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लघु बचत पर नए नियम से प्रवासी भारतीयों को चपत

संजय कुमार सिंह |  Nov 12, 2017 07:28 PM IST

पहले अगर आप प्रवासी भारतीय (एनआरआई) बनते थे तो आप सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) खाता नहीं खोल सकते थे। लेकिन अगर एनआरआई बनने के समय आपके पास पीपीएफ खाता था तो आप इसे चलाए रख सकते थे  और एक निवासी भारतीय नागरिक की तरह आपको भी सभी लाभ मिलते थे। लेकिन इस खाते को आगे नहीं बढ़ा सकते थे। सरकार ने हाल में एक राजपत्रित अधिसूचना जारी कर कहा है कि जैसे ही कोई व्यक्ति एनआरआई बनेगा, उसका पीपीएफ खाता बंद मान लिया जाएगा।  एनआरआई बनने के दिन से उसके खाते में पड़ी रकम पर वही ब्याज मिलेगा जो डाकघर के बचत खाते पर मिलता है यानी 4 फीसदी। एक अलग अधिसूचना में कहा गया कि राष्टï्रीय बचत पत्र (एनएससी) को भी व्यक्ति के प्रवासी निवासी बनने के दिन से ही भुना समझा जाएगा।
 
सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया करते हुए मुंबई के वित्तीय योजनाकार अर्णव पंड्ïया कहते हैं, 'ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया है कि एनआरआई लोगों को सरकार द्वारा स्थानीय नागरिकों को मुहैया कराई जाने वाली ऊंची ब्याज दरों का लाभ नहीं मिले।' इस अधिसूचना का उन लोगों पर विपरीत असर पड़ेगा जो कुछ वर्षों के लिए विदेश जाते हैं, भले ही वे दो साल जैसी कम अवधि के लिए जाते हों, मसलन आईटी जैसे क्षेत्रों में कम समय के लिए विदेश जाना आम बात है। अगर इन कर्मचारियों का अपना कोई निजी पीपीएफ खाता है तो इसे बंद समझा जाएगा और बाकी राशि पर सिर्फ 4 प्रतिशत ब्याज मिलेगा। जब भी ये नागरिक वापस आएंगे (मान लीजिए दो वर्ष बाद) तो उनको रिटर्न की ऊंची दर के लिए यह खाता दुबारा शुरू करना होगा। विश्लेषकों का मानना है कि इसका विपरीत असर पड़ेगा। 
 
आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल कहते हैं, 'मौजूदा अधिसूचना के अनुसार अगर कोई व्यक्ति दो साल जैसी छोटी सी अवधि के लिए भी विदेश जाता है तो उसका पीपीएफ खाता बंद कर दिया जाएगा। उसने अगर पीपीएफ के जरिए सेवानिवृत्ति की कोई योजनाबनाई है तो वह संकट में फंस जाएगी।' मर्चेंट नेवी जैसे पेशों से जुड़े कई लोग असल में उन दिनों की संख्या की गणना करते हैं जो उन्होंने हर साल देश के भीतर या बाहर बिताए हैंं और उस वर्ष के लिए अपने प्रवासी निवासी/निवासी दर्जे के आधार पर टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं (अगर कोई व्यक्ति पिछले कम से कम 182 दिन से देश में रहा हो तो उसे निवासी माना जाता है)। ऐसे लोगों के लिए नए नियमों के बाद पीपीएफ और एनएससी में निवेश करना मुश्किल हो सकता है।
 
कुछ मसलों पर स्थिति स्पष्टï किए जाने की जरूरत है। वित्तीय योजनाकार अरविंद ए राव कहते हैं, 'सरकार को यह साफ करने की जरूरत है कि एनआरआई की कौन सी परिभाषा लागू होगी - आय कर की या फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) की।' नए नियमों से उन एनआरआई पर भी असर पड़ेगा जो कुछ ही वर्ष पहले विदेश गए हैं, लेकिन देश में जिनका पीपीएफ खाता अब भी चल रहा है। राव कहते हैं, 'यह अधिसूचना एक सिरे से सभी के लिए है। इसमें कहा गया है कि जिस दिन से व्यक्ति एनआरआई बनेगा, उसी दिन से उसका खाता बंद मान लिया जाएगा। यह उन पुराने लोगों पर भी लागू होगा जो इस अधिसूचना से पहले ही देश छोड़ चुके हैं।' 
 
इसलिए अगर कोई पांच साल पहले देश छोड़ गया है तो उसका खाता पुरानी तारीख से ही बंद मान लिए जाने की संभावना है। उसे एनआरआई बनने के समय से सिर्फ 4 प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा। इसे लेकर भी स्थिति अधिक स्पष्टï किए जाने की जरूरत है। राव पूछते हैं, 'इन लोगों से रकम कैसे वसूली जाएगी? उनके पीपीएफ खातों में ब्याज पहले ही जमा हो चुका है। क्या इसे वापस लिया जाएगा? या फिर यह रकम भविष्य में उन्हें चुकाए जाने वाले ब्याज से काट ली जाएगी।' उनका कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द इन मुद्दों पर स्थिति स्पष्टï करने की जरूरत है।
 
इसलिए अब विदेश जाने वाले लोगों को जाते समय ही अपने खाते बंद करा देने चाहिए। पंड्ïया कहते हैं, 'यदि व्यक्ति ऐसा नहीं करता है तो उसे सिर्फ 4 प्रतिशत का ही प्रतिफल मिलेगा जो काफी कम है।' एनआरआई जिन निर्धारित आय वाली योजनाओं में निवेश कर सकते हैं, उनमें बॉन्ड और डेट म्युचुअल फंड शामिल हैं। एनआरआई बन चुके लोगों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे खुद ही अपने खाते बंद करा लें और अगली बार जब भी भारत आएं तो इस रकम को निकाल लें।
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