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अच्छा है, लेकिन एक महंगा फ्रेंचाइजी

हंसिनी कार्तिक |  Nov 05, 2017 09:18 PM IST

लगभग एक साल पहले जीवन बीमा क्षेत्र में मूल्यांकन में तेजी से उत्साहित होकर आखिरकार एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस (एचडीएफसी लाइफ) कंपनी 7 नवंबर को सूचीबद्घ होने के लिए पूरी तरह तैयार है। 275-290 रुपये के कीमत दायरे के ऊपरी हिस्से पर कंपनी की इक्विटी मूल्यांकन (बाजार पूंजीकरण) 55,248-58,261 करोड़ रुपये पर अनुमानित है। हालांकि निजी क्षेत्र की बाजार दिग्गज आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ (आई-प्रू लाइफ) को 55,700 करोड़ रुपये के इक्विटी मूल्यांकन के साथ बढ़त हासिल है, लेकिन एचडीएफसी लाइफ को इस संदर्भ में मजबूती हासिल होने की उम्मीद है। चार मजबूत कारक हैं जिनसे इसकी कीमत को मदद मिल सकती है। इनमें खासकर इसका मजबूत प्रोडक्ट प्रोफाइल, नए व्यवसाय प्रीमियम में वृद्घि और मुनाफा शामिल हैं। जहां जीवन बीमा क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा सूचीबद्घ कंपनियों द्वारा दर्ज अतिरिक्त प्रीमियम को प्रभावित कर रही है, वहीं आई प्रू लाइफ और एसबीआई लाइफ का ताजा कमजोर प्रदर्शन इसका प्रमाण है। यही वजह है कि सिर्फ दीर्घावधि निवेशक ही इस आईपीओ पर विचार कर सकते हैं।

 
परिचालन
 
कई अन्य कंपनियों की तरह एचडीएफसी लाइफ का उत्पाद सेगमेंट भी उद्योग की कार्य प्रणालियों के अनुरूप है। हालांकि अच्छी बात यह है कि यूनिट-लिंक्ड बीमा पॉलिसी (यूलिप) की भागीदारी 52 फीसदी पर बनी हुई है और भागीदार उत्पादों का योगदान अपेक्षाकृत मजबूत है। यूलिप सामान्य तौर पर किसी बीमा कंपनी के लिए प्रोटेक्शन (प्योर टर्म) पॉलिसी के मुकाबले कम मुनाफे वाले उत्पाद होते हैं। इससे बीमा कंपनी के लिए वृद्घि की गुणवत्ता और मात्रा को मजबूती मिली है। घरेलू बैंकिंग भागीदार- एचडीएफसी, बैंकएश्योरेंस (कुल वितरण चैनल का 51 प्रतिशत) से एचडीएफसी लाइफ को मदद मलिी है। वहीं डायरेक्ट सेलिंग भी 40 फीसदी के साथ मजबूत है।
 
एचडीएफसी लाइफ को कई मानकों पर अच्छी बढ़त हासिल है। कुल प्रीमियम और वित्त वर्ष 2017 में प्राप्त नए व्यावसायिक प्रीमियम के संदर्भ में यह आई-प्रू लाइफ और एसबीआई लाइफ के मुकाबले दूसरे पायदान पर है। हालांकि नए व्यवसाय की वैल्यू (वीएनबी) मार्जिन के संदर्भ में यह वित्त वर्ष 2017 में 21.6 फीसदी के मार्जिन के साथ चार्ट में शीर्ष पर है। वहीं पर्सिस्टेंसी रेशियो के संदर्भ में बात की जाए तो वित्त वर्ष 2017 में एचडीएफसी लाइफ का 13 महीने और 61 महीने का पर्सिस्टेंसी रेशियो (बीमा को बरकरार रखने का अनुपात) 80.9 फीसदी और 56.8 फीसदी था, जो आई-प्रू लाइफ (87.5 फीसदी और 56.2 फीसदी) और एसबीआई लाइफ (81.1 फीसदी और 67.2 फीसदी) की तुलना में थोड़ा कम है। 
 
वित्त
 
नए गु्रप बिजनेस प्रीमियम में मजबूत वृद्घि की मदद से कुल प्रीमियम वित्त वर्ष 2015-17 में 14.5 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर (सीएजीआर) से बढ़ा। भले ही एचडीएफसी लाइफ का कुल लागत अनुपात प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक है, पर उसका शुद्घ लाभ इस अवधि के दौरान 6.3 फीसदी सीएजीआर से बढ़ा। वित्त वर्ष 2017 में कुल लागत अनुपात 16.7 फीसदी पर था जबकि आई-प्रू लाइफ और एसबीआई लाइफ के लिए यह 14.1 और 11.7 फीसदी पर था। इन अनुपात और कुल प्रतिफल प्रोफाइल में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है, क्योंकि एचडीएफसी लाइफ नए बिजनेस प्रीमियम में तेजी आ रही है और एजेंसी एवं डिजिटल चैनलों में बड़े निवेश से लाभ मिलना शुरू हो गया है। मौजूदा समय में इक्विटी में एचडीएफसी लाइफ का प्रतिफल वित्त वर्ष 2015-17 में 29.4 फीसदी पर अनुमानित है, जो आई-प्रू लाइफ के 31.2 फीसदी से कम है लेकिन एसबीआई के 20.1 फीसदी की तुलना में अधिक है।
 
मूल्यांकन
 
वित्त वर्ष 2017 में 14,010 करोड़ रुपये की निहित वैल्यू (ईवी) के साथ यह निर्गम वित्त वर्ष 2017 कइ ईवी के 4.7 गुना पर है। शीर्ष दो कंपनियां अपनी वित्त वर्ष 2017 की ईवी के 3.5 -4 गुना पर कारोबार कर रही हैं। 
 
जोखिम
 
एचडीएफसी बैंक का एचडीएफसी लाइफ के सालाना प्रीमियम में 30 सितंबर तक 54.3 फीसदी का योगदान था। 1 अप्रैल, 2016 से बैंक तीन जीवन बीमा कंपनियों, तीन सामान्य बीमा कंपनियों और तीन स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के लिए गैर-आधिकारिक कॉरपोरेट एजेंट के तौर पर काम कर सकते हैं। इसलिए, एचडीएफसी लाइफ और एचडीएफसी बैंक के बीच समझौता कोई विशेष समझौता नहीं है और यह एक बैंकिंग भागीदार पर अधिक निर्भरता को देखते हुए जोखिम है। इसी तरह, एचडीएफसी लाइफ यूलिप उत्पादों के लिए अपने निवेश को लेकर सक्षम है और उसने इस खंड से अधिक योगदान हासिल करने की योजना बनाई है, जिससे बीमा कंपनियों को वित्तीय स्थिति के संदर्भ में अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। 
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