होम » Investments
«वापस

नहीं नियमित आमदनी तो एकल प्रीमियम पॉलिसी ही भली

चिराग मडिया |  Nov 12, 2017 07:25 PM IST

पिछले साल एकल प्रीमियम वाली जीवन बीमा पॉलिसियों के प्रति आकर्षण में तेजी देखने को मिली। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के अनुसार सितंबर में अकेले एकल प्रीमियम मद में 3,098 करोड़ रुपये का नया बिजनेस संग्रह दर्ज किया गया जो सालाना आधार पर 52 प्रतिशत तक अधिक है।  इस वित्त वर्ष में भी यही रुझान है। पहली दो तिमाहियों में इस क्षेत्र में नया बिजनेस प्रीमियम 26 फीसदी बढ़कर 12,831 करोड़ रुपये पहुंच गया जो एक साल पहले 10,180 करोड़ रुपये था। नोटबंदी और जीवन बीमा कंपनियों का जोरदार अभियान इस वृद्घि के मुख्य कारण रहे।

 
आईडीबीआई फेडरल लाइफ इंश्योरेंस में मुख्य कार्याधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक विघ्नेश शहाणे कहते हैं, 'हम एकल प्रीमियम पर ध्यान दे रहे हैं क्योंकि ऐसे निवेशकों का भी एक बड़ा तबका है जो अपना प्रीमियम एकमुश्त चुकाना चाहता है। इसके अलावा इन पॉलिसियों से हमें राजस्व वृद्घि मिलती है  और ये बेहद मुनाफे वाली योजनाएं हैं।' ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक पंकज मठपाल कहते हैं, 'दो बातों ने एकल प्रीमियम योजनाओं के प्रति आकर्षण बढ़ाया है। नियमित प्रीमियम की तुलना में कम शुल्क और प्रीमियम की तारीख को लेकर लगातार चिंता करने का झंझट नहीं। हो सकता है कि कई लोग इसे निवेश योजना के तौर पर भी खरीदते हों।' इन पॉलिसी में प्रशासनिक शुल्क और प्रीमियम आवंटन जैसे खर्च भी पारंपरिक पॉलिसी की तुलना में कम हैं।
 
नाम से ही जाहिर है कि सिंगल प्रीमियम प्लान ऐसी बीमा योजनाएं हैं जिनमें पॉलिसीधारक पूरी अवधि के लिए एक बार प्रीमियम चुकाता है। ये पारंपरिक और यूनिट-लिंक्ड बीमा योजना (यूलिप) दोनों तरह की हो सकती हैं। ऐसी योजनाओं की लॉक-इन अवधि प्लान के प्रकार और बीमा कंपनी के आधार पर 5 से 10 साल तक होती है। हालांकि इन पॉलिसी में कराधान को समझना महत्त्वपूर्ण है। एकल प्रीमियम पॉलिसी में दोनों तरह के कर लाभ मिलते हैं। एक, धारा 80सी के तहत किए गए निवेश पर और दूसरा, परिपक्वता पर मिलने वाली रकम धारा 10 (10डी) के तहत जो कि कर-मुक्त होती है। हालांकि ये लाभ तभी मिलते रहेंगे जब पॉलिसीधारक कुछ खास शर्तों को पूरा करे। धारा 80सी और धारा 10डी के तहत कर लाभ तभी मिलेंगे जब बीमित रकम सालाना प्रीमियम की राशि का 10 गुना हो। मठपाल कहते हैं, 'यदि एकल प्रीमियम 1 लाख रुपये है और बीमित रकम 10 लाख रुपये तो पूरी रकम आय कर अधिनियम की धारा 80सी के तहत कर लाभ के लिए योग्य होगी। लेकिन मान लीजिए कि बीमित रकम 5 लाख रुपये है तो ऐसी सूरत में प्रीमियम रकम का सिर्फ 10 प्रतिशत यानी 10,000 रुपये ही धारा 80सी के तहत छूट के दायरे में आएंगे।'
 
कई वित्तीय योजनाकार एक बड़ी वजह से इस योजना के पक्ष में नहीं हैं। यह कारण है प्रीमियम पर बचत। मुंबई में वित्तीय योजनाकार गौरव मशरूवाला का कहना है, 'हम सिंगल प्रीमियम प्लान का सुझाव नहीं देते हैं क्योंकि अगर पॉलिसीधारक 5 करोड़ रुपये की बीमित रकम के लिए 20 साल की पॉलिसी खरीदता है तो उसे सिर्फ एक बार ही प्रीमियम चुकाना पड़ेगा। लेकिन यदि वह इस पॉलिसी के लिए हर साल नियमित रूप से प्रीमियम चुकाता है और 10 साल बाद उसकी मौत हो जाती है तो उसके परिवार को  सिर्फ 10 प्रीमियम चुकाने के बाद ही पूरी बीमित रकम मिल जाएगी।' निशिचत ही, अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से भुगतान नहीं करना चाहता या उसकी नियमित आय नहीं है (जैसे फिल्म कलाकार या अनुबंध पर काम करने वाले लोग) तो उसके लिए यह अच्छी योजना है। अन्यथा, नियमित प्रीमियम  वाली योजना ही अपनाना बेहतर कदम है। 
कीवर्ड IRDAI, insurance, बीमा पॉलिसी,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक