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मजबूती के ग्रिड में पावरग्रिड

उज्ज्वल जौहरी |  Nov 12, 2017 07:41 PM IST

देश की सबसे बड़ी विद्युत पारेषण कंपनी पावरग्रिड मजबूत पूंजीकरण वृद्घि का सिलसिला बरकरार रखे हुए है। इससे इसकी संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। पूंजीकरण से संकेत मिलता है कि परिसंपत्तियां (पारेषण क्षमता और इससे जुड़े उपकरण) वाणिज्यिक रूप से परिचालन में आ रही हैं।  पावरग्रिड के लिए निवेशित पूंजी पर प्रतिफल हासिल करने के लिहाज से यह जरूरी है। 

 
सितंबर तिमाही में पूंजीकरण 49 फीसदी बढ़कर 9,970 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया जो विश्लेषकों के अनुमान से अधिक है। एलारा कैपिटल ने इसके लिए करीब 7500 करोड़ रुपये का अनुमान जताया था। कंपनी ने 2,266 किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइनें जोड़ीं और साथ ही 17.5 जीवीए क्षमता के चार सबस्टेशन लगाए। इससे उसे नई क्षमता को वाणिज्यिक क्षमता में तब्दील करने में मदद मिली। इस मजबूत रुझान और नए निर्माण से विश्लेषक उत्साहित बने हुए हैं। पावरग्रिड की इस समय 88,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं और 3,000 करोड़ रुपये की अन्य परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
 
इसके अलावा कंपनी के पास लगभग 18,000 करोड़ रुपये की ऐसी परियोजनाएं हैं जो उसने शुल्क दर-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में हासिल की हैं। इस तरह उसकी कुल परियोजनाओं का आकार बढ़कर 1,09,000 करोड़ रुपये हो जाता है। ये परियोजनाएं तीन साल में वाणिज्यिक रूप से चालू हो जाने का अनुमान है। एमके ग्लोबल के विश्लेषकों का कहना है कि उन्हें अगले चार वर्षों के दौरान 32,500 करोड़ रुपये के सालाना पूंजीकरण की उम्मीद है। उनके अनुसार पावरग्रिड का पूंजी पर प्रतिफल (आरओई) वित्त वर्ष 2019 तक 18.2 फीसदी हो जाने से वित्त वर्ष 2019 के दौरान वह आय में 21.9 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर की वृद्घि दर्ज करेगी।
 
संयुक्त उपक्रम, परामर्श कार्य, दूरसंचार टावर और अब भारतीय रेलवे से नए ऑर्डर विकास के वाहक के तौर पर उभर रहे हैं। कंपनी को रेलवे से ऑर्डर हासिल होने की उम्मीद है। रेलवे ने वर्ष 2021-22 तक 33,000 किलोमीटर मार्ग का विद्युतीकरण करने के लिए 35,000 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। दूरसंचार क्षेत्र में कंपनी का इरादा अपने मौजूदा 42,000 किलोमीटर के फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क का विस्तार करने और टावर इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करने का है। पहली छमाही में दूरसंचार क्षेत्र से आय करीब 297 करोड़ रुपये  रही जो एक साल पहले के मुकाबले 23 फीसदी अधिक है। कंपनी ने दूसरी तिमाही में 38 ग्राहक (सरकारी और निजी) भी जोड़े।
 
संयुक्त उपक्रमों की बात करें तो कंपनी ने अंतरराज्यीय नेटवर्क विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के साथ साझा उपक्रम बनाया है। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह पूंजीगत खर्च के जरिए उसे सबसे बड़े राज्य के ट्रांसमिशन बाजार में प्रवेश करने मदद मिलेगी। इससे पहले कंपनी बिहार के साथ संयुक्त उपक्रम बना चुकी है। एक साल पहले की तुलना में कंपनी का राजस्व दूसरी तिमाही में 16 प्रतिशत बढ़कर करीब 7,250 करोड़ रुपये हो गया जिसे पारेषण (राजस्व में 93 फीसदी योगदान) में 15.8 फीसदी और दूरसंचार व्यवसायों में 21.3 फीसदी की वृद्घि से मदद मिली। परिचालन मुनाफा 17 फीसदी बढ़ा लेकिन ज्यादा पारिश्रमिक की वजह से मार्जिन 89.3 फीसदी पर काफी हद तक सपाट बना रहा। परिसंपत्तियों के ऊंचे पूंजीकरण की वजह से वित्तीय लागत बढऩे और मूल्यह्रïास में वृद्घि से शुद्घ लाभ एक साल पहले की तुलना में सिर्फ 14 फीसदी बढ़ा। लेकिन विश्लेषक मान रहे हैं कि वित्त वर्ष 2017-19 के दौरान कंपनी की कमाई सालाना आधार पर 19 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ेगी।
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