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आधार पर एम्फी के फैसले से दबाव में संपत्ति प्रबंधन कंपनियां

चंदन किशोर कांत | मुंबई Oct 31, 2017 09:44 PM IST

निवेश के लिए आधार नागरिक पहचान अनिवार्य किए जाने के एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के फैसले का बोझ संपत्ति प्रबंधन कंपनियां महसूस कर रही हैं। 1 जनवरी से ग्राहकों यानी निवेशकों (मौजूदा निवेशक समेत) का आधार विवरण म्युचुअल फंडों में निवेश के लिए अनिवार्य होगा। जानकारों ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, एम्फी को यह आदेश वित्त मंत्रालय से मिला है। एम्फी के बोर्ड सदस्य ने कहा, हमने इसे अपने सदस्यों के लिए आधिकारिक संदेश के तौर पर पारित किया है। उन्होंने कहा, कोई भी संपत्ति प्रबंधन कंपनी इसके हक में नहीं है क्योंकि यह आधार को लिंक करने की जिम्मेदारी उन पर सौंपता है। ज्यादातर आला अधिकारियों ने इस पर चुप्पी साध रखी है क्योंकि वे नहीं चाहते कि नए नियम के खिलाफ उनके बयान को उधृत किया जाए।
मिरे ऐसेट के मुख्य कार्याधिकारी स्वरूप मोहंती ने कहा, सभी निवेशकों का आधार हासिल करना काफी बड़ा काम है। ऐसा नहीं करने पर खाते मोटे तौर पर फ्रीज हो जाएंगे और किसी तरह के लेनदेन की अनुमति नहीं होगी। हमने इस महीने से प्रक्रिया शुरू की है और इस पर खासा काम हुआ है। ऐसे में दिसंबर तक हमें उम्मीद है कि ज्यादातर खाते के आधार का विवरण दर्ज हो जाएगा। अधिकारियों को इस बात ने परेशान किया है कि नए नियम के मामले में ज्यादातर जिम्मेदारी फंड हाउस पर डाल दी गई है। पिछले कुछ सालोंं में निवेशकों के लिए केवाईसी नियमों में काफी बदलाव हुए हैं। एक बड़े फंड हाउस के सीईओ ने कहा, निवेशकों के खाते को आधार से जोड़े जाने को लेकर हमें कोई समस्या नहीं है। लेकिन सभी निवेशकों (मौजूदा निवेशक समेत) के लिए यह सुनिश्चित करना आसान नहीं है।

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