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क्या पीएनबी के शेयर में तेजी रहेगी बरकरार?

हंसिनी कार्तिक |  Oct 29, 2017 09:35 PM IST

वित्त मंत्रालय द्वारा घोषणा किए जाने से पहले तक पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) के लिए धारणा कमजोर बनी हुई थी। सरकार द्वारा पुन: पूंजीकरण योजना की पेशकश किए जाने के बाद 24 अक्टूबर से पीएनबी के शेयर में 63 फीसदी की तेजी आई है। हालांकि अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के शेयरों में गुरुवार को गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन पीएनबी उस दिन भी 5.6 फीसदी की तेजी के साथ इस संबंध में अपवाद साबित हुआ।

 
इस शेयर में शानदार तेजी की कई वजह हैं। प्रमुख पीएसबी में पूंजी किल्लत वाला बैंक होने की वजह से सरकार की पूंजी लगाने की योजना सकारात्मक साबित हुई है। पीएनबी का टियर 1 पूंजी अनुपात 7.91 फीसदी था, जो आठ फीसदी के दायरे से थोड़ा नीचे है।  बैंकों को वित्त वर्ष 2019 से नए अकाउंटिंग मानक (पूंजीकरण समेत) अपनाने होंगे जिसे देखते हुए सरकार द्वारा पूंजी लगाना बेहद स्वागत योग्य कदम है।
 
कुछ विश्लेषक पिछले 6-8 महीनों से पीएनबी पर सकारात्मक रुख अपना रहे हैं, क्योंकि इस बैंक के बुनियादी आधार में सुधार आ रहा है। अपनी मुख्य परिचालन आय में कमजोर सुधार (वित्त वर्ष 2017 में 19,082 करोड़ रुपये पर) दर्ज करने के बाद परिचालन जून तिमाही में सालाना आधार पर 10 फीसदी की वृद्घि के साथ फिर से पटरी पर आया। प्रावधान के मोर्चे पर भी हालात बैंक के लिए आसान हुए हैं। खुदरा ऋणों की वजह से अग्रिम में अच्छी वृद्घि दर्ज की गई।
 
कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों के अनुसार पीएनबी की शुद्घ ब्याज आय 11.5 फीसदी की वृद्घि के साथ 16,715 करोड़ रुपये रहने की संभावना है, जबकि शुद्घ लाभ वित्त वर्ष 2018 में 86 फीसदी बढ़कर 2,460 करोड़ रुपये पर पहुंच सकता है। इन सभी से निवेशकों का भरोसा इस शेयर में बढ़ सकता है। पिछले सप्ताह बुधवार (25 अक्टूबर) तक की तेजी तक यह शेयर सुस्त मूल्यांकन (वित्त वर्ष 2018 की पीबी के 0.9 गुना) पर कारोबार कर रहा था, जिससे यह पीएसबी में एक आकर्षक दांव बन गया। भले ही दो साल के खराब समय के बाद बुनियादी आधार में सुधार आ रहा है, लेकिन तेजी को बनाए रखने के लिहाज से सिर्फ उम्मीदें या कम मूल्यांकन ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके अलावा कुछ चिंताएं भी बनी हुई हैं। 30 जून 2017 को सकल एनपीए 13.7 फीसदी था और एनपीए अनुपात 8.7 फीसदी था, जिसे देखते हुए पीएनबी की परिसंपत्ति गुणवत्ता अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं है। 
 
जहां प्रावधान खर्च स्थिर रह सकता है, वहीं प्रावधान कवरेज अनुपात अभी भी 40 फीसदी पर है जिससे कम से कम 6-8 तिमाहियों के शुद्घीकरण का संकेत मिलता है। इसके अलावा, ऋण वसूली की उतार-चढ़ाव वाली स्थिति भी बरकरार है जो और बदतर हो सकती है क्योंकि कई और खातों को इनसॉल्वेंसी और बैंगरप्सी कोड की कार्यवाही के लिए भेजा गया है।  प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों ने आने वाली तिमाहियों में ऐसे खातों के संदर्भ में लगभग 1000 करोड़ रुपये के प्रावधान का अनुमान जताया है। इसलिए, अनिश्चितताओं को देखते हुए मौजूदा तेजी की निरंतरता सिर्फ अटकलबाजी ही है। 
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