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ईपीएफओ निवेश में सुस्त रवैये का नहीं रहा जमाना

संजय कुमार सिंह |  Oct 15, 2017 07:19 PM IST

पिछले कुछ वर्षों में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) शेयरों में अपना निवेश बढ़ाता जा रहा है। इस साल यह अपने कोष का 15 प्रतिशत हिस्सा शेयरों में लगाएगा और बाकी रकम स्थिर आय योजनाओं में लगाई जाएगी। नई खबर यह है कि ईपीएफओ निवेशकों को शेयरों में लगाई गई उनकी रकम के एवज में यूनिट आवंटित कर सकता है। संगठन इस बात पर विचार कर रहा है कि जिसकी जितनी रकम शेयरों में लगाई जाए, उसे उतनी ही यूनिट दे दी जाएं। संगठन व्यक्तिगत निवेशकों को उनके ईपीएफ खाते में जमा रकम का 15 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा शेयरों में लगाने की अनुमति देने के बारे में भी विचार कर रहा है। लेकिन इन सुझावों को ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की इजाजत चाहिए। बहरहाल निवेशकों को यह समझ लेना चाहिए कि अभी तक स्थिर प्रतिफल देने वाले पीएफ पर इन बदलावों का क्या असर पड़ेगा।


शेयरों में निवेश को यूनिट में बदलना
 
विशेषज्ञों का कहना है कि ईपीएफओ को शेयरों में निवेश करते हुए दो वर्ष से भी अधिक समय हो चुका है, लेकिन इस बात पर अभी तक सर्वसम्मति नहीं बन पाई है कि मुनाफे को निवेशकों तक किस तरह पहुंचाया जाए। अब निर्णय लिया गया है कि इसके लिए प्रत्येक सदस्य को यूनिट आवंटित की जाएंगी। शेयरों में आपके निवेश तथा ईपीएफओ के पास मौजूद एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) की कीमत के मुताबिक वर्ष के अंत में प्रत्येक निवेशक को यूनिट बांटी जाएंगी और उनके खाते के विवरण में यह सब दर्ज किया जाएगा।
 
जब भी कोई सदस्य अपनी रकम निकालना चाहेगा तो ईपीएफओ संभवत: उसके पास मौजूद यूनिट को उस दिन की कीमत के हिसाब से भुना देगा। हो सकता है कि निवेशकों को ईटीएफ यूनिट नहीं सौंपी जाएं क्योंकि उसके लिए डीमैट खाता जरूरी होगा। जानकारों का कहना है कि यूनिट आवंटित करने की पहल अब टाली नहीं जा सकती। सेबी के साथ पंजीकृत निवेश सलाहकार पर्र्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन के दीपेश राघव कहते हैं,'जब किसी कोष की 15 प्रतिशत रकम आपने शेयरों में आवंटित कर दी है तो उस योजना में आप तयशुदा प्रतिफल ही नहीं देते रह सकते क्योंकि शेयरों से मिलने वाला प्रतिफल घटता-बढ़ता रह सकता है। कभी न कभी इससे गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।' राघव का कहना है कि यह बदलाव लागू करने के बाद ईपीएफओ स्थिर आय वाले हिस्से यानी 85 प्रतिशत आय पर तयशुदा प्रतिफल देता रह सकता है और शेयरों वाले हिस्से पर प्रतिफल ऊपर-नीचे हो सकता है।
 
समझ लें खूबियां और खामियां
 
शेयरों में लगाई गई रकम के बदले यूनिट आवंटित किए जाने का नतीजा सकारात्मक भी होगा और नकारात्मक भी। आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल कहते हैं, 'इस बदलाव का सकारात्मक पक्ष यह है कि सदस्य अब उस रकम से होने वाले लाभ के आंशिक स्वामी बन जाएंगे, जो रकम ईपीएफओ ने ईटीएफ में लगाई है।' नकारात्मक पहलू यह है कि ईपीएफओ हर साल जिस प्रतिफल (आगे से केवल 85 फीसदी रकम पर ही मिलेगा) की घोषणा करता है, उसमें कमी आ जाएगी क्योंकि शेयरों से मिलने वाला नाम मात्र का लाभ उस दर में नहीं जोड़ा जाएगा। बहरहाल इस बदलाव के कारण निवेशक ईपीएफ में मौजूद अपनी रकम से बेहतर प्रतिफल हासिल कर सकते हैं। मुंबई में वित्तीय योजनाकार अर्णव पंड्या कहते हैं, 'रकम का हिस्सा स्पष्टï रूप से शेयरों में लगाए जाने के कारण निवेशकों को बेहतर प्रतिफल हासिल हो सकता है।'
 
