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आईटी सेक्टर पर बढ़ता दबाव, शेयर पड़ रहे कमजोर

अपराजिता शर्मा |  Nov 05, 2017 10:33 PM IST

स्मार्ट इन्वेस्टर

विश्लेषक अगले दो वर्षों के लिए वृद्धि की रफ्तार धीमी बनी रहने की जता रहे आशंका

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) दिग्गजों के लिए सितंबर तिमाही भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई और कई कंपनियों ने अपेक्षाकृत कमजोर समझी जाने वाली दिसंबर तिमाही और मार्च तिमाही के लिए भी अनुमान घटा दिए हैं। निफ्टी आईटी सूचकांक में इस साल अब तक महज 4 फीसदी की तेजी से भी यह संकेत मिलता है कि घरेलू आईटी कंपनियों को पिछली कुछ तिमाहियों से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि इस क्षेत्र में मूल्यांकन उचित स्तर पर आ गया है और ताजा लाभांश/पुनर्खरीद से शेयर कीमतों को मदद मिली है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे सेक्टर के लिए शेयर-केंद्रित दृष्टिकोण ही मौजूदा समय में बेहतर दांव साबित हो सकता है। 

निफ्टी-50 में 26 फीसदी की तेजी के मुकाबले निफ्टी आईटी सूचकांक में इस साल अब तक 4 फीसदी की वृद्धि कमजोर दिख रही है। चढऩे वाले शेयरों में विप्रो ने 23 फीसदी, टीसीएस ने 10 फीसदी और एचसीएल टेक ने 1 फीसदी की बढ़त दर्ज की है जबकि इन्फोसिस समान अवधि में 6 फीसदी से अधिक कमजोर हुआ है। सितंबर तिमाही में, सिर्फ एचसीएल टेक ही कॉन्सटैंट करेंसी यानी मुद्रा में स्थिरता (सीसी) राजस्व वृद्धि के संदर्भ में वित्त वर्ष 2018 के लिए उद्योग के औसत की तुलना में 10.5-12.5 फीसदी की वृद्धि बरकरार रखने में सफल रही। इन्फोसिस ने वित्त वर्ष 2018 के अपने सीसी राजस्व वृद्धि अनुमान को घटाकर 5.5-6.5 फीसदी कर दिया है जबकि विप्रो ने दिसंबर तिमाही के लिए तिमाही आधार पर 0-2 फीसदी का कमजोर अनुमान जताया है। टीसीएस ने भविष्य के आय का अनुमान व्यक्त नहीं किया है। 

रिलायंस सिक्योरिटीज में शोध प्रमुख राकेश तार्वे का मानना है कि वृद्धि अगले दो वर्षों के लिए धीमी बनी रहेगी और वे मजबूत नकदी प्रवाह वाले खास शेयरों पर दांव लगाने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'आईटी सेक्टर मौजूदा समय में क्लाउड कम्प्यूटिंग, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस, डिजिटलीकरण और ऑटोमेशन जैसे ट्रेंड्स की वजह से बिजनेस मॉडल में बदलाव के दौर से गुजर रहा है। 

तार्वे कहते हैं, 'हालांकि आईटी कंपनियों को मजबूत नकदी प्रवाह से मदद मिल रही है, मूल्यांकन उचित दिख रहा है और शेयर पुनर्खरीद के स्वरूप में शेयरधारकों के लिए नकद प्रतिफल की संभावना (जैसा कि टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों के मामले में देखने को मिला है) बनी हुई है, लेकिन फिर भी निवेशकों को इस सेक्टर में शेयर-केंद्रित दृष्टिकोण बपनाने की जरूरत है।'

विश्लेषक मिडकैप आईटी शेयरों में खास वर्टिकलों, विशेषकर इंजीनियरिंग सेवाओं जैसे मजबूत वृद्धि वाले वर्टिकलों पर केंद्रित कंपनियों को पसंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हम मिडकैप आईटी कंपनियों में सायंट और सोनाटा सॉफ्टवेयर को पसंद कर रहे हैं। वहीं लार्जकैप के संदर्भ में हम कम मूल्यांकन की वजह से टीसीएस के मुकाबले इन्फोसिस पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।'

प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों का मानना है कि इन्फोसिस वित्त वर्ष 19ई के 13 गुना पर कारोबार कर रहा है, जो टीसीएस के मुकाबले 25 फीसदी कम है। विश्लेषकों ने इस शेयर पर 'एकत्रित करें' की रेटिंग बरकरार रखी है। यह भी कहा जा रहा है कि नए मुख्य कार्याधिकारी की नियुक्ति इस शेयर की चाल में बदलाव लाने वाला अहम कारक होगी।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में शोध विश्लेषक अपूर्व प्रसाद का मानना है कि बड़ी आईटी कंपनियों के लिए दूसरी तिमाही के अांकड़े ज्यादा असरदायक नहीं हो सकते हैं, लेकिन मौद्रिक लाभ और डिजिटल राजस्व में वृद्धि की मदद से परिचालन दक्षता से राहत मिल सकती है। प्रसाद का यह भी कहना है कि आईटी शेयर अच्छे लाभांश/पुनर्खरीद दांव हो सकते हैं।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने 1,000 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ एचसीएल टेक को 'खरीदारी' रेटिंग दी है। एचसीएल टेक की वृद्धि प्रतिस्पर्धियों (1.4 गुना) के मुकाबले ज्यादा है, और मूल्यांकन कुछ नीचे है।  एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रसाद मिडकैप क्षेत्र और लार्जकैप के बीच तुलनात्मक रूप से मिडकैप में बेहतर मूल्यांकन की उम्मीद कर रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म ने एम्फेसिस के लिए 750 रुपये के कीमत लक्ष्य के साथ 'खरीदारी' रेटिंग दी है। यह शेयर मौजूदा समय में अपनी सितंबर 2019ई की ईपीएस के 15 गुना पर कारोबार कर रहा है।
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