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कर बचाने के लिए निवेश दिखाएं मगर हड़बड़ी न मचाएं

संजय कुमार सिंह |  Nov 19, 2017 09:34 PM IST

वित्त वर्ष की शुरुआत होते ही कर्मचारी बता देते हैं कि कर बचाने के लिहाज से वे किस तरह का निवेश करने जा रहे हैं या किन योजनाओं में रकम जमा करने जा रहे हैं। उनकी घोषणा के मुताबिक ही कंपनी सभी प्रकार की कटौती का हिसाब लगा लेती है और उसी आधार पर हर महीने उन्हें वेतन देती है। अभी साल का वह समय आ गया है, जब मानव संसाधन विभाग आपको याद दिलाता है कि आपने कौन-कौन से निवेश का वायदा किया था और उनके दस्तावेज भी आपसे मांगता है। अगर आपने वायदे के मुताबिक निवेश नहीं किया है तो वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान वेतन में भारीभरकम कटौती के लिए तैयार रहें। लेकिन हड़बड़ी में बचत या निवेश की कोई भी योजना मत खरीदिए। सबसे पहले हिसाब-किताब लगाइए:

 
पहले देखें कि कितना कर चुके हैं निवेश
 
धारा 80सी के तहत आप बहुत सारी श्रेणियों में कर छूट ले सकते हैं और हो सकता है कि उनमें से कुछ में आप पहले से ही निवेश कर रहे हों। इन श्रेणियों में जीवन बीमा का प्रीमियम, बच्चों की शिक्षा, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में योगदान और आवास ऋण पर चुकाया गया मूलधन शामिल हैं। धारा 80सी के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये की ही छूट ली जा सकती है और अगर इसमें कोई कमी रह गई है तभी आपको और निवेश करने की जरूरत पड़ेगी।
 
क्या आपके पास पर्याप्त बीमा कवर है?
 
पहले देखिए कि आपने पर्याप्त जीवन बीमा लिया हुआ है अथवा नहीं। इसे जानने के लिए आप एक मोटा नियम अपना सकते हैं, जो कहता है कि आपके पास अपनी आय का दस गुना बीमा कवर होना चाहिए। यदि आपके पास इतना बीमा कवर नहीं है तो उसकी भरपाई के लिए आप टर्म इंश्योरेंस ले सकते हैं। बीमा कंपनी को चुनने के लिए देखें कि दावों का निपटारा करने का उसका रिकॉर्ड कैसा रहा है, उसके प्रीमियम की दर क्या है, उसका सॉल्वेंसी रेश्यो यानी उसकी कर्ज चुकाने की क्षमता कितनी है और दावा निपटाने में वह कितना वक्त लेती है।
 
संपत्ति के आवंटन का लें जायजा
 
इसके बाद आपको यह देखना चाहिए कि आपने अपने वर्तमान निवेश का कितना-कितना हिस्सा किस-किस संपत्ति में लगाया है। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार पर्सनल फाइनैंस प्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव ने कहा, 'अगर आपने डेट में ज्यादा निवेश कर दिया है तो कर बचाने के लिए इक्विटी आधारित योजना में रकम लगाएं और अगर आपका पहले का निवेश इक्विटी में अधिक है तो नया निवेश डेट में करें।' 
 
उदाहरण के लिए वेतनभोगी कर्मचारी हमेशा कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ, जिसमें फिलहाल 8.65 फीसदी रिटर्न मिलता है) में योगदान करते ही हैं, इसलिए उनके निवेश में डेट की हिस्सेदारी कुछ ज्यादा रहती है। इसमें संतुलन बिठाने के लिए वे इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) फंड में अथवा म्युचुअल फंड की सेवानिवृत्ति योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। दोनों सूरतों में ही उन्हें धारा 80 सी के फायदे मिलेंगे। यदि किसी व्यक्ति के पास अपना रोजगार है और उसने शेयरों यानी इक्विटी में निवेश शुरू कर दिया है तो ईपीएफ में निवेश का विकल्प नहीं होने के कारण सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) उसके लिए अधिक कारगर हो सकती है।
 
स्वास्थ्य बीमा भी हो सकता है बेहतर विकल्प 
 
आप मेडिक्लेम या क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी (गंभीर बीमारी का बीमा) में जो प्रीमियम चुकाते हैं, उस पर धारा 80सी के तहत छूट मिलती है। क्लियरटैक्स के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता ने कहा, 'जो व्यक्ति खुद, पत्नी या स्वयं पर निर्भर बच्चों के स्वास्थ्य बीमा पर प्रीमियम चुकाते हैं, वे 25,000 रुपये तक की छूट हासिल कर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति 60 साल से अधिक उम्र का है तो वह स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम के एवज में अपनी कर योग्य आय में 30,000 रुपये की कटौती का दावा कर सकता है। माता-पिता के लिए मेडिक्लेम पॉलिसी खरीदने पर आपको अतिरिक्त कटौती का फायदा मिल सकता है।' यदि माता-पिता वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में आते हैं तो 30,000 रुपये तक की छूट मिल जाती है और अगर उम्र कम है तो 25,000 रुपये तक की कर छूट आप हासिल कर सकते हैं।  इस तरह किसी भी व्यक्ति को मेडिकल तथा गंभीर बीमारी की बीमा पॉलिसी पर अधिकतम 60,000 रुपये तक का कर लाभ मिल सकता है। लेकिन आज जो स्वास्थ्य बीमा लेते हैं, उसकी राशि केवल कर के फायदे के हिसाब से ही निर्धारित नहीं की जानी चाहिए बल्कि यह भी देखना चाहिए कि आपके स्वास्थ्य के हिसाब से कितने बीमा की आवश्यकता है।
 