लेकिन एक पेच यह भी है कि शेयर बाजार की भारी अनिश्चितता अब ईपीएफ में मौजूद निवेशकों की रकम पर भी सीधा असर डाल सकती है। अगर लंबी अवधि की बात करें तो शेयरों से मिलने वाला प्रतिफल बॉन्ड प्रतिफल की तुलना में अधिक ही होता है, लेकिन साल दर साल इसमें बहुत अंतर हो सकता है। नागपाल कहते हैं, 'सीधी बात यह है कि गारंटीशुदा प्रतिफल (स्पष्टï सरकारी गारंटी) वाली योजना को बाजार से जुड़ी योजना बनाया जा रहा है।' जो निवेशक जोखिम लेना बिल्कुल भी पसंद नहीं करते और तयशुदा प्रतिफल के आदी हैं, उन्हें नई व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाना पड़ेगा।
 
जिन निवेशकों की सेवानिवृत्ति नजदीक है, उन्हें इस योजना से दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जब कोई सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचता है तो आम तौर पर वित्तीय सलाहकार उसे शेयरों से निकलकर डेट योजनाओं में निवेश बढ़ाने के लिए कहते हैं क्योंकि शेयर बाजार बहुत उतार-चढ़ाव भरे होते हैं। इससे सुनिश्चित हो जाता है कि अंतिम समय में शेयर बाजर में गिरावट आने पर भी सेवानिवृत्ति कोष पूरी तरह से सुरक्षित रहे। अगर ईपीएफओ डेट और इक्विटी में 85:15 के अनुपात को स्थायी बना देता है तो दिक्कत हो सकती है। पंड्या कहते हैं, 'इससे होने वाले खतरे से निपटने का कोई भी तरीका इस समय नहीं है। जब बारीकियों का खुलासा किया जाएगा तब हालात बदल सकते हैं।' ईपीएफओ ने इस जोखिम से निपटने के लिए यह प्रस्ताव रखा है कि सेवानिवृत्त होने के बाद निवेशकों को कुछ समय ठहरकर यूनिट भुनाने की इजाजत दे दी जाए।
 
शेयरों में अधिक आवंटन
 
ईपीएफओ निवेशकों को शेयरों में अधिक मात्रा (15 प्रतिशत से अधिक) में निवेश का विकल्प देने पर भी विचार कर रहा है। जिन निवेशकों को जोखिम लेने में कोई एतराज नहीं है, वे इस कदम का स्वागत करेंगे। ईपीएफ में निवेश चूंकि लंबी अवधि के लिए होता है, इसलिए शेयरों में बीच में आए उतार-चढ़ाव से निपटने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए और हो सकता है कि उन्हें ज्यादा प्रतिफल भी हासिल हो जाए। जो निवेशक जोखिम लेने से परहेज करते हैं, उन्हें शेयरों में न्यूनतम सीमा से अधिक आवंटन भी नहीं करना चाहिए।
 
अंत में इन बदलावों को देखकर कहा जा सकता है कि ईपीएफ में सुस्ती के साथ निवेश करने के दिन अब लद गए हैं। पंड्या कहते हैं, 'निवेशकों को अब फैसला करना होगा कि उन्हें शेयरों में कितना निवेश करना है, सेवानिवृत्ति के समय रकम निकालनी चाहिए या नहीं या बाजार में स्थितियां सुधरने का इंतजार करना चाहिए। इनके संबंध में निर्णय लेने से पहले जानकारी की जरूरत होती है। ईपीएफ के उपभोक्ताओं को जागरूक बनना पड़ेगा।'
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