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एमऐंडएम फाइनैंस: सुधार की उम्मीद बरकरार

हंसिनी कार्तिक |  Nov 05, 2017 09:18 PM IST

जब किसी कंपनी का प्रदर्शन बुनियादी आधार के संदर्भ में कमजोर हो तो यह तर्कसंगत है कि उसकी शेयर कीमत पर इसका असर दिखता है। ऐसे मामलों में शेयर कीमत का रुझान दबाव में या बाजार के मुकाबले कमजोर बना रहता है। लेकिन यह तर्क एमऐंडएम फाइनैंशियल सर्विसेज के लिए लागू होता नहीं दिख रहा है। कंपनी का प्रदर्शन कई मानकों पर कुछ समय से धीमा बना हुआ है। फिर भी उसका शेयर 2017 में अब तक लगभग 60 फीसदी की बढ़त दर्ज कर चुका है। साथ ही यह शेयर अपने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के शेयरों को पीछे छोड़ चुका है।

 
कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और शेयर कीमत के बीच इस भिन्नता की कई वजह हैं। हालांकि यह भी जरूरी है कि कंपनी बाजार अनुमानों को पूरा करना शुरू करे, नहीं तो शेयर को तेजी का सिलसिला बरकरार रखना मुश्किल हो जाएगा। हाल में संपन्न हुई सितंबर तिमाही (दूसरी तिमाही) कमजोर प्रदर्शन वाली ऐसी तीसरी तिमाही थी जिसमें परिचालन की दृष्टिï से या ऋण वृद्घि या परिसंपत्ति गुणवत्ता के संदर्भ में कंपनी को कमजोर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। शुद्घ लाभ दूसरी तिमाही में एक साल पहले की अवधि की तुलना में 18 प्रतिशत तक घटकर 78 करोड़ रुपये रह गया। शुद्घ ब्याज आय (एनआईआई) 16 प्रतिशत तक बढ़कर 911 करोड़ रुपये हो जाने के बावजूद कंपनी को मुनाफे पर इस तरह के दबाव का सामना करना पड़ा है। ऋण नुकसान के लिए प्रावधान ऊंचा बना हुआ है और सालाना आधार पर इसमें 46 फीसदी तक की तेजी आई है जिससे मुनाफा प्रभावित हो रहा है।
 
नकारात्मक तथ्य यह है कि गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) थमने के बजाय बढ़ रही हैं। हालांकि मार्च तिमाही को इस पर नियंत्रण के संदर्भ में पारंपरिक रूप से बेहतर समय माना जाता है, लेकिन दूसरी तिमाही का सकल एनपीए अनुपात 12.64 फीसदी पर अभी भी ऊंचा बना हुआ है, जो हाल के समय में सर्वाधिक है।  आरबीआई ने एनबीएफसी से ऐसे ऋण मुहैया कराने को कहा है जिसमें बीती मियाद (ऋण चुकाने की निकल चुकी अवधि) यानी विलंबित भुगतान की सुविधा पूर्व की 120 दिन की जरूरत की तुलना में 90 दिन या इससे अधिक की हो। अभी भी पिछले मानकों के तहत सकल एनपीए दूसरी तिमाही में 5,131 करोड़ रुपये पर थी जबकि एक साल पहले यह 4,748 करोड़ रुपये पर थी। इसलिए, एनपीए नियंत्रण मानकों के बावजूद दबाव बना हुआ है। मुनाफा या शुद्घ ब्याज मार्जिन भी धीरे धीरे घट रहा है। जहां वित्त वर्ष 2016 में यह 8.6 फीसदी था वहीं दूसरी तिमाही में 7.5 फीसदी रह गया।
 
मौजूदा समय में ऋण वृद्घि एकमात्र मजबूत मानक है और कंपनी दूसरी तिमाही में इसे 14 फीसदी पर बनाए रखने में कामयाब रही है। हालांकि जीएसटी के क्रियान्वयन की वजह से तिमाही के ऋण वितरण अपेक्षाकृत कमजोर थे। यह कमजोरी संभवत: दिसंबर तिमाही में दूर होने का अनुमान है। अभी भी परिसंपत्ति गुणवत्ता की समस्या एमऐंडएम फाइनैंस के रिटर्न प्रोफाइल को प्रभावित कर रही है। पूंजी पर प्रतिफल (आरओई) वित्त वर्ष 2013 में 22 फीसदी पर था और उसके बाद से इसमें कमी आई है। वित्त वर्ष 2017 में यह 6.4 फीसदी के निचले स्तर पर पहुंच गया है। विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2018 में इस रुझान में बदलाव आने का अनुमान है और वे इस अवधि में 11-12 फीसदी के आरओई की उम्मीद जता रहे हैं। 
 
हालांकि, अभी भी यह आशंका बनी हुई है कि वित्त वर्ष 2018 में यह अनुमान पूरा नहीं हो सकता है क्योंकि कंपनी ने कहा है कि उसका सकल एनपीए अनुपात 10 फीसदी रह सकता है। माना जा रहा है कि उसकी ऋण परिसंपत्तियों (30 सितंबर तक 46,011 करोड़ रुपये) का 4600 करोड़ रुपये का हिस्सा वित्त वर्ष 2018 में फंसे कर्ज में तब्दील हुआ है जिससे उसकी आय और प्रतिफल अनुपात प्रभावित हो रहे हैं। कमजोर परिदृश्य के बावजूद ज्यादातर विश्लेषक एमऐंडएम फाइनैंस पर सकारात्मक बने हुए हैं और ग्रामीण थीम के लिए इसे श्रेष्ठï दांव करार दे रहे हैं। इसे इस तथ्य से भी कुछ हद तक जायज ठहराया जा सकता है कि कंपनी ग्रामीण बाजार के रुझानों में कमजोरी का सामना करने और ट्रैक्टर ऋण, वाहन ऋण और बाद में आवास ऋणों जैसे विभिन्न वित्तीय उत्पादों द्वारा इस सेगमेंट की सेवा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्घ है। 
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