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अशोक लीलैंड: दूसरी छमाही में मिलेगी मजबूती

टी ई नरसिम्हन |  Nov 12, 2017 07:42 PM IST

वाणिज्यिक वाहनों (सीवी) की बड़ी निर्माता अशोक लीलैंड के लिए सितंबर तिमाही का प्रदर्शन कई मानकों पर उम्मीद की तुलना में कमजोर रहा है। हालांकि आगामी राह बेहतर रहने का अनुमान है और विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी 2017-18 की दूसरी छमाही में बेहतर प्रदर्शन दर्ज करेगी। कंपनी की शुद्घ बिक्री 6,047 करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 31 प्रतिशत तक की वृद्घि), परिचालन लाभ 609 करोड़ रुपये (13.5 प्रतिशत तक की वृद्घि) और शुद्घ लाभ 334 करोड़ रुपये (13.5 फीसदी) रहा। लेकिन यह ब्लूमबर्ग के 6,178 करोड़ रुपये, 680 करोड़ रुपये और 384 करोड़ रुपये के अनुमानों की तुलना में कमजोर हैं। हालंकि कंपनी प्रबंधन का कहना है कि मौजूदा बाजार हालात में यह प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। नोटबंदी, बीएस-4 उत्सर्जन मानकों पर अमल और नई जीएसटी व्यवस्था से पिछली कुछ तिमाहियों में उद्योग की बिक्री प्रभावित हुई है। इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में बिक्री में सुधार आने से लीलेंड की कुल बिक्री एक साल पहले की तुलना में 22 फीसदी बढ़कर 26,964 वाहन रही। बिक्री के लिहाज से यह अच्छी तिमाही रही, लेकिन उद्योग के समान्य रुझानों की वजह से परिचालन प्रदर्शन प्रभावित हुआ। उद्योग की बिक्री दूसरी तिमाही में 20 फीसदी बढ़ी। लीलेंड के घरेलू ट्रक बाजार में हिस्सेदारी 31.9 फीसदी से बढ़कर 33.1 फीसदी हो गई और बिक्री भी 36 प्रतिशत तक बढ़कर 23,593 वाहनों पर पहुंच गई। लेकिन बसों की बिक्री एक साल पहले की तिमाही के 39.5 फीसदी से घटकर 38.1 फीसदी रह गई। 

 
मुख्य वित्तीय अधिकारी गोपाल महादेवन का कहना है कि परिचालन मुनाफा मार्जिन एक साल पहले के 11.6 फीसदी की तुलना में घटकर 10.1 फीसदी रह गया। फिर भी, लगातार 10 तिमाहियों से मार्जिन दो अंक में रहा है और लीलेंड मुनाफे वाली प्रमुख वाहन निर्माताओं में से एक है।  उनका कहना है कि परिचालन मार्जिन पर किसी अक्षमता की वजह से असर नहीं पड़ा बल्कि बाजार में भारी छूट और जिंस कीमतों में 3-4 फीसदी की तेजी के कारण ऐसा हुआ। इसके अलावा एक साल पहले की तिमाही में ज्यादा मार्जिन वाले रक्षा व्यवसाय से भी 50 करोड़ रुपये की आय हासिल हुई थी। 
 
उनका कहना है, 'हम बाजार हिस्सेदारी नहीं हथियाना चाहते। इसलिए हम उन कारोबार में छूट या रियायत जैसी रणनीतियों से दूर ही रहे जहां यह आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं है।' वाणिज्यिक वाहनों पर औसतन छूट 2.25 से 2.75 लाख रुपये के बीच है। वर्ष 2013 और 2014 में उद्योग ने क्षमता इस्तेमाल को अनुकूल बनाने के लिए इस पर दांव खेला था क्योंकि तब मांग सिर्फ दो से ढाई लाख वाहन थी। आज मांग 320,000 से 350,000 वाहन तक है। अशोक लीलेंड ने एक साल पहले बहुत ऊंचे मार्जिन पर सेनेगल को 175 करोड़ रुपये के वाहनों का निर्यात भी किया था लेकिन दूसरी तिमाही में उसे इसमें कामयाबी नहीं मिली। एक साल पहले की तिमाही के दौरान निर्यात से मार्जिन में 2.5 फीसदी का इजाफा हुआ। कंपनी को उम्मीद है कि अगली दो तिमाहियों में उसे इस मोर्चे पर अच्छे नतीजे मिलेगें। दूसरी तिमाही में निर्यात 39 फीसदी बढ़ा।
 
मार्जिन पर एक और कारक जीएसटी ने भी असर डाला। जीएसटी के कारण कंपनी को पंतनगर (उत्तराखंड) में अपनी इकाई से मिलने वाला कर लाभ बंद हो गया। इसे लेकर आगे की संभावना स्पष्टï नहीं है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के जिनेश गांधी का कहना है कि जिंस कीमतों में तेजी ने भी कंपनी के कच्चे माल की लागत पर असर डाला है। महादेवन का मानना है कि उद्योग की बिक्री में दिसंबर तिमाही में तेजी आएगी, जबकि मार्च तिमाही पिछले साल की पूर्व-खरीदारी (नए उत्सर्जन मानकों के लागू होने से पहले) की वजह से सपाट रह सकती है। उनका मानना है कि मार्जिन में सुधार आएगा, क्योंकि कंपनी न केवल वाहनों और बिक्री के मिले-जुले प्लान पर काम कर रही है। इस समय कंपनी का 10-12 फीसदी राजस्व निर्यात से आता है। कंपनी को निर्यात से कम से कम 25 फीसदी राजस्व हासिल होने की उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र इस समय एक साल में लगभग 700 करोड़ रुपये का योगदान दे रहा है। मध्यावधि में इसके 5 से 7 गुना तक बढऩे का अनुमान है।
 
हल्के वाणिज्यिक वाहन व्यवसाय (इसमें निसान भी शामिल जिसे कंपनी ने पिछले साल दिसंबर में खरीदा) ने भी कर पूर्व लाभ दर्ज कर छाटे को पीछे छोड़ा। ये पहल ऐसे समय में कंपनी के लिए जोखिम कम करने की रणनीति के लिहाज से अहम हैं जब घरेलू व्यवसाय को अस्थिरता से जूझना पड़ रहा है।  लीलेंड ने अगले दो-तीन वर्षों के दौरान 500-700 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च की योजनाएं बनाई हैं। जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के गौरांग शाह ने कहा, 'हम लीलेंड पर सकारात्मक हैं। भविष्य में कमर्शियल वाहनों की मांग में तेजी, रक्षा क्षेत्र में उपस्थिति और नए एलसीवी लॉन्च किए जाने का असर कंपनी के प्रदर्शन पर दिखेगा।'
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