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रिलायंस जियो की दर वृद्घि से प्रतिस्पर्धियों को मिलेगी राहत

राम प्रसाद साहू |  Oct 22, 2017 09:54 PM IST

रिलायंस जियो (आरजियो) द्वारा दरों में संशोधन दूरसंचार क्षेत्र के लिए सकारात्मक है और इससे कंपनियों पर दबाव कुछ कम होगा। आरजियो द्वारा कीमतों में संशोधन में वैधता अवधि में कमी भी शामिल है। आरजियो ने अपने 399 रुपये के प्लान की वैधता अवधि 84 दिन से घटाकर 70 दिन कर दी है और 399 रुपये के प्लान में मिलने वाले लाभ के साथ ही 459 रुपये का नया प्लान पेश किया है। 

 
नया प्लान पिछले प्लान की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक महंगा है। रिलायंस जियो के लिए 1 अप्रैल 2017 से शुल्क सेवाओं की घोषणा के बाद कीमतों में यह दूसरा संशोधन (वृद्घि) है। पिछली बार संशोधन से कंपनी का प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) 35 फीसदी तक बढ़कर 121 रुपये पर पहुंच गया था। यह दूरसंचार कंपनियों के 134 रुपये (आइडिया) और 158 रुपये (एयरटेल) के वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही के एआरपीयू की तुलना में 20 फीसदी कम था। कीमतों में ताजा वृद्घि से रिलायंस जियो और अन्य दूरसंचार कंपनियों के बीच अंतर कुछ कम हुआ है।
 
विश्लेषकों का कहना है कि कीमत संशोधन इस सेक्टर में सकारात्मक रुझान है और इससे कंपनियों को दबाव कम करने में मदद मिलेगी। एक विदेशी ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा कि स्पेक्ट्रम, प्रौद्योगिकी, नेटवर्क और उत्पाद पेशकश में रिलायंस जियो की ताकत को देखते हुए कंपनी के लिए कई और कीमत वृद्घि करने की पर्याप्त गुंजाइश होगी। ऐम्बिट के विवेकानंद सुब्बारामन ने ताजा दर वृद्घि से पहले एक रिपोर्ट में कहा था कि जियो के एआरपीयू नजरिये पर निवेशकों की उम्मीद गलत है क्योंकि कंपनी अंडरकटिंग की अपनी रणनीति के साथ डेटा बाजार में बेहद सफल रही है। उसकी 4जी-एलटीई हैंडसेट उपभोक्ताओं की 85 प्रतिशत की हिस्सेदारी है क्योंकि उसकी शानदार डेटा पेशकश (1जीबी/ प्रति दिन और अनलिमिटेड वॉइस) 110-120 रुपये पर (प्रतिस्पर्धियों की तुलना में) बेहद प्रभावशाली है।
 
कंपनी ने कई अन्य बदलाव भी किए हैं। इंटरकनेक्ट इस्तेमाल शुल्क घटाकर 1 अक्टूबर 2017 से 14 पैसे प्रति मिनट से 6 पैसे प्रति मिनट किए जाने से भी उसे अपना बाजार बढ़ाने का मौका मिलेगा। यदि कंपनी वैधता घटाकर दरें बरकरार रखती है या बढ़ाती है तो यह रिलायंस जियो के लिए राजस्व और परिचालन मुनाफा स्तर दोनों के संदर्भ में फायदेमंद होगा। कंपनी ने सितंबर में समापत हुई तिमाही में 156 रुपये के एआरपीयू पर 6,174 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया और उसे ताजा दर वृद्घि और ग्राहकों के मौजूदा प्लान के बजाय उसके अधिक कीमत वाले प्लान को अपनाए जाने से राजस्व में इजाफा करने में मदद मिलेगी। हालांकि नए टैरिफ प्लान इस सेक्टर और दूरसंचार कंपनियों के लिए सकारात्मक हैं, लेकिन अल्पावधि में चिंता उसके 4जी फीचर फोन के लिए प्रमोशनल टैरिफ को लेकर रहेगी। 
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