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यूपीएल: दूसरी तिमाही में नहीं दिखा दम, पर उम्मीद बरकरार

उज्ज्वल जौहरी |  Nov 05, 2017 09:20 PM IST

स्‍मार्ट इन्‍वेस्‍टर

भले ही यूपीएल (पूर्व में यूनाइटेड फॉस्फोरस) इंडिया का व्यवसाय लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन आयात बाजारों में धीमी वृद्धि और विपरीत मौद्रिक उतार-चढ़ाव ने उसके सितंबर तिमाही के प्रदर्शन को प्रभावित किया। यही वजह है कि कंपनी उम्मीद के मुकाबले कम राजस्व दर्ज कर पाई है। वित्त वर्ष 2018 में राजस्व वृद्धि को लेकर उम्मीदें कमजोर पड़ने से यह शेयर मंगलवार को लगभग 3 फीसदी गिरकर 798.60 रुपये पर आ गया था। कंपनी का तिमाही परिणाम सोमवार को बाजार बंद होने के बाद घोषित किया गया था। इस वजह से इसका असर अगले दिन शेयर बाजार में उसे शेयर पर देखने को मिला।

यूपीएल का घरेलू सेगमेंट का राजस्व सालाना आधार पर 10 फीसदी सुधरा और यदि दक्षिणी राज्यों में अनियमित ढंग से बारिश नहीं होती तो इसमें और सुधार आ सकता था। लैटिन अमेरिकी (लैटम) बिक्री (राजस्व में एक तिहाई से कुछ अधिक की भागीदारी) सिर्फ 5 फीसदी बढ़ सकी। लैटम की पहली छमाही की वृद्धि भी पांच फीसदी पर बनी रही और यह मॉनसून में विलंब और फसल की कीमतों में नरमी की वजह से प्रभावित हुई। यूरोप और उत्तर अमेरिका (राजस्व में 10 प्रतिशत की भागीदारी) का भी कंपनी के लिए 7 फीसदी 5 फीसदी का योगदान रहा। एडलवाइस के विश्लेषकों का कहना है कि यूरोप के लिए चुकंदर की बिक्री वृद्धि फिर से स्थिर बनी रही।

इन सब के साथ 3,770 करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 6.5 फीसदी ज्यादा) पर शुद्ध बिक्री ब्लूमबर्ग के 3,907 करोड़ रुपये के अनुमान से पीछे रही। वहीं 719 करोड़ रुपये पर परिचालन आय एक साल पहले के मुकाबले 12.3 फीसदी तक अधिक रही और इस वजह से कंपनी को 19.1 फीसदी का मार्जिन दर्ज करने में मदद मिली। शुद्घ मुनाफा 300 करोड़ रुपये पर रहा जो 52 प्रतिशत ज्यादा है। मुनाफे को कम कर दरों से भी मदद मिली। यह मुनाफा 365 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था।

यही वजह है कि उम्मीद से  कम मुनाफा रहने से बाजार धारणा भी प्रभावित हुई है। तिमाही के दौरान कुल बिक्री 11 प्रतिशत बढ़ी। हालांकि यह वृद्धि 3 फीसदी की एक्सचेंज दर  से प्रभावित हुई जबकि मूल्य निर्धारण प्रभाव भी दो फीसदी था। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि यूपीएल अपने मुख्य राजस्व वृद्धि के अनुमान को 12-15 फीसदी पर बनाए रखने में सफल रही है, लेकिन विपरीत मौद्रिक प्रभाव (वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में 3 फीसदी) कुल राजस्व वृद्धि कमजोर होकर 8-10 फीसदी रह सकती है। हालांकि विश्लेषकों ने अपने अनुमानों में कटौती की है, लेकिन वे परिदृश्य को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि मार्जिन वित्त वर्ष 2018 में 50-75 आधार अंक तक बढऩे का अनुमान है, जैसा कि कंपनी प्रबंधन द्वारा संभावना जताई गई है। उनका मानना है कि यूपीएल का दीर्घावधि परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है क्योंकि कंपनी को ब्रांडिंग, नए उत्पाद लॉन्च पर ध्यान केंद्रित करने, एडवांटा विलय के बाद आपसी तालमेल और मजबूत कार्यशील पूंजी चक्र आदि का फायदा मिला है। इसके अलावा, सभी क्षेत्रों में समेकन और वैश्विक कृषि रसायन बाजार में बढ़ती भागीदारी से भी कंपनी को मदद मिली है। कंपनी द्वारा रबी सत्र में भी घरेलू व्यवसाय में मजबूत प्रदर्शन बरकरार रखे जाने की उम्मीद है। यूपीएल ने एशियन रस्ट के लिए कवक-नाशक को मिलकर बढ़ावा दिए जाने के लिए ब्राजील में बेयर के साथ भी एक समझौता किया है। बेयर के वितरक यूपीएल के उत्पाद यूनिजेब का इस्तेमाल अपने फॉक्स के साथ करने का सुझाव देंगे।

एडलवाइस के विश्लेषकों का कहना है कि इस समझौते से यूपीएल को अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। कंपनी का कहना है कि लैटम में उसके फंगीसाइड (कवक-नाशक) को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और उसके लिए दिसंबर तिमाही बेहतर रहने की उम्मीद है, क्योंकि वितरकों और किसानों ने ऑर्डर प्रक्रिया से पहले देखो और इंतजार करो की रणनीति पर जोर दिया था। इस सब को देखते हुए कंपनी बेहतर दूसरी छमाही दर्ज कर सकती है।

एलारा कैपिटल के विश्लेषकों को आय सालाना आधार पर वित्त वर्ष 2017-19 के दौरान 20 फीसदी तक बढऩे का अनुमान है। कंपनी को उत्पाद पोर्टफोलियो पर अधिक ध्यान केंद्रित किए जाने और एडवांटा के शुरुआती व्यवसाय से भी मदद मिलने का अनुमान है। एडलवाइस के विश्लेषकों ने कमजोर राजस्व वृद्धि और सहायक इकाइयों के नुकसान को देखते हुए वित्त वर्ष 2018/19 की प्रति शेयर आमदनी (ईपीएस) में 6-7 प्रतिशत तक की कमी कर दी है, लेकिन शेयर के लिए 963 रुपये (शुरू में 1,026 रुपये) के कीमत लक्ष्य के साथ यूपीएल की वैल्यू वित्त वर्ष 2019 की अनुमानित आय के 18 गुना पर निर्धारित की है। वहीं इस शेयर के लिए इलारा कैपिटल का कीमत लक्ष्य 929 रुपये है।
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