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यूलिप धारकों के लिए नए विकल्प तलाशने का समय

बीएस संवाददाता |  Nov 05, 2017 07:00 PM IST

शेयर बाजारों की उछाल से केवल म्युचुअल फंड हाउसों को ही फायदा नहीं हुआ है। यहां तक कि बीमा कंपनियों ने भी अपने यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान या यूलिप में भी लगातार अच्छी निवेश आवक दर्ज की है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक अगस्त 2017 तक यूलिप में करीब 19,000 करोड़ रुपये (नया कारोबारी प्रीमियम और नवीनीकरण प्रीमियम) का निवेश हुआ है, जो पिछले वित्त वर्ष में 15,000 करोड़ रुपये था। इस तरह इसमें साल-दर-साल इसमें करीब 27 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। 
 
यूलिप बीमा एवं निवेश का मिलाजुला रूप है। ये शेयरों और बॉन्डों जैसे साधनों में निवेश के विकल्पों के अलावा बीमा कवर भी मुहैया कराते हैं। यूलिप न तो म्युचुअल फंडों की तरह शुद्ध निवेश है और न ही टर्म प्लान की तरह शुद्ध बीमा, इसलिए ज्यादातर फाइनैंशियल प्लानर आपको उनमें निवेश करने की सलाह नहीं देते हैं। हालांकि जब शेयर बाजार चढऩे लगते हैं तो बहुत से पॉलिसीधारक बाजार की तेजी का फायदा उठाने के लिए ये हाइब्रिड साधन खरीदते हैं। 
 
हालांकि अब बाजार विशेषज्ञ शेयर बाजार की तेजी के लंबे समय तक बरकरार रहने को लेकर फिक्रमंद हैं, इसलिए यूलिप निवेशकों को भी अपने पोर्टफोलियो में बदलाव पर विचार करना चाहिए। श्रीराम लाइफ के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार जैन ने कहा, 'यूलिप का मुख्य फायदा यह है कि व्यक्ति जोखिम लेने की अपनी क्षमता के आधार पर किसी भी समय इक्विटी से डेट और डेट से इक्विटी का रुख कर सकता है।'
 
अच्छी खबर यह है कि सभी यूलिप धारकों के पास यह विकल्प है कि वे एक साल में बिना किसी  लागत के कितनी भी बार बदलाव कर सकते हैं और इसका सबसे अच्छा पहलू यह है कि एक फंड से दूसरे फंड में जाने की कोई कर देनदारी नहीं है।  यूलिप निवेशकों को इक्विटी, बैंलेस्ड और डेट का विकल्प देते हैं। इंडियाफस्र्ट लाइफ इंश्योरेंस की एमडी और सीईओ आर एम विशाखा ने कहा, 'यूलिप में फंड बदलने का फैसला पॉलिसी की अवधि और ग्राहक की जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करेगा। अगर पॉलिसी जल्द ही परिपक्व होने जा रही है और ग्राहक उतार-चढ़ाव कम से कम करना चाहता है तो वह इस समय इक्विटी से डेट को अपनाने का फैसला ले सकता है।'
 
निवेशक एक साल के दौरान विभिन्न फंडों में पांच से छह बार अदला-बदली कर सकते हैं, जो उस बीमा कंपनी पर निर्भर करता है। हालांकि कुछ ऐसी भी बीमा कंपनियां हैं, जिनमें शेयरों में मिलने वाला लाभ स्वत: ही डेट में हस्तांतरित हो जाता है। उदाहरण के लिए इंडियाफस्र्ट लाइफ के दो प्लान मनी बैलेंस्ड और वेल्थ मैक्सिमाइजर हैं। ये पॉलिसी यह विकल्प देती हैं कि इक्विटी फंड में स्वत: मुनाïïफावसूली की जा सकती है। विशाखा ने कहा, 'इसके पीछे मकसद यह है कि पोर्टफोलियो संतुलित हो। यह रणनीति शेयरों में होने वाले लाभ को डेट में व्यवस्थित तरीके से हस्तांतरित करने में मदद देती है।'
 
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति पूरी अवधि पॉलिसी को नहीं बनाए रखना चाहता है तो उसके लिए इक्विटी विकल्प को अपनाने का कोई फायदा नहीं है। यूलिप खरीदने वाले नए लोगों को इसके परिपक्व होने तक अपना निवेश बरकरार रखना चाहिए। प्रोबस इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड के निदेशक राकेश गोयल ने कहा, 'पिछले कुछ महीनों के दौरान यूलिप में बड़ा निवेश हुआ है। हालांकि लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले निवेशकों को ही इक्विटी विकल्प में पैसा लगाना चाहिए। जो लोग सीमित अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, उन्हें अपने विकल्पों पर विचार करना चाहिए और इस समय डेट के विकल्प को अपनाना चाहिए।'
 
एक साधन के रूप में भी यूलिप सीमित अवधि के पॉलिसीधारक के लिए ज्यादा उपयोगी नहीं है क्योंकि इसका मतलब है कि व्यक्ति को शुरुआती वर्षों में ऊंची लागत का बोझ वहन करना पड़ेगा। आम तौर पर यूलिप में प्रीमियम एलोकेशन चार्ज, फंड मैनेजमेंट चार्ज, पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज और मोर्टेलिटी चार्ज जैसे कई शुल्क शामिल होते हैं। पहले पांच वर्षों में ये सभी शुल्क सालाना 6 से 7 फीसदी हो सकते हैं। 
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