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ऑनलाइन आयकर नोटिस का दीजिए घर बैठे जवाब

तिनेश भसीन |  Oct 22, 2017 09:56 PM IST

कागजरहित आकलन (पेपरलेस असेसमेंट) को प्रायोगिक स्तर पर सफलता मिलने के बाद अब केंद्रीय प्रत्यक्ष बोर्ड (सीबीडीटी) इसे पूरी तरह शुरू करना चाहता है। उसने इसी वित्त वर्ष के अंत तक पूरे देश में कागजरहित आकलन शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद आयकर विभाग से नोटिस मिलने पर करदाता के सामने दो विकल्प होंगे। वे नोटिस का जवाब घर बैठे ई-मेल के जरिये भी दे सकेंगे और विभाग के कार्यालय जाकर हाथ से लिखित जवाब भी दे सकेंगे।

 
पीडब्ल्यूसी में पार्टनर एवं लीडर कुलदीप कुमार कहते हैं, 'ऑनलाइन कार्यवाही और आकलन की प्रक्रिया से करदाताओं का समय बच जाएगा क्योंकि वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय नोटिस का जवाब दे सकेंगे। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टïाचार पर अंकुश भी लगेगा। आकलन अधिकारी आवश्यक कागजात ही मांगेंगे क्योंकि प्रक्रिया ऑनलाइन होने से सारी बातें पहले ही स्पष्टï रहेंगी। 
 
नोटिस पंजीकृत ई-मेल पर भेजे जाते हैं और करदाता को उनके मोबाइल फोन पर अलर्ट भी मिलता है। अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन जवाब देना चाहता है तो उसे ई-फाइलिंग पोर्टल में लॉग इन करना होगा और नोटिस और उसके साथ जुड़ी प्रश्नावली तक पहुंचने के लिए ई-प्रसीडिंग टैब पर क्लिक करना होगा। नोटिस के आधार पर करदाता को कुछ सवालों के जवाब देने होंगे और संबंधित कागजात अपलोड करने होंगे।
 
करदाता नोटिस का जवाब ई-फाइलिंग वेबसाइट देने का विकल्प चुनता है तो उसे  उसे तेजी से जवाब देना होगा। नोटिस का जवाब निश्चित समय के भीतर ही देना पड़ता है। आईटी विभाग ने यह कवायद ई-फाइलिंग पोर्टल के साथ ही जोड़ दी है। दूसरे शब्दों में कहें तो कर आकलन कार्यालय की सभी टिप्पणी और मांग करदाता के खाते में दिखेगी और वह कार्यवाही के दौरान किसी भी वक्त ऑनलाइन हो सकता है। 
 
ऑनलाइन माध्यम के अलावा करदाता ई-मेल का विकल्प भी चुन सकते हैं और इसके माध्यम से कर अधिकारी को उसके सवालों के जवाब दे सकते हैं। ई-मेल के जरिये कागजात पीडीएफ फॉर्मेट में भेजा जाना चाहिए और इनका आकार 10 मेगाबाइट से अधिक नहीं होना चाहिए। आकार अधिक होने पर करदाता एक से अधिक ई-मेल भेज सकते हैं। जवाब तैयार करते वक्त कागजात का क्रमांक लिखें और नोटिस में पूछे गए सवाल का जिक्र जरूर करें।
 
फिलहाल ऑनलाइन आकलन प्रणाली के तहत अभी करदाता नोटिस के जवाब ही दे पाते हैं। लेकिन आय कर विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में सरकार इसमें कुछ और जोड़ा जाएगा। अनुच्छेछ 143 (1) (ए) से जुड़े नोटिस के लिए ऑनलाइन कार्यवाही अनिवार्य है। ऐसे नोटिस तब भेजे जाते हैं, जब स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) कर देनदारी से मेल नहीं खाती है। एचऐंडआर ब्लॉक इंडिया में कर अनुसंधान प्रमुख चेतन चंडक कहते हैं, 'फॉर्म 16, फॉर्म 16 एक या फॉर्म 26 ए जैसा मामला यहां नहीं है। जब कोई व्यक्ति 10 लाख रुपये से अधिक कीमत की कार खरीदता है या संपत्ति बेचता है और खरीदार 1 फीसदी टीडीएस जमा करता है तो सरकार स्रोत पर वसूले गए कर की जांच भी करती है।'
 
अनुच्छेद 143 (2) और अनुच्छेद 147 के तहत जारी नोटिस का जवाब करदाता बिना कागजी झमेले के दे सकते हैं। अनुच्छेद 143 (2) के तहत ऐसे नोटिस भेजे जाते हैं, जो विभाग द्वारा सभी आयकर रिटर्न की जांच के बाद कंप्यूटर की मदद से बनाए जाते हैं। करदताओं के रिटर्न की जांच करने के बाद कंप्यूटर यह नोटिस जारी करता है। जब कोई करदाता किसी आय का उल्लेख नहीं कर पाता है तो अनुच्छेद 147 के तहत नोटिस भेजे जाते हैं।
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