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कच्चा तेल चढऩे से मजबूत होंगी गेल और ओएनजीसी

अमृता पिल्लई |  Nov 26, 2017 09:56 PM IST

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गेल, ओएनजीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी तेल एवं गैस उत्पादक अपस्ट्रीम कंपनियों को मदद मिलेगी जबकि डाउनस्ट्रीम मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव देखा जा सकता है। भारतीय कच्चे तेल की कीमतें नवंबर में बढ़कर 61.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं हैं जो पिछले चार महीने में लगभग 28 फीसदी की वृद्घि है। चार महीने पहले कीमतें 48.10 डॉलर के करीब थीं। विश्लेषकों का कहना है कि इस वृद्घि से तेल विपणन कंपनियों पर दबाव आएगा। हालांकि ये कंपनियां पेट्रोल और डीजल का बढ़ा बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं मगर गैस के मामले में उनको झटका झेलना होगा।

 
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) देश में तीन प्रमुख सार्वजनिक ओएमसी हैं। एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा, 'एचपीसीएल पर ज्यादा असर होगा क्योंकि उसका विपणन पर ज्यादा जोर रहा है।' आईआईएफएल की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार एचपीसीएल की विपणन से संबंधित एबिटा भागीदारी सर्वाधिक है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि पुराने भंडार से मिलने वाली बढ़त से कंपनी को कुछ हद तक भरपाई में मदद मिल सकती है। एक अन्य विश्लेषक ने बताया, 'उम्मीद है कि तिमाही के अंत तक भंडार में कुछ वृद्घि होगी। यदि कीमतें स्थिर रहती हैं तो इसमें कुछ और बढ़ोतरी हो सकती है।' इन तीनों कंपनियों में आईओसी को अपने भंडार से ज्यादा फायदा मिलने की आशा है। 
 
विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी निजी कंपनियां को भी इन्वेंट्री का लाभ मिलेगा। विश्लेषक ने कहा, 'आरआईएल को पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में अपनी उपस्थिति का भी लाभ मिलेगा।' हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्घि का ज्यादा फायदा अपस्ट्रीम कंपनियों को मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ओएनजीसी और ऑयल इंडिया इसकी मुख्य लाभार्थी होंगी।
 
फिच रेटिंग्स के अनुसार डाउनस्ट्रीम में बड़े पूंजीगत खर्च और संभावित समेकन की वजह से सरकारी तेल और गैस कंपनियों का क्रेडिट हिसाब गड़बड़ा सकता है, लेकिन उनकी अपनी रेटिंग के संदर्भ में थोड़ी गुंजाइश अब भी है। फिच ने पिछले सप्ताह अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड को भारी ऋण से पूंजीगत खर्च की वजह से ज्यादा फायदा हो सकता है। 
 
संभावना जताई जा रही है कि डाउनस्ट्रीम कंपनियों का रिफाइनिंग मार्जिन कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से वित्त वर्ष 2017 के स्तर से कुछ नीचे आने के बावजूद वित्त वर्ष 2018 के दौरान मजबूत बना रहेगा। फिच की रिपोर्ट में कहा गया है, 'आरआईएल और बीपीसीएल के लिए सकल रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत रहने की संभावना है क्योंकि इन कंपनियों ने हाल में अपने पूंजीगत खर्च कार्यक्रमों को पूरा किया है।'
 
प्राकृतिक गैस की प्रोसेसिंग एवं वितरण कंपनी गेल को भी गैस और कच्चे तेल की कीमतों में अनियमितता की वजह से अल्पावधि फायदा मिल सकता है। ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा, 'गेल को इसलिए अच्छी बढ़त मिलेगी क्योंकि वह गैस-केंद्रित कंपनी है और गैस कीमतें तिमाही आधार पर नहीं चढ़ी हैं।' हालांकि ये फायदे उस वक्त खत्म हो सकते हैं जब अगले साल मार्च में गैस कीमतों में संशोधन होगा।
 
कच्चे तेल की कीमतों में दीर्घावधि में तेजी के रुझान को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि इस संबंध में सरकारी बंदिशें अहम साबित होंगी। एक अन्य विश्लेषक ने कहा, 'यदि ओएमसी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का लाभ ग्राहकों को मुहैया कराने में समर्थ नहीं रहती हैं तो हम बंदिशों की वापसी देख सकते हैं।' विश्लेषकों का मानना है कि अगले एक साल के दौरान विभिन्न राज्यों में चुनाव के कारण सरकार के निर्णय प्रभावित होंगे। एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के विश्लेषक ने कहा, 'आपको यह देखना होगा कि चुनाव नजदीक होने पर सरकार ईंधन से जुड़े विभिन्न नियमों के साथ किस तरह कदम उठाती है। खुदरा क्षेत्र में परिचालन कर रही निजी कंपनियां प्रतिकूल नियमों की स्थिति में प्रभावित हो सकती हैं।'
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