजारों में एचएच भागीदारी के पीक लेवल (1992-1996) में इक्विटी और डिबेंचर/ एचएच बचत का अनुपात बढ़कर 10 के औसत पर पहुंच गया और पीई अनुपात का औसत 35 गुना पर रहा। मूल्यांकन में गिरावट की अवधियों में एचएच भागीदारी घटकर कुल बचत के 1.5 प्रतिशत के औसत पर रह गई।'
कोटक के प्रसाद के अनुसार इक्विटी में बड़ा पूंजी प्रवाह तब तक बना रह सकता है जब तक कि छोटे निवेशकों की अच्छे प्रतिफल की उम्मीदें इन तथ्यों को लेकर नहीं बदल जातीं - (1) शेयर बाजार से कमजोर प्रतिफल की अवधि, जिससे छोटे निवेशकों की उम्मीदों (प्रतिफल की संभावित दर) में बदलाव आएगा और/या (2) अन्य परिसंपत्ति वर्गों से अच्छे प्रतिफल की अवधि, जिससे छोटे निवेशकों की अपेक्षित दर बढ़ेगी। हालांकि उनका यह भी कहना है कि बाजार आय वृद्घि और बुनियादी आधार के हिसाब से प्रतिफल हमेशा नहीं दे सकता।

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