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प्रावधान अनुपात 18-19 फीसदी बढऩे का अनुमान

विशाल छाबडिय़ा |  Oct 29, 2017 09:36 PM IST

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के लिए पुन:पूंजीकृत करने के लिए सरकार की 2.11 लाख करोड़ रुपये की योजना को बाजार से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, क्योंकि इसे बैंकिंग क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की दिशा में एक अहम पहल के तौर पर देखा जा रहा है।  कई पीएसबी बढ़ती गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) और इन एनपीए के साथ साथ ऋण बढ़ाने के लिए मुहैया कराई जाने वाली पूंजी के अभाव की वजह से दबाव से जूझ रहे हैं। 1 अप्रैल, 2018 से इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडड्ïर्स (इंडास) के संभावित क्रियान्वयन से भी प्रावधान में तेजी लाए जाने की जरूरत होगी।

 
हालांकि पीएसबी की पूंजी बढ़ाने वाली यह पहल एक स्वागत योग्य कदम है और इसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन इससे कई निहितार्थ भी जुड़े हुए हैं। ब्रोकरों ने पीएसबी के लिए लाभ और निहितार्थ को ध्यान में रखकर अपने अनुमान व्यक्त किए हैं।  मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज का कहना है कि यदि बैंक नियोजित पूंजी का बड़ा हिस्सा फंसे कर्ज के लिए मुहैया कराने में इस्तेमाल करते हैं तो प्रत्येक पीएसबी का प्रावधान कवरेज अनुपात (पीसीआर) 1800-1900 आधार अंक तक बढ़ जाएगा। 
 
ब्रोकरेज फर्म ने कहा है, 'हमारा मानना है कि कुल आवंटन में 75,000-80,000 करोड़ रुपये बेसेल-3 पूंजी जरूरतों को पूरा करने और व्यवसाय वृद्घि को मजबूत बनाने पर खर्च होंगे, जबकि शेष 1.3 लाख करोड़ रुपये का इस्तेमाल अधिक प्रावधान (फंसे कर्ज के लिए) बनाने के लिए किया जा सकेगा।' रेटिंग एजेंसियों और विश्लेषकों द्वारा अनुमानों में एनपीए के संबंध में प्रावधान के लिए पीएसबी की पूंजी जरूरत 2.50 लाख करोड़ रुपये बताई गई है। कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट में 21 पीएसबी के संयुक्त फंसे ऋणों के 10.5 लाख करोड़ रुपये और शुद्घ एनपीए 4.17 लाख करोड़ रुपये पर होने का अनुमान लगाया गया है। 
 
हालांकि 21 पीएसबी के लिए एनपीए के संदर्भ में सकल प्रावधान जरूरत (60 प्रतिशत पर, और ऋणों में 40 फीसदी की रिकवरी को ध्यान में रखकर) 3.14 लाख करोड़ रुपये और बेसेल-3 पूंजी जरूरत 80,000 करोड़ रुपये पर अनुमानित है और कोटक का मानना है कि ये बैंक अगले दो वर्षों के दौरान प्रावधान-पूर्व परिचालन मुनाफे में 2.23 लाख करोड़ रुपये अर्जित करेंगे। इस तरह से शुद्घ पूंजी जरूरत 1.8 लाख करोड़ रुपये है।
 
फंसे कर्ज में सकल एनपीए, पुनर्गठित ऋण, और एसडीआर (स्ट्रेटेजिक डेट रीस्ट्रक्चरिंग), 4एसए और 5:25 योजनाओं के तहत ऋण शामिल हैं।  मोतीलाल ओसवाल के अनुमानों के अनुसार मोटे तौर पर, सरकारी बैंकों के लिए पीसीआर 43 फीसदी से बढ़कर 62 फीसदी हो जाने और इक्विटी 6 फीसदी घटकर 57 फीसदी रह जाने का अनुमान है। सरकार की हिस्सेदारी 6 फीसदी और 29 फीसदी के बीच बढ़ी है क्योंकि पूंजी (बॉन्डों और इक्विटी दोनों के जरिये) लगाई गई है।  सरकार द्वारा पूंजी लगाए जाने के परिणामस्वरूप, इन बैंकों की बुक वैल्यू भी बदलेगी। हालांकि काफी हद तक स्थिति कीमत और इक्विटी में कमी की मात्रा पर निर्भर करेगी। विश्लेषकों का कहना है कि छोटे पीएसबी इक्विटी में बड़ी गिरावट के जोखिम में हैं। पूंजी नियोजन के अनुमानों के आधार पर कोटक के विश्लेषकों का कहना है कि प्रति शेयर औसत बुक वैल्यू में गिरावट 20-40 फीसदी होगी। विश्लेषकों ने यह भी अनुमान लगाया है कि सरकार की हिस्सेदारी कई मामलों में बढ़कर 80-90 प्रतिशत हो जाएगी। तब यह सूचीबद्घता मानकों के तहत अनिवार्य 75 प्रतिशत के दायरे से अधिक हो जाएगी। हालांकि तस्वीर पूरी तरह तभी स्पष्टï होगी जब निर्णायक ब्यौरों की घोषणा कर दी जाएगी। 
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