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आवास ऋण की नई योजना, लेकिन ब्याज दर ठीक से देखना

संजय कुमार सिंह |  Oct 15, 2017 07:20 PM IST

देश में आवास ऋण के ग्राहक काफी डरे हुए हैं। आवास ऋण पर चुकाए गए ब्याज पर आयकर अधिनियम की धारा 24 के तहत 2 लाख रुपये सालाना और मूलधन पर धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये सालाना की कर छूट मिलने के बाद भी वे अपना आवास ऋण तय मियाद से पहले ही खत्म करना पसंद करते हैं। उद्योग का अनुमान है कि आवास ऋण औसतन 8 से 10 वर्ष के भीतर पूरी तरह चुका दिया जाता है।

 
ऐसी सूरत में आईसीआईसीआई बैंक एकदम नई योजना लेकर आया है, जिसमें 15 से 30 वर्ष तक की अवधि वाले आवास ऋण पर ग्राहकों को कैश बैक मिल रहा है। उन्हें प्रत्येक मासिक किस्त (ईएमआई) पर 1 फीसदी कैशबैक दिया जा रहा है, जो वाकई दिलचस्प है। लेकिन यह फायदा ग्राहकों को एक ही शर्त पर मिल सकता है - न तो वे कर्ज तय मियाद से पहले खत्म करेंगे और न ही किसी दूसरे बैंक में कर्ज ले जाएंगे।
 
अगर 15 वर्ष के लिए 8.35 फीसदी की ब्याज दर पर 20 लाख रुपये का कर्ज लिया जाता है तो ग्राहक को कुल 35,134 रुपये की बचत हो जाएगी। अगर यही कर्ज 30 वर्ष के लिए लिया जाता है तो 55,361 रुपये तक की बचत हो सकती है। पैसाबाजार डॉटकॉम के मुख्य कार्याधिकारी एवं सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा कहते हैं, 'आवास ऋण लेने वाले नए ग्राहक कैशबैक योजना लेते हैं तो उनके लिए ब्याज की असल दर 10 से 20 आधार अंक कम हो सकती है।'
 
ग्राहक दो तरह से इस कैशबैक ऑफर का लाभ उठा सकते हैं: या तो इसका इस्तेमाल बकाया मूलधन घटाने में किया जा सकता है या ग्राहक इसे अपने बैंक खाते में डाल सकते हैं और किसी और काम के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। कुकरेजा के अनुसार यदि कोई ग्राहक कैशबैक में मिली रकम का इस्तेमाल कर्ज की बकाया मूल राशि कम करने के लिए करता है तो कर्ज की पूरी अवधि के दौरान ब्याज पर होने वाला उसका खर्च ठीकठाक घट जाएगा। उदाहरण के लिए यदि 30 वर्ष की अवधि के लिए 8.35 फीसदी की ब्याज दर से कुल 30 लाख रुपये का आवास ऋण लिया जाता है तो उसकी ईएमआई पर मिलने वाले कैशबैक की मदद से मूल राशि कम कर ग्राहक 30 वर्ष में तकरीबन 3.2 लाख रुपये बचा सकता है। लेकिन अगर वह इस रकम को सीधे अपने बैंक खाते में डलवा लेता है तो 30 वर्ष में वह केवल 80,000 रुपये ही बचा पाएगा।
 
ईएमआई पर कैशबैक कर्जदार को सीधे नहीं सौंपा जाएगा। पहली बार कैशबैक 36वीं ईएमआई जमा होने के बाद यानी तीन वर्ष बाद ही मिलेगा। उसके बाद 12-12 ईएमआई पूरी होने पर यानी 1-1 साल बाद कैशबैक मिलता रहेगा। यदि कोई ग्राहक इस योजना को लेने की सोच रहा है तो उसे पहले गंभीरता से देखना चाहिए कि उसके लिए कितनी ब्याज दर तय की जा रही है। निवेश सलाहकार हर्ष रूंगटा कहते हैं, 'अच्छे ग्राहक को इस समय 8.35 से 8.40 फीसदी की ब्याज दर पर आवास ऋण मिल सकता है। आईसीआईसीआई बैंक ब्याज की जो दर बता रहा है, उसकी तुलना दूसरे बैंकों की ब्याज दर से की जानी चाहिए। उसके बाद यदि उसे लगता है कि आईसीआईसीआई बैंक की ब्याज दर ही सबसे अच्छी है और उसके ऊपर कैशबैक भी मिल रहा है तो उसे यह मौका लपक लेना चाहिए। 
 
लेकिन अगर उसे ऊंची ब्याज दर बताई जा रही है और कैशबैक मिलने के बाद भी ब्याज की दर दूसरे बैंकों की ब्याज दर के बराबर ही बैठ रही है तो उसे दूसरे बैंक से कर्ज लेने के बारे में सोचना चाहिए।' कर्ज लेने वाले ग्राहक को यह ध्यान में रखना चाहिए कि आईसीआईसीआई बैंक से मिलने वाला फायदा तुरंत नहीं बल्कि निश्चित अवधि के बाद ही मिलता है। रूंगटा का कहना है, 'यदि आपको शुरू से ही कम ब्याज दर वाला आवास ऋण मिल जाता है तो उसी को चुनना चाहिए।' आईसीआईसीआई बैंक के आवास ऋणों पर ब्याज दरें 8.35 फीसदी से शुरू हो रही हैं और कई कारकों के अनुसार बढ़ती जाती हैं। कारकों में बैंक देखता है कि ऋण की राशि कितनी है, ग्राहक स्त्री है या पुरुष, फिक्स्ड राशि है या फ्लोटिंग, कर्ज लेने वाला वेतनभोगी है या उसका अपना रोजगार है।
 
आम तौर पर पुराने ग्राहकों को अपने आवास ऋण पर नए ग्राहकों के मुकाबले अधिक दर से ब्याज चुकाना पड़ रहा है। ब्याज दर ऊंची हो तो पुराना ग्राहक केवल यही कर सकता है कि अपना कर्ज किसी दूसरे बैंक में स्थानांतरित करा ले। सेबी के साथ पंजीकृत निवेश सलाहकार (आरआईए) पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'इस तरह की योजना का मकसद ऋण को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने से रोकना है। यदि आप तीन साल से पहले ही अपना कर्ज कहीं और ले जाते हैं तो आपको तब तक जमा हुआ आपका कैशबैक नहीं मिल पाएगा।' कुकरेजा कहते हैं कि तमाम भारतीय कर्जदारों की तरह अगर ग्राहक अपना कर्ज वक्त से पहले चुका देता है तो भी उसे कैशबैक नहीं मिल पाएगा।
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