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इसॉप्स पर निर्णय लेने से पहले कर पर ध्यान देने की जरूरत

सुदीप्त दे |  Oct 29, 2017 08:13 PM IST

ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट ने हाल में अपने 6,000 मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों के लिए कर्मचारी शेयर विकल्प (इसॉप्स) की पुनर्खरीद को मंजूरी दी है। यह खरीद 10 करोड़ डॉलर की होगी। लेकिन कर्मचारियों को जश्न मनाने से पहले यह समझना होगा कि इस कमाई पर कर किस तरह लगेगा। गैर सूचीबद्घ कंपनियों के कर्मचारियों के लिए कर की व्यवस्था अलग-अलग होगी और इस बात पर निर्भर करेगी कि पुनर्खरीद किस की हो रही है-शेयर विकल्प की या कंपनी द्वारा जारी किए गए शेयरों की। 

 
कंपनी शेयर विकल्प खरीदे तो
 
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कंपनी अपने ही शेयरों या कुछ खास प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद करती है तो कर के मामले में विशेष तौर पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 46 ए प्रभावी हो जाती है। डेलॉयट हैस्किंस ऐंड सेल्स एलएलपी में व्यक्तिगत कर, इसॉप्स के पार्टनर होमी मिस्त्री कहते हैं, 'खास प्रतिभूति शब्द को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 68 के तहत परिभाषित किया गया है और कर्मचारी शेयर विकल्प भी इसी के अंतर्गत आते हैं। इस तरह माना जा सकता है कि इसॉप्स की पुनर्खरीद के मामले में आयकर अधिनियम की धारा 46ए के प्रावधान लागू होंगे।' वह बताते हैं कि इस व्यवस्था के मुताबिक कर्मचारी को जिस कीमत पर शेयर विकल्प हासिल हुए थे और जिस कीमत पर उन्हें खरीदा गया है, उनके बीच के अंतर को पूंजीगत लाभ माना जाएगा और उसी पर कर की गणना की जाएगी।
 
यदि शेयर विकल्प आदि 36 महीने या उससे कम समय तक कर्मचारी के पास रहे तो अल्पावधि पूंजीगत लाभ कर वसूला जाएगा। यदि उससे अधिक समय के लिए इन्हें रखा गया है तो दीर्घावधि लाभ कर लगेगा। यदि शेयर विकल्प दीर्घावधि पूंजीगत संपत्ति के नियमों पर खरा उतरता है तो उस पर दीर्घावधि पूंजीगत लाभ कर वसूला जाएगा। मिस्त्री कहते हैं, 'जब इसॉप्स जारी किए जाते हैं तो आम तौर पर कर्मचारियों से किसी तरह की कीमत नहीं ली जाती है। इसलिए ऐसे मामलों में कर्मचारियों को उनके बदले कंपनी से मिली पूरी की पूरी कीमत ही पूंजीगत लाभ मानी जाएगी और उस पर कर वसूला जाएगा।'
 
विशेषज्ञों का कहना है कि कर अधिकारी यह मानकर चलते हैं कि कर्मचारियों को इसॉप्स नियोक्ता-कर्मचारी संबंध की वजह से दिए गए। इस तरह इनसे मिलने वाली किसी भी आय को वेतन से होने वाली आय माना जाना चाहिए और उस पर कर भी वसूला जाना चाहिए। इसॉप्स के जरिये शेयरों के आवंटन अथवा हस्तांतरण से होने वाली आय के कराधान की लीक पर चलते हुए कर अधिकारियों ने कई मामलों में यह दलील दी है कि इसॉप्स के मामले में कर योग्य मूल्य वही होना चाहिए, जो भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास पंजीकृत श्रेणी 1 मर्चेंट बैंकर ने बतौर उचित बाजार मूल्य तय किया है।
 
ट्राईलीगल में पार्टनर संशुद्घ मजूमदार बताते हैं कि शेयर विकल्प पर दो बार कर लगाया जाता है - नियोक्ता द्वारा आवंटन के दौरान अतिरिक्त लाभ (वेतन आय के हिस्से) के तौर पर और कर्मचारी द्वारा हस्तांतरित करते समय पूंजीगत लाभ के तौर पर। संशुद्घ कहते हैं, 'हालांकि एक ही प्रकार के लाभ या आय पर दो बार कर नहीं वसूला जाता।' अन्य प्रकार के वेतन और लाभ की ही तरह नियोक्ता को इसॉप्स कर्मचारी के हाथ में देते वक्त स्रोत पर कर काटना पड़ता है।
 
गैर सूचीबद्घ कंपनी शेयर पुनर्खरीद करे तो
 
कर्मचारियों को इसॉप्स, सीमित शेयर आवंटन अथवा कर्मचारी शेयर खरीद योजना जैसे तरीकों से कंपनियों के शेयर हासिल होते हैं। जब बात ऐसे शेयरों की पुनर्खरीद की हो तो कंपनी को आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार आयकर (20 फीसदी की दर + उपकर + पुनर्खरीद की रकम का अधिभार) चुकाना पड़ता है। कॉरपोरेट प्रफेशनल्स में इसॉप्स सर्विसेज की प्रमुख मोहिनी वाष्र्णेय कहती हैं, 'हालांकि कर्मचारियों के हाथ में आने वाली शेयरों की रकम पर कर नहीं लगता।' 
 
संशुद्घ मजूमदार का कहना है कि किसी गैर-सूचीबद्घ कंपनी द्वारा शेयरों की पुनर्खरीद से प्राप्त लाभ पूंजीगत लाभ कर के अधीन नहीं आता, लेकिन इस पर 'पुनर्खरीद वितरण कर' लगता है। लेकिन यदि कर्मचारी ये शेयर किसी अन्य को बेचता है तो उसे दीर्घावधि अथवा अल्पावधि कर चुकाना पड़ेगा। उस सूरत में कंपनी पर किसी तरह की कर देनदारी नहीं बनेगी क्योंकि बिक्री का सौदा कर्मचारी और खरीदार के बीच होगा। यह स्थिति उन कई गैर-सूचीबद्घ स्टार्ट-अप के लिए लागू हो सकती है जो अतिरिक्त रकम जुटाने के प्रयास में निवेशकों को लाते हैं।
 
यदि सूचीबद्घ कंपनियों के शेयरों को कोई कर्मचारी एक्सचेंज पर तब बेचता है, जब वे दीर्घावधि संपत्ति बन चुके होते हैं तो उसे पूंजीगत लाभ कर नहीं देना पड़ता। लेकिन वे शेयर उसे स्टॉक एक्सचेंज पर ही बेचने पड़ेंगे और प्रतिभूति लेनदेन कर चुकाना पड़ेगा। सूचीबद्घ कंपनियों द्वारा पुनर्खरीद पर भी कर नहीं लगता।
कीवर्ड e commerce, फ्लिपकार्ट,

  
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