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इधर नौकरी बदली, उधर ईपीएफ भी ट्रांसफर

तिनेश भसीन |  Oct 20, 2017 07:10 PM IST

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने किसी भी कर्मचारी की भविष्य निधि (पीएफ) एक नियोक्ता के पास से दूसरे नियोक्ता के पास स्थानांतरित करना बेहद आसान और झंझटरहित बना दिया है। अब जैसे ही कोई कर्मचारी नौकरी बदलेगा, वैसे ही उसका पीएफ खुद ही नए नियोक्ता के पास पहुंच जाएगा। इसके लिए उसे केवल फॉर्म-11 भरना पड़ेगा। ईपीएफओ ने यह नया फॉर्म जारी किया है।

 
स्वतंत्र भविष्य निधि सलाहकार संजय वर्मा का कहना है, 'नए कर्मचारियों को केवल इतना करना है कि नए नियोक्ता को फॉर्म-11 में भरकर जरूरी जानकारी मुहैया करानी है। नया नियोक्ता उस फॉर्म को ईपीएफओ के पास भेज देगा। इसके साथ ही भविष्य निधि को पुरानी कंपनी से नई कंपनी में भेजे जाने की प्रक्रिया खुद ही चालू हो जाएगी। इस प्रक्रिया में दोनों कंपनियां और ईपीएफओ को काम करना पड़ता है। कर्मचारी को कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ती।'
 
लेकिन पीएफ की रकम खुद-ब-खुद नए नियोक्ता के पास जाने की सुविधा उन्हीं कर्मचारियों के लिए मुहैया कराई जाएगी, जिनके पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) होगा। यूएएन की सुविधा 2014 में शुरू की गई थी। इसमें कर्मचारी के आधार का ब्योरा, जन्मतिथि, बैंक खाते की जानकारी और नियोक्ता का पूरा विवरण पहले से ही भर दिया गया है। जब नया नियोक्ता फॉर्म-11 अपलोड करता है तो दिए गए विवरण का सत्यापन किया जाता है और उसके बाद पीएफ के स्थानांतरण का काम शुरू हो जाता है। उसी समय कर्मचारी को भी उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस मिलेगा, जिसमें बताया जाएगा कि स्वत: स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एसएमएस भेजने के बाद ईपीएफओ 10 दिन तक इंतजार करेगा कि कहीं कर्मचारी स्थानांतरण रुकवाने के लिए दरख्वास्त तो नहीं करने जा रहा है। उसके बाद ही वह स्थानांतरण की प्रक्रिया आरंभ करेगा। सही मायनों में स्थानांतरण तब शुरू होगा, जब नया नियोक्ता ईपीएफ खाते में पीएफ की पहली किस्त जमा करेगा। जब रकम स्थानांतरित होने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो उसकी सूचना भी भेजी जाती है।
 
कर्मचारी को यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि नौकरी छोडऩे से पहले ही यूएएन को एक्टिवेट करा दिया जाए और नियोक्ता द्वारा उसका सत्यापन भी कर दिया जाए। आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल कहते हैं, 'ईपीएफओ ने तमाम तरह की ऑनलाइन सेवाएं शुरू की हैं। इनमें से किसी भी सेवा का फायदा उठाने के लिए कर्मचारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि आधार ईपीएफ खाते से जोड़ दिदया गया हो और यूएएन भी एक्टिवेट कर दिया गया हो।' यूएएन 12 अंकों का क्रमांक होता है, जिसे ईपीएफओ किसी भी कर्मचारी के नाम पर जारी करता है और यह क्रमांक सेवानिवृत्ति तक बदलता नहीं है, चाहे कर्मचारी बीच में कितनी भी नौकरियां बदल ले। वर्ष 2014 से ही यूएएन को अनिवार्य कर दिया गया है। जब ईपीएफओ से यूएएन मिल जाता है तो नियोक्ता केवाईसी सत्यापन करता है। 
 
इसके बाद कर्मचारी को ईपीएफओ की वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होता है, सभी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं और उस क्रमांक को एक्टिवेट भी कराना पड़ता है। जब फॉर्म-11 नहीं लाया गया था, उस समय यदि कोई कर्मचारी अपनी भविष्य निधि को किसी नए नियोक्ता के पास स्थानांतरित करना चाहता था तो उसे प्रक्रिया आरंभ कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र भरना पड़ता था। कर्मचारी को ईपीएफओ के ऑनलाइन ट्रांसफर क्लेम पोर्टल पर जाना होता था और स्थानांतरण से जुड़ा ब्योरा मुहैया कराना पड़ता था। विशेषज्ञों के अनुसार कई बार ऐसा भी हुआ है कि स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकी और कर्मचारी के नाम पर दो-दो यूएएन हो गए। इससे नया पचड़ा शुरू हो जाता था और कर्मचारी को ईपीएफओ के पास नई दरख्वास्त डालनी पड़ती थी ताकि दोनों यूएएन को मिलाकर एक किया जा सके। यदि नियोक्ता के पास डिजिटल हस्ताक्षर नहीं होता था तब भी ऑनलाइन स्थानांतरण शुरू नहीं हो पाता था क्योंकि यह हस्ताक्षर अब अनिवार्य है। यदि किसी व्यक्ति के पास यूएएन नहीं है या यूएएन का सत्यापन नहीं किया गया है या ईपीएफओ ने ऑनलाइन स्थानांतरण की उसकी अर्जी खारिज कर दी है तो उसे पहले से चली आ रही प्रक्रिया को ही अपनाना पड़ेगा। उस सूरत में उसे फॉर्म-13 भरना पड़ेगा, अपने पिछले नियोक्ता से उस पर दस्तखत कराने पड़ेंगे और उसे अपने नए नियोक्ता के पास जमा कराना पड़ेगा। संजय वर्मा का कहना है कि यह प्रक्रिया बहुत उबाऊ होती है और इसमें छह महीने से लेकर दो वर्ष तक का समय लग सकता है।
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