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कार डीलर अब दे पाएंगे कई वाहन पॉलिसियां

संजय कुमार सिंह |  Nov 12, 2017 07:25 PM IST

कार खरीदार अक्सर किसी भी सामान्य बीमा कंपनी का मोटर वाहन बीमा खरीदते रहे हैं। अक्सर कार डीलर ही उनके वाहन का बीमा करा देते हैं। लेकिन कई बार वे खरीदार को ऐसी महंगी पॉलिसी भी बेच देते हैं, जिसकी उनको कोई जरूरत ही नहीं होती। मगर अब तस्वीर बदल सकती है क्योंकि बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने एक नया दिशानिर्देश जारी किया है। इसके मुताबिक कार डीलर मोटर बीमा सेवा प्रदाता (एमआईएसपी) के तौर पर काम करेंगे। वे खरीदार को विभिन्न सामान्य बीमा कंपनियों की पॉलिसी देंगे। इससे कार डीलरों की बीमा पॉलिसी बेचने से संबंधित गतिविधियां नियामक की निगाह में आ जाएंगी। 

 
बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के मुख्य वित्त अधिकारी मिलिंद चौधरी कहते हैं, 'मोटर डीलर किसी मध्यस्थ के जरिये या सीधे एक या एक से अधिक बीमा कंपनियों के साथ मोटर बीमा सेवा प्रदाता के रूप में पंजीकरण करा सकते हैं। इससे जुड़ी परीक्षा और संबंधित प्रशिक्षण आदि पॉइंट ऑफ सेल्स पर्सन (पीओएसपी) की तरह ही होते हैं। इससे ग्राहकों को अच्छी सेवा भी मिलेगी और अधिक विकल्प भी।' 
 
एसबीआई जनरल इश्योरेंस के प्रमुख (बिक्री एवं वितरण) शरद माथुर का कहना है कि पहले वाहन डीलर खरीदार को उन कंपनियों की बीमा पॉलिसी बेचते थे, जो कार विनिर्माता की सूची में होती थीं। एमआईएसपी बनने के बाद वाहन डीलर या मध्यस्थ देश में लगभग सभी सामान्य बीमा कंपनियों की पॉलिसियां बेच सकेंगे। माथुर कहते हैं, 'नियामक अब उन डीलरों पर नजर रख सकेंगे, जो अधिक कमीशन देने वाली बीमा कंपनी की पॉलिसी बेचा करते हैं।'
 
चूंकि अब ग्राहकों के पास भी काफी विकल्प होंगे, इसलिए डीलर के शोरूम में घुसने से पहले उन्हें भी अपनी तरफ से पर्याप्त पड़ताल कर लेनी चाहिए। कार खरीदारों को कोई भी पॉलिसी लेने से पहले अब डीलर से अधिक विकल्पों की मांग करनी चाहिए। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस में प्रमुख (अंडरराइटिंग ऐंड क्लेम्स) संजय दत्ता कहते हैं, 'खरीदारों को बीमा कंपनियों के ब्रांड पर विचार करना चाहिए। वे ऐसी कंपनी से पॉलिसी खरीद सकते हैं, जिनका मोटर बीमा कारोबार बड़ा और विश्वसनीय है। खरीदार को बीमा कंपनी के दावा निपटाने के रिकॉर्ड की भी छानबीन करनी चाहिए।'
 
अलग-अलग बीमा कंपनियां विभिन्न प्रकार की अतिरिक्त (ऐड-ऑन) खूबियां भी ग्राहकों के सामने रखती हैं। 121पॉलिसी डॉट कॉम के मुख्य परिचालन अधिकारी राहुल मोहता कहते हैं, 'यह जरूर देख लें कि किस सामान्य बीमा कंपनी के ऐड-ऑन ऑफर आपकी जरूरतों के अनुरूप है। उसी हिसाब से खरीदारी करें।' मोहता कहते हैं कि पॉलिसी की खूबियों के आधार पर कुछ पॉलिसियां छांटने के बाद उन्हें प्रीमियम पर विचार करना चाहिए।
 
एमआईएसपी व्यवस्था के बाद पॉलिसियों के लिए जोखिम आधारित प्रीमियम का चलन शुरू हो सकता है। उदाहरण के लिए अगर आप अपनी कार कम इस्तेमाल करते हैं (मान लें कि आप उसे शनिवार या रविवार को ही चलाते हैं, जब भीड़भाड़ काफी कम होती है) तो आपको सस्ती पॉलिसी मिल सकती है। अगर आप कार को खुले में नहीं छोड़ते हैं बल्कि गैराज में रखते हैं तो भी आपको सस्ती पॉलिसी मिल सकती है क्योंकि उस स्थिति में कार को नुकसान पहुंचने का खतरा कम होता है। कोई व्यक्ति कार कितने किलोमीटर चलाता है और उसका चलाने का तरीका क्या है, इन सबका पता लगाने के लिए अब टेलीमैटिक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। 
 
एजेंटों के बाद वाहन डीलर ही बीमा पॉलिसी बिकवाने में सबसे ज्यादा मददगार होते हैं। माथुर मानते हैं कि डीलर जोखिम आधारित प्रीमियम तय करने में बीमा कंपनियों की मदद कर सकते हैं। माथुर कहते हैं, 'जोखिम के आधार पर प्रीमियम तय करने के लिए बीमा कंपनियों को ग्राहकों से जुड़ी जानकारी चाहिए। ग्राहक कार डीलर के शोरूम में कम से कम तीन से चार बार जाते हैं और कई घंटे वहां बिताते हैं। डीलर के साथ बातचीत के दौरान वे सहजता के साथ जानकारी साझा कर सकते हैं। उनसे जुड़ी जानकारी के आधार पर उन्हें आकर्षक प्रीमियम की पेशकश की जा सकती है।' आईआरडीएआई का नया दिशानिर्देश नवंबर में प्रभावी हो सकता है।
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