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आभूषण व्यवसाय से टाइटन की बढ़ी चमक

हंसिनी कार्तिक |  Nov 12, 2017 07:43 PM IST

एक दशक पहले तक घड़ी सेगमेंट टाइटन का बेहद मुनाफे वाला व्यवसाय था और उसके राजस्व में इसका योगदान लगभग 50 फीसदी का था। इसके बावजूद टाइटन बाजार मूल्य के लिहाज से टाटा समूह के लिए शीर्ष रैंकिंग कंपनियों में शामिल नहीं थी। भले ही टाइटन अब भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला घड़ी ब्रांड है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसकी स्थिति बदलने का काम आभूषण व्यवसाय ने किया है। टाइटन का शेयर सोमवार को 19 फीसदी चढ़ गया और इस कैलेंडर वर्ष में कंपनी का शेयर यूं भी बहुत तेजी से मजबूत हुआ है। इसकी वजह से टाइटन टाटा समूह में तीसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बन गई है। यह बदलाव स्वयं यह दर्शाता है कि कंपनी कितनी महत्त्वपूर्ण हो गई है। 

 
टाटा स्टील हालांकि टाटा समूह की सबसे पुरानी कंपनी है और टाइटन के मुकाबले पांच गुना अधिक कमाई करती है। लेकिन पिछले सोमवार को टाइटन का बाजार पूंजीकरण 69,651 करोड़ हो गया और उसने टाटा स्टील के 68,834 करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण को पार कर लिया।  टाइटन के शीर्ष तीन कंपनियों में आने से पता चलहता है कि निवेशक किस तहर उपभोक्ता केंद्रित शेयरों को तरजीह दे रहे हैं। जाने-माने निवेशक राकेश झुनझुनवाला टाइटन में निवेश करने वाले शुरुआती निवेशकों में शामिल रहे हैं।
 
टाइटन के स्वर्ण व्यवसाय की बढ़ती प्रासंगिकता से हालात बदलने में काफी मदद मिली है। सितंबर तिमाही के मजबूत प्रदर्शन के लिए भी पूरा श्रेय टाइटन के आभूषण व्यवसाय को जाता है। हालांकि दूसरी तिमाही को खासकर त्योहारों और शादियों के सीजन की वजह से मजबूती मिली है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि चालू वर्ष की दूसरी तिमाही ज्वैलरों के लिए धन शोधन निरोधन अधिनियम लागू होने के कारण अपेक्षाकृत धीमी रहेगी। इस अधिनियम के कारण ज्वैलरो को 50,000 रुपये से अधिक की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के पैन से जुड़ी जानकारी देनी पड़ी। इसके बावजूद आभूषण खंड का राजस्व 36 प्रतिशत बढ़कर 2,711 करोड़ रुपये पर पहुंच गया और इससे टाइटन की दूसरी तिमाही का राजस्व 30 फीसदी तक बढ़कर 3,376 करोड़ रुपये हो गया।
 
निवेशकों के लिए प्रस्तुति में टाइटन के प्रबंधन ने कहा, 'ज्वेलरी की श्रेणी में बाजार भागीदारी लगातार बढ़ रही है और घड़ी की श्रेणी में भी अच्छी वृद्घि से कंपनी को  राजस्व में 30 फीसदी और कर बाद मुनाफे में लगभग 74 फीसदी की बढ़त दर्ज करने में मदद मिली है।' व्यवसाय के एबिटा मार्जिन में मजबूती आई है और दूसरी तिमाही में यह 13.6 फीसदी रहा जबकि एक साल पहले की समान अवधि में 11 फीसदी था। मार्जिन कई तिमाहियों की ऊंचाई पर है। मार्जिन जून तिमाही के 10.2 फीसदी से भी सुधरा है। कंपनी द्वारा शादियों और ऊंची कीमत वाले हीरा आभूषण पर ध्यान केंद्रित किए जाने से निवेशक दूसरी तिमाही का मार्जिन आगामी तिमाहियों में मजबूत बने रहने या इसमें कुछ सुधार आने की उम्मीद कर सकते हैं। पीएमएलए को समाप्त (अक्टूबर के शुरू में) किए जानेे, दीवाली मांग आदि से दिसंबर तिमाही की ज्वैलरी बिक्री और मार्जिन में मजबूती आएगी। लेकिन प्रबंधन इसे लेकर आशंकित है कि सरकार द्वारा इस तरह की राहत लंबे समय तक बरकरार रहेगी या नहीं।
 
दूसरी तिमाही में कुछ अन्य सेगमेंटों - घड़ी और आईवियर- से भी मदद मिली और इन खंडों का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। जहां आईवियर सेगमेंट की प्राप्तियां सुस्त (1.4 फीसदी, दूसरी तिमाही में एबिटा मार्जिन) बनी रहीं, जबकि घड़ी सेगमेंट ने इस संदर्भ में एक साल पहले के 12.3 फीसदी के आंकड़े की तुलना में 16 फीसदी की प्राप्तियां दर्ज कीं। हालांकि प्रबंधन इसे लेकर आशंकित बना हुआ है कि मार्जिन में सुधार बरकरार रहेगा या नहीं क्योंकि उत्पाद मिश्रण आगामी तिमाहियों में प्रभावित हो सकता है।  हालांकि कंपनी का सहायक व्यवसाय बेशक ज्यादा दमदार नहीं है, लेकिन स्वर्ण एवं हीरा (आभूषण) का टाइटन के कुल राजस्व में 80 फीसदी का योगदान है और मध्यावधि  से दीर्घावधि में यह वृद्घि का प्रमुख वाहक  बना रहेगा।
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