मुफीद हो तो एनपीएस का लें सहारा
 
नैशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में निवेश करने पर धारा 80सीसीडी (1बी) के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती का फायदा भी उठाया जा सकता है। लेकिन इसमें निवेश करने से पहले जांच लीजिए कि इसमें कितना नफा है और कितना नुकसान। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन ने कहा, 'एनपीएस सशर्त सेवानिवृत्ति बचत योजना है। इसका पैसा आपको सेवानिवृत्ति के समय ही मिलता है। अगर आपको इतने लंबे अरसे तक रकम फंसाने में कोई दिक्कत नहीं है तब ही इसमें निवेश कीजिए। अगर आप सेवानिवृत्ति से पहले पैसा निकालते हैं तो इस कोष की 80 फीसदी धन राशि सेवानिवृत्ति के समय के लिए रख ली जाएगी और आपको केवल 20 फीसदी रकम मिल पाएगी।'
 
आपको किन-किन बातों से बचना चाहिए 
 
अगर कर से जुड़े निवेश के लिए आप आखिरी वक्त आने तक का इंतजार करेंगे तो इस बात की पूरी संभावना है कि हड़बड़ी में आपसे गलत जगह निवेश हो जाएगा। ऐसी योजनाओं से फौरन किनारा कर लें, जिनमें बहुत बड़ी रकम लगानी पड़ रही है और हर साल उतनी बड़ी रकम लगाना आपके वश से बाहर होगा।' पीपीएफ में आपको 15 वर्ष तक निवेश करना पड़ता है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि साल में महज 500 रुपये का निवेश कर आप इस खाते को चालू रख सकते हैं। यदि किसी योजना में निवेश और बीमा दोनों एक साथ हैं तो आपको हर साल उसमें मोटी रकम लगानी पड़ सकती है, जो शायद आपकी क्षमता से बाहर की बात होगी। राघव कहते हैं, 'परंपरागत योजनाओं में लगातार तीन साल तक प्रीमियम चुकाने के बाद ही आपको जमा पैसा वापस मिल पाता है। अगर आपने उस अवधि से पहले ही प्रीमियम देना बंद कर दिया तो आप अपनी जमा रकम भी गंवा देंगे।'
 
पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर और लीडर (व्यक्तिगत कर) कुलदीप कुमार ने कहा, 'बहुत से लोगों को यही नहीं पता होता कि एंडाउमेंट और मनीबैक जैसी पारंपरिक बीमा पॉलिसी में अगर आपने कम से कम दो साल तक और यूलिप योजनाओं में कम से कम पांच साल तक प्रीमियम जमा नहीं किया है तो आपने कर छूट का जो लाभ हासिल किया था, वह आपसे वापस ले लिया जाता है।'
 
अगर आप यूलिप पॉलिसी वापस यानी सरेंडर करते हैं तो आपकी जमा रकम डिस्कॉन्टिन्यू फंड में चली जाती है और उस पर चार फीसदी ब्याज जमा होता रहता है। पांच साल पूरे होने के बाद आपको यह रकम मिल सकती है। आदर्श स्थिति तो यही है कि कर से जुड़ी अपनी योजना की शुरुआत आप वित्त वर्ष के आखिर में नहीं बल्कि उसके आरंभ में ही कर दें। धवन कहते हैं, 'अगर आप ईएलएसएस या सेवाानिवृत्ति फंड (जिन्हें धारा 80सी के लाभ मिलते हैं) में निवेश कर रहे हैं तो आपको रुपये की औसत लागत का लाभ मिल रहा है। अगर आप पीपीएफ या पांच साल की कर बचाने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में रकम लगा रहे हैं तो आपको वर्ष की शुरुआत से ही ऊंचा ब्याज मिलने लगेगा। यह बचत चखातों पर मिलने वाले 3.5 से 6 फीसदी तक ब्याज के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।' इस समय पीपीएफ पर 7.8 फीसदी ब्याज मिल रहा है, जबकि पांच साल की कर बचत वाली एफडी पर दर करीब 7 फीसदी है।
 
यदि आप वर्ष के आरंभ से ही कर बचाने वाली योजनाओं में निवेश करते हैं तो जाहिर तौर पर आपके ऊपर दबाव बहुत कम हो जाएगा। इससे आप नियमित रूप से बचत कर पाएंगे, जो आसान है। अगर यह सब वर्ष के अंत के लिए छोड़ेंगे तो उस वक्त आपके सामने नकदी की किल्लत पैदा हो सकती है। जो लोग कर बचाने के चक्कर में वर्ष के अंत में निवेश करते हैं, वे अक्सर योजना की श्रेणी और योजना दोनों का ही चयन करने में गड़बडऱ कर जाते हैं। उन्हें बहकाकर पारंपरिक बीमा योजना बेची जा सकती है, जिसका प्रीमियम बहुत अधिक हो सकता है और कवर तथा प्रतिफल बहुत कम हो सकता है।  कई बार व्यक्ति योजना की श्रेणी तो सही चुन लेता है, लेकिन योजना गलत चुन लेता है। वह ईएलएसएस खरीदते समय गलत फंड में निवेश कर सकता है क्योंकि उसके पास ठीक से जांच-पड़ताल करने का वक्त ही नहीं होता। इसलिये यह सुनिश्चित कर लीजिए कि कर बचाने के लिए किया गया आपका निवेश आपके वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप ही हो।
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