होम » Investments
«वापस

बैंक खातेदार लाचार या बीमार तो क्या करें परिवार

तिनेश भसीन |  Nov 19, 2017 09:35 PM IST

हाल में बंबई उच्च न्यायालय ने एक महिला को अपने पति के बैंक खाते से लेनदेन करने की इजाजत दी। इस महिला का पति कोमा में था।  बैंकिंग तंत्र में ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, इसलिए अपने पति की संरक्षक नियुक्त किए जाने के लिए पत्नी के पास अदालत में जाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। किसी भी व्यक्ति को ऐसे हालात का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें परिवार का कमाऊ व्यक्ति कोमा में हो, अक्षम है, बिस्तर पर हो या दुर्घटना के बाद गंभीर हालत में है। 

 
कोलकाता के एक वित्तीय योजनाकार मल्हार मजूमदार ने कहा, 'एक आसान कदम उठाकर कोई भी शख्स अपने जीवन साथी को सभी वित्तीय खातों के इस्तेमाल का हक दे सकता है। कोई भी व्यक्ति 'आइदर ऑर सरवाइवर' यानी हममें में से जो भी जीवित हो का विकल्प चुन सकता है।' इस तरह की स्थिति कमाऊ व्यक्ति पहला खाताधारक है और उसका जीवन-साथी दूसरा। दोनों ही खाते में लेनदेन कर सकते हैं। दोनों में से किसी भी व्यक्ति के हस्ताक्षर लेनदेन के लिए वैध हैं। मजूमदार कहते हैं कि ऐसा बीमा पॉलिसी के अलावा सभी वित्तीय खातों में किया जा सकता है। कोई भी व्यक्ति इस विकल्प का इस्तेमाल बैंकिंग, म्युचुअल फंडों, शेयर कारोबार खाते आदि के लिए कर सकता है। 
 
इसके अलावा भी एक विकल्प है। इसे 'फॉरमर या सरवाइवर' यानी खुद या मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी कहा जाता है। इसमें केवल मुख्य खाताधारक ही खाते में लेनदेन कर सकता है। उसकी मृत्यु के बाद ही दूसरा धाताधारक स्वतंत्र रूप से खाते का परिचालन कर सकता है। लेकिन इसमें दूसरे धाताधारक को बैंक में आवश्यक कागजात जमा कराने होंगे।  हालांकि संयुक्त खाते (जॉइंट अकाउंट) में किसी भी लेनदेन के लिए दोनों पक्षों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। 
 
अगर कोई एक नहीं है तो लेनदेन नहीं हो सकता। फेडरल बैंक में कार्यकारी उपाध्यक्ष और खुदरा कारोबार के प्रमुख जोस के मैथ्यू कहते हैं, 'अगर कोई व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हो जाता है और उसकी स्थिति गंभीर है तो बैंक उसके इलाज के लिए धन जारी कर सकता है।' लेकिन यह पैसा केवल दुर्घटना से संबंधित इलाज या ऑपरेशन के लिए होगा और आवश्यक कागजात जमा कराने के बाद ही जारी किया जाएगा।
 
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति इतना बीमार है कि वह बैंकिंग लेनदेन के लिए हस्ताक्षर भी नहीं कर सकता तो लेनदेन अंगूठे के निशान का इस्तेमाल कर किया जा सकता है। लेकिन जब खाताधारक अंगूठे का निशान दे रहा हो तो वहां दो गवाहों का मौजूद होना जरूरी है। इन दो गवाहों में एक बैंक का अधिकारी होना अनिवार्य है। जो व्यक्ति अंगूठा लगाने की स्थिति में भी नहीं हैं तो दो गवाहों की मौजूदगी में पैर के अंगूठे का निशान इस्तेमाल किया जा सकता है या चेक या विड्रॉअल फॉर्म पर कोई निशान लिया जा सकता है। 
 
लेकिन ऐसे मामले भी हो सकते हैं, जिनमें खाताधारक का कोई जीवन साथी न हो और वह हममें से कोई का विकल्प इस्तेमाल नहीं कर पाए। ऐसे मामलों में वह व्यक्ति पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए अपने किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बैंक खाते के परिचालन के लिए अधिकृत कर सकता है। एमडीपी ऐंड पार्टनर्स में प्रबंध साझेदार निशित ध्रुव ने कहा, 'खाताधारक को विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी बनानी होगी। खाताधारक की मृत्यु के बाद अधिकृत व्यक्ति के सभी अधिकार खत्म हो जाते हैं और पावर ऑफ अटॉर्नी लागू हो जाती है।' विभिन्न अदालती फैसलों के मुताबिक मृत्यु होने पर खाते के परिचालन का हक मनोनीत व्यक्ति को मिल जाता है। मृतक के बैंक खाते के संबंध में मनोनीत व्यक्ति को अन्य कानूनी वारिसों में पहला अधिकार होगा। 
 
अगर कोई खाताधारक गुमशुदा है तो उसके खाते में वित्तीय लेनदेन करने का हक पाना मुश्किल है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 108 के मुताबिक व्यक्ति के गुमशुदा होने की खबर की तारीख से सात साल बाद ही मृत्यु का अनुमान जताया जा सकता है। गुमशुदा होने की तारीख का मतलब एफआईआर दर्ज कराने से है। गुमशुदगी के ऐसे मामलों में जीवन बीमा भी आएगा और परिवार के सदस्यों को दावे की राशि पाने के लिए सात साल इंतजार करना होगा।
कीवर्ड insurance, बीमा पॉलिसी,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